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महिला के इशारे पर चोरी होते थे ई-रिक्शा, गिरोह का पर्दाफाश

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पुलिस ने ई-रिक्शा और बैटरी चोरी की लगातार हो रही घटनाओं का बड़ा खुलासा किया है। शहर कोतवाली पुलिस, विशेष अपराध नियंत्रण टीम, चोरी अनावरण टीम और सर्विलांस सेल की संयुक्त कार्रवाई में एक अंतरजनपदीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 20 लाख रुपये कीमत की चोरी की संपत्ति बरामद की है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के पास से आठ चोरी की ई-रिक्शाएं, 36 बैटरियां और चोरी की वारदातों में इस्तेमाल की जाने वाली एक मास्टर-की बरामद हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने शहर कोतवाली और सिधारी थाना क्षेत्र में हुई कई ई-रिक्शा चोरी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और चोरी के नेटवर्क की जांच कर रही है।
लगातार चोरी की घटनाओं के बाद बनाई गई थी टीम
पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि शहर कोतवाली और सिधारी थाना क्षेत्र में पिछले कुछ समय से ई-रिक्शा चोरी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। चोरी की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की कई टीमों का गठन किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थलों से मिले सुराग, तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई। मंगलवार तड़के करीब एक बजे पुलिस टीम ने मोहटी घाट क्षेत्र में छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मो. मिजान, अखिलेश यादव उर्फ समीर यादव, विनोद जायसवाल, योगेश्वर जायसवाल, बृजेश कुमार गुप्ता और तबस्सुम के रूप में हुई है।
महिला आरोपी करती थी चोरी के लिए रेकी
पुलिस जांच में गिरोह में शामिल महिला सदस्य तबस्सुम की अहम भूमिका सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, वह शहर के अलग-अलग इलाकों में घूमकर ऐसे ई-रिक्शाओं की पहचान करती थी, जो बिना निगरानी के खड़े रहते थे। रेकी करने के बाद वह गिरोह के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी देती थी। इसके बाद गिरोह के सदस्य मौके पर पहुंचकर मास्टर-की की मदद से ई-रिक्शा चोरी कर लेते थे और उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचा देते थे। पुलिस का कहना है कि गिरोह ने चोरी को अंजाम देने के लिए एक निश्चित तरीका बना रखा था। हर सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी, जिससे चोरी की घटनाओं को आसानी से अंजाम दिया जा सके।
ई-रिक्शा से बैटरियां निकालकर बेचते थे आरोपी
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि चोरी किए गए ई-रिक्शाओं को सुनसान स्थानों पर ले जाया जाता था। वहां से उनकी बैटरियां और अन्य महंगे उपकरण निकाल लिए जाते थे। इसके बाद ई-रिक्शा को कबाड़ या अन्य माध्यमों से बेच दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, चोरी की गई बैटरियों और वाहनों को बेचकर मिलने वाली रकम को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। इसी तरीके से यह गिरोह काफी समय से चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था।
आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज हैं कई मुकदमे
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी अखिलेश यादव उर्फ समीर यादव के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें चोरी, शस्त्र अधिनियम और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों और चोरी की संपत्ति खरीदने वालों की तलाश भी की जा रही है। संभावना है कि पूछताछ के दौरान चोरी की अन्य घटनाओं का भी खुलासा हो सकता है।
पुलिस टीम को मिलेगा पुरस्कार
ई-रिक्शा चोरी गिरोह का खुलासा करने वाली पुलिस टीम के बेहतर कार्य की सराहना की गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने क्षेत्राधिकारी नगर शुभम तोदी को प्रशस्ति-पत्र देने की घोषणा की है।
इसके अलावा संयुक्त पुलिस टीम को उत्कृष्ट कार्रवाई के लिए 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि जिले में वाहन चोरी और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।





