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प्रयागराज: यमुनापार क्षेत्र में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां तीन दिन में सात लोगों को काटने वाले एक आवारा कुत्ते को ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद ग्रामीणों ने मृत कुत्ते के शव को गांव के बाहर तालाब किनारे एक पेड़ से रस्सी के सहारे उल्टा लटका दिया। घटना सामने आने के बाद इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। मामले में पशु क्रूरता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
यह घटना खीरी थाना क्षेत्र के पाठकपुर गांव की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, गांव में पिछले कुछ दिनों से एक आवारा कुत्ते का आतंक बना हुआ था। ग्रामीणों का दावा है कि इस कुत्ते ने तीन दिनों के अंदर गांव के सात लोगों को काटकर घायल कर दिया था। कुत्ते के हमले से लोगों में डर का माहौल बन गया था। ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें घरों से बाहर निकलने से भी रोक दिया था।
बताया जा रहा है कि 20 जुलाई को कुत्ते के डर के कारण कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल तक नहीं भेजा। पूरे दिन गांव के लोग कुत्ते की तलाश करते रहे। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक कुत्ते को पकड़ा नहीं जाता, तब तक गांव के लोगों की परेशानी कम नहीं होगी। कई लोग अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे।
सोमवार रात करीब नौ बजे कुछ ग्रामीणों को गांव के बाहर तालाब के पास वही कुत्ता दिखाई दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे चारों ओर से घेर लिया। आरोप है कि पहले कुत्ते पर ईंट-पत्थर बरसाए गए और फिर लाठी-डंडों से उसकी जमकर पिटाई की गई, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने उसके शव को रस्सी के सहारे पेड़ से उल्टा लटका दिया।
मंगलवार सुबह जब गांव के कुछ लोग तालाब की तरफ गए तो उन्होंने पेड़ से लटकते कुत्ते के शव को देखा। यह दृश्य देखकर लोग हैरान रह गए। घटना की जानकारी धीरे-धीरे पूरे गांव में फैल गई। कुछ लोगों ने इसे ग्रामीणों के डर और गुस्से का नतीजा बताया, जबकि पशु प्रेमियों ने इस तरह की कार्रवाई को गलत बताया है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुत्ते के हमले के बाद पूरे गांव में भय का माहौल था। उनका आरोप है कि कुत्ते ने बच्चों, महिलाओं और अन्य ग्रामीणों को घायल किया था, जिसके बाद लोगों में आक्रोश बढ़ गया था। ग्रामीणों ने दावा किया कि उन्होंने कई बार कुत्ते को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह भाग जाता था।
हालांकि, पशु विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जानवर के आक्रामक व्यवहार की स्थिति में प्रशासन और पशु विभाग को सूचना देनी चाहिए। कानून के अनुसार भी पशुओं के साथ क्रूरता करना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकता है।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। घटना ने एक बार फिर इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की परेशानी अपनी जगह है, लेकिन किसी जानवर को इस तरह मारना और उसके शव को सार्वजनिक रूप से लटकाना भी चर्चा का विषय बन गया है।





