उत्तर प्रदेश

श्रमिकों के परिवारों को शिक्षा स्वास्थ्य और आर्थिक मदद

Ratna Netam
13 Aug 2026 7:10 PM IST
श्रमिकों के परिवारों को शिक्षा स्वास्थ्य और आर्थिक मदद
x
लखनऊ : शहरों में खड़ी ऊंची इमारतों, सड़कों, पुलों, कारखानों, स्कूलों और अस्पतालों के निर्माण में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। धूप, धूल, बारिश और जोखिम के बीच काम करने वाले इन श्रमिकों की आय अक्सर नियमित नहीं होती। काम की जगह बदलने और रोजगार की अनिश्चितता के कारण उनके लिए बच्चों की पढ़ाई, बीमारी तथा दूसरी पारिवारिक जरूरतों का खर्च उठाना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड यानी यूपी बीओसीडब्ल्यू बोर्ड विभिन्न योजनाएं संचालित करता है। इनका लाभ प्राप्त करने के लिए श्रमिक का बोर्ड में पंजीकरण होना जरूरी है।
पंजीकरण के बाद योजनाओं तक पहुंच
कई निर्माण श्रमिक वर्षों तक अलग-अलग परियोजनाओं में काम करते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में अपना पंजीकरण नहीं करा पाते। इससे वे अपने लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह सकते हैं।
यूपी बीओसीडब्ल्यू पोर्टल पर पंजीकरण, नवीनीकरण, प्रमाणपत्र डाउनलोड और योजनाओं के लिए आवेदन की सुविधाएं उपलब्ध हैं। पंजीकरण के बाद श्रमिक की पहचान बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती है। पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर वह विभिन्न योजनाओं के लिए आवेदन कर सकता है।
बच्चों की पढ़ाई के लिए सहायता
आर्थिक संकट आने पर श्रमिक परिवारों में बच्चों की शिक्षा सबसे पहले प्रभावित हो सकती है। स्कूल की फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और दूसरे खर्चों के कारण कई बच्चों की पढ़ाई बीच में छूटने का खतरा रहता है।
बोर्ड के पोर्टल पर सूचीबद्ध संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य पात्र पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा में सहायता करना है। योजना से मिलने वाला सहयोग बच्चों की पढ़ाई जारी रखने और उन्हें भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त करने में मददगार हो सकता है।
महिला श्रमिकों और बच्चों के लिए मदद
महिला निर्माण श्रमिकों को कार्यस्थल के जोखिम के साथ गर्भावस्था, प्रसव और नवजात शिशु की देखभाल से जुड़ी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। इन परिस्थितियों में परिवार पर इलाज और देखभाल का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना के माध्यम से पात्र महिला श्रमिकों और उनके परिवारों को सहायता देने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य प्रसव और बच्चों की देखभाल के दौरान परिवार को आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है। आवेदन से पहले पात्रता, दस्तावेज और सहायता की मौजूदा शर्तों की जांच करना जरूरी है।
दुर्घटना और दिव्यांगता में सहारा
निर्माण स्थल पर ऊंचाई, मशीनों, भारी सामग्री, बिजली और लोहे के उपकरणों के बीच काम करने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। गंभीर चोट लगने से श्रमिक की कमाई बंद हो सकती है, जबकि मृत्यु की स्थिति में पूरा परिवार आर्थिक संकट में आ सकता है।
निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना का उद्देश्य पात्र मामलों में परिवार को आर्थिक सहायता देना है। इसी तरह गंभीर बीमारी के दौरान मिलने वाली सहायता दवा, जांच और अस्पताल के खर्च का बोझ कम करने में उपयोगी हो सकती है।
बेटी की शादी और कौशल को समर्थन
श्रमिक परिवारों के लिए बेटी की शादी एक बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी हो सकती है। बोर्ड की कन्या विवाह सहायता योजना के अंतर्गत पात्र पंजीकृत श्रमिकों को नियमानुसार मदद देने का प्रावधान है।
इसके अतिरिक्त कौशल प्रशिक्षण भी श्रमिकों के जीवन में बदलाव ला सकता है। कई लोग काम करते हुए राजमिस्त्री, पेंटर, प्लंबर अथवा इलेक्ट्रिशियन का हुनर सीख लेते हैं, लेकिन उनके पास औपचारिक प्रमाणपत्र नहीं होता। रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग प्रशिक्षण के माध्यम से पहले से सीखे कौशल का मूल्यांकन और प्रमाणन किया जा सकता है। इससे श्रमिक को बेहतर रोजगार तथा ज्यादा मजदूरी पाने का अवसर मिल सकता है।
निर्माण श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा का अर्थ केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान को सुरक्षित रखना भी है। जरूरी है कि पात्र श्रमिक पंजीकरण कराएं, समय पर उसका नवीनीकरण करें और किसी योजना में आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल पर नवीनतम नियमों की जांच करें।
Next Story