उत्तर प्रदेश

यूपी के चार बड़े जिलों के डीएम दिसंबर में होंगे प्रोन्नत, 2011 बैच के अफसरों को मिलेगा कमिश्नर रैंक

Kavita2
1 Oct 2026 1:21 PM IST
यूपी के चार बड़े जिलों के डीएम दिसंबर में होंगे प्रोन्नत, 2011 बैच के अफसरों को मिलेगा कमिश्नर रैंक
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चार महत्वपूर्ण जिलों में तैनात 2011 बैच के आईएएस अधिकारियों को दिसंबर 2026 में प्रोन्नति मिलने की तैयारी है। इनमें लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर और आजमगढ़ के जिलाधिकारी शामिल हैं। प्रोन्नति के बाद इन अधिकारियों को कमिश्नर रैंक यानी सचिव स्तर की जिम्मेदारी मिल सकेगी। हालांकि प्रमोशन के बाद उनकी तत्काल पोस्टिंग बदलेगी या वे कुछ समय तक जिलाधिकारी के पद पर ही बने रहेंगे, इस पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार करेगी।

वर्तमान में लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी, प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा और आजमगढ़ के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। संबंधित जिलों की आधिकारिक वेबसाइटों पर भी इन अधिकारियों की मौजूदा तैनाती और बैच का विवरण दर्ज है।

आईएएस अधिकारियों को निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने के बाद विभिन्न वेतनमान और प्रशासनिक स्तरों पर पदोन्नति दी जाती है। 2011 बैच के अधिकारियों की सेवा अवधि को देखते हुए दिसंबर में उनके प्रमोशन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। इस प्रोन्नति के बाद वे कमिश्नर, सचिव या इसके समकक्ष पदों पर तैनाती के पात्र हो जाएंगे।

लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। आधिकारिक जिला रिकॉर्ड में उनका वर्तमान पद जिलाधिकारी लखनऊ दर्ज है। राजधानी में जिलाधिकारी का पद प्रशासनिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां राज्य सरकार के प्रमुख विभागों, बड़े कार्यक्रमों और कानून-व्यवस्था से जुड़े अनेक मामलों में जिला प्रशासन की सीधी भूमिका रहती है।

प्रयागराज में मनीष कुमार वर्मा जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह भी 2011 बैच के अधिकारी हैं। प्रयागराज की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उनकी आईएएस नियुक्ति 29 अगस्त 2011 को हुई थी और वर्तमान में वह जिलाधिकारी प्रयागराज के पद पर तैनात हैं।

गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा भी 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। गोरखपुर जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर उनका वर्तमान पद जिलाधिकारी और आवंटन वर्ष 2011 दर्ज है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र होने के कारण गोरखपुर प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण जिला माना जाता है।

आजमगढ़ के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार का भी आवंटन वर्ष 2011 है। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वह वर्तमान में आजमगढ़ के जिलाधिकारी हैं। इन चारों अधिकारियों का एक ही बैच से होना और बड़े जिलों की कमान संभालना प्रमोशन प्रक्रिया को खास बनाता है।

दिसंबर में प्रोन्नति मिलने के बाद सबसे अहम सवाल उनकी पोस्टिंग को लेकर होगा। सामान्य तौर पर कमिश्नर रैंक में आने के बाद अधिकारियों को मंडलायुक्त, शासन में सचिव या समकक्ष जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। लेकिन राज्य सरकार प्रशासनिक जरूरत के अनुसार किसी अधिकारी को कुछ समय तक वर्तमान पद पर भी बनाए रख सकती है।

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में अगले कुछ महीनों में जिलों और मंडलों की प्रशासनिक तैनाती महत्वपूर्ण रहेगी। चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने के बाद जिलाधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। हालांकि कौन अधिकारी किस जिले में चुनाव के समय तैनात रहेगा, यह अभी से तय मानना उचित नहीं होगा क्योंकि चुनाव से पहले प्रशासनिक तबादले और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश भी प्रभावी हो सकते हैं।

राज्य सरकार समय-समय पर प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार आईएएस अधिकारियों के तबादले करती रहती है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर आईएएस अधिकारियों का फेरबदल भी किया गया था, जिसमें कई जिलों के जिलाधिकारी बदले गए थे। इसलिए दिसंबर में प्रमोशन के बाद भी नई तैनातियों की संभावना बनी रहेगी।

प्रमोशन प्रक्रिया में अधिकारियों की सेवा अवधि, उपलब्ध पद, सेवा रिकॉर्ड और केंद्र तथा राज्य स्तर पर लागू नियमों को ध्यान में रखा जाता है। संबंधित बैच के अधिकारियों के लिए विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद औपचारिक आदेश जारी किए जाते हैं। इसके बाद सरकार तय करती है कि किस अधिकारी को शासन, मंडल या किसी अन्य महत्वपूर्ण संस्था में जिम्मेदारी दी जाए।

लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर और आजमगढ़ चारों ही जिले प्रशासनिक दृष्टि से बड़े और संवेदनशील माने जाते हैं। राजधानी लखनऊ में शासन और प्रशासन के बीच समन्वय की बड़ी भूमिका है, जबकि प्रयागराज बड़े धार्मिक आयोजनों और व्यापक शहरी-ग्रामीण आबादी के कारण महत्वपूर्ण है। गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख केंद्र है और आजमगढ़ भी पूर्वांचल की राजनीति तथा प्रशासन में विशेष स्थान रखता है।

इन जिलों के जिलाधिकारियों को कमिश्नर रैंक में प्रोन्नत किए जाने के बाद राज्य प्रशासन में नई तैनातियों का रास्ता खुल सकता है। यदि इनमें से किसी अधिकारी को मंडलायुक्त या शासन में सचिव पद पर भेजा जाता है तो संबंधित जिले में नए जिलाधिकारी की नियुक्ति करनी होगी।

दूसरी ओर सरकार के पास यह विकल्प भी रहेगा कि चुनावी या प्रशासनिक जरूरत को देखते हुए कुछ अधिकारियों को वर्तमान जिम्मेदारी पर ही बनाए रखा जाए। ऐसे मामलों में अधिकारी उच्च वेतनमान या रैंक प्राप्त करने के बाद भी कुछ अवधि तक उसी पद पर काम कर सकते हैं।

फिलहाल चारों अधिकारी अपने-अपने जिलों की कमान संभाल रहे हैं। लखनऊ में विशाख जी, प्रयागराज में मनीष कुमार वर्मा, गोरखपुर में दीपक मीणा और आजमगढ़ में रविंद्र कुमार की तैनाती आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। चारों 2011 बैच के अधिकारी हैं और दिसंबर में उनकी प्रोन्नति की प्रक्रिया पर प्रशासनिक हलकों की नजर रहेगी।

प्रमोशन के औपचारिक आदेश जारी होने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि इन अधिकारियों को नई जिम्मेदारी कहां दी जाती है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के चार बड़े जिलों में प्रशासनिक बदलाव की तस्वीर भी सामने आ सकती है।

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