उत्तर प्रदेश

दान चोरी केस: शौचालय में छिपाया जाता था पैसा

Saba Naaz
1 July 2026 2:31 PM IST
दान चोरी केस: शौचालय में छिपाया जाता था पैसा
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उत्तर प्रदेश: अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। कोर्ट की अनुमति के बाद पुलिस ने जेल में बंद आरोपियों से करीब दो घंटे तक पूछताछ की, जिसमें कई नए दावे और जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियों के अनुसार मामले की तह तक पहुंचने के लिए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। गिरफ्तार आठ आरोपियों में से एक अविनाश शुक्ला ने पूछताछ में कथित तौर पर स्वीकार किया कि मंदिर परिसर से करोड़ों रुपये की चोरी की गई। उसने यह भी दावा किया कि रकम को अस्थायी रूप से परिसर के शौचालयों में छिपाया जाता था ताकि उसे बाहर निकालना आसान हो सके। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अविनाश ने पूरी कथित प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी, जिसमें पैसे निकालने के तरीके और दान गिनती व्यवस्था में मौजूद खामियों का जिक्र शामिल है।

पूछताछ के दौरान अविनाश शुक्ला ने मंदिर से जुड़े ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम भी लिया और दावा किया कि दान गिनती प्रक्रिया में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। हालांकि, इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, दान प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अनिल मिश्रा और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पिछले सप्ताह अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दान गिनती कक्ष की चाबियों को लेकर भी व्यवस्था में खामियां थीं। आरोप है कि एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मियों के नियंत्रण में थी। अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर बताया कि चोरी की घटनाएं कई लोगों की मिलीभगत से की जाती थीं। एक व्यक्ति नकदी निकालता था, जबकि अन्य लोग आसपास खड़े होकर गतिविधियों को छिपाने में मदद करते थे।

सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। आरोपियों को परिसर में लगे कैमरों की जानकारी पहले से होती थी और वे कथित तौर पर कैमरों से बचने के लिए सावधानी बरतते थे। जांच में यह भी दावा सामने आया है कि दान की रकम पहले शौचालय जैसी जगहों में छिपाई जाती थी और बाद में उसे बाहर निकाला जाता था। निगरानी प्रणाली को लेकर यह भी कहा गया है कि कंट्रोल रूम से कैमरों की निगरानी तो होती थी, लेकिन आरोपियों की गतिविधियों पर सख्त नजर नहीं रखी जाती थी। अविनाश शुक्ला ने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों के साथ नजदीकी संबंध होने के कारण उन पर संदेह कम किया जाता था, जिससे कथित गड़बड़ी लंबे समय तक चलती रही।

मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ट्रस्ट द्वारा 5 जून को अविनाश शुक्ला के घर से 58 लाख रुपये बरामद किए गए थे, जो एफआईआर दर्ज होने से पहले की कार्रवाई थी। इसके अलावा, शेष राशि 5 से 8 जून के बीच बैंक ट्रांसफर के जरिए लौटाए जाने की बात भी सामने आई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित चोरी लंबे समय तक कैसे बिना पकड़े चलती रही और क्या इसमें और लोग भी शामिल थे। पुलिस और एसआईटी सभी वित्तीय लेनदेन, निगरानी व्यवस्था और आंतरिक प्रक्रियाओं की गहराई से जांच कर रही है।

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