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डबल लाइन तैयार, NI का इंतजार; गोरखपुर-उनौला रेल संचालन में देरी

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: गोरखपुर कैंट से उनौला तक रेलवे की डबल लाइन तैयार हो चुकी है, लेकिन नॉन-इंटरलॉकिंग (एनआई) कार्य में देरी के कारण इस नई रेल लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है। रेलवे प्रशासन की ओर से कई बार एनआई की तारीख तय की गई, लेकिन अब तक प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। इससे यात्रियों को नई सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
गोरखपुर-वाल्मीकिनगर रेलमार्ग के दोहरीकरण परियोजना के तहत कैंट-उनौला रेलखंड का काम पूरा हो चुका है। तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस लाइन पर ट्रेनों की रफ्तार और संचालन क्षमता बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन नॉन-इंटरलॉकिंग का काम लंबित होने से तैयार लाइन उपयोग में नहीं आ पा रही है।
पहले तय हुआ था 16 से 21 जुलाई तक एनआई का कार्यक्रम
रेलवे प्रशासन ने पहले 16 जुलाई से 21 जुलाई तक प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य कराने की योजना बनाई थी। इसके लिए तैयारी भी शुरू की गई थी, लेकिन निर्धारित तिथि पर ही इस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।
इसके बाद 25 जुलाई से एनआई कराने का नया प्रस्ताव तैयार किया गया, लेकिन यह प्रस्ताव भी आगे नहीं बढ़ सका। अब तक फाइलों में ही प्रक्रिया अटकी हुई है।
रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है कि श्रावणी मेले के दौरान स्पेशल ट्रेनों के संचालन को देखते हुए एनआई कार्य को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अब सावन के बाद ही नॉन-इंटरलॉकिंग का काम पूरा हो पाएगा।
डबल लाइन बनने के बाद भी नहीं बढ़ सका संचालन
कैंट-उनौला रेलखंड पर डबल लाइन बिछाने का काम पूरा होने के बाद भी इसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है। नई लाइन शुरू होने से ट्रेनों के आवागमन में सुविधा होती और ट्रैफिक दबाव कम किया जा सकता था।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नॉन-इंटरलॉकिंग एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रक्रिया है। इसके माध्यम से नई रेल लाइन, सिग्नल सिस्टम और अन्य परिचालन व्यवस्थाओं को आपस में जोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नई लाइन पर नियमित ट्रेन संचालन संभव होता है।
गोरखपुर-वाल्मीकिनगर रेलमार्ग का हो रहा दोहरीकरण
गोरखपुर-वाल्मीकिनगर रेलमार्ग के दोहरीकरण का काम पांच चरणों में पूरा किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य रेल यातायात को अधिक सुगम बनाना और बढ़ते दबाव को कम करना है।
परियोजना के पहले चरण में गोरखपुर कैंट से पिपराइच तक करीब 16.09 किलोमीटर रेलखंड का निर्माण शामिल है। दूसरे चरण में पिपराइच से कप्तानगंज तक लगभग 19.72 किलोमीटर रेल लाइन का दोहरीकरण किया जा रहा है।
तीसरे चरण में कप्तानगंज से सिसवा बाजार तक करीब 26.16 किलोमीटर, चौथे चरण में सिसवा बाजार से पनियहवा तक लगभग 20.87 किलोमीटर और पांचवें चरण में पनियहवा से वाल्मीकिनगर तक करीब 13.10 किलोमीटर रेलखंड का दोहरीकरण प्रस्तावित है।
यात्रियों को मिलेगी बेहतर सुविधा
दोहरीकरण परियोजना पूरी होने के बाद इस रेल मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होने की उम्मीद है। एकल लाइन होने के कारण कई बार ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए रोकना पड़ता है, जिससे समय की बचत नहीं हो पाती।
डबल लाइन शुरू होने से ट्रेनों की गति बढ़ाने, समय पालन सुधारने और भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी।
सावन स्पेशल ट्रेनों के कारण बढ़ी चुनौती
रेलवे जानकारों के मुताबिक, सावन महीने में श्रावणी मेले को देखते हुए बड़ी संख्या में स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाता है। ऐसे में रेलवे प्रशासन किसी बड़े तकनीकी ब्लॉक को लेकर सतर्कता बरत रहा है।
एक माह तक चलने वाली इन विशेष ट्रेनों के संचालन के दौरान एनआई कार्य कराने से परिचालन प्रभावित होने की संभावना रहती है। इसी वजह से काम को आगे बढ़ाने में देरी हो रही है।
अब सावन के बाद एनआई की संभावना
रेलवे से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अब संभावना है कि सावन के बाद नॉन-इंटरलॉकिंग का कार्य कराया जाएगा। इसके बाद कैंट-उनौला डबल लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो सकेगा।
फिलहाल रेलवे यात्रियों को नई सुविधा के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। डबल लाइन तैयार होने के बावजूद तकनीकी प्रक्रिया पूरी न होने से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उम्मीद है कि एनआई कार्य पूरा होने के बाद इस महत्वपूर्ण रेलखंड पर यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।





