उत्तर प्रदेश

सरकारी अस्पतालों में कम प्रसव पर DM की सख्ती

Kavita2
23 Jun 2026 5:00 PM IST
सरकारी अस्पतालों में कम प्रसव पर DM की सख्ती
x

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: जिले में सरकारी अस्पतालों की बजाय निजी नर्सिंग होम में अधिक प्रसव होने के आंकड़े सामने आने के बाद जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

यह मामला सोमवार को संगम सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति (शासी निकाय) की बैठक के दौरान सामने आया, जहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। बैठक में डीएम ने जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसव संबंधी सेवाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिला महिला चिकित्सालय सहित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव की संख्या में कमी आई है, जबकि बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में ले जाया जा रहा है। इस स्थिति पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और इसे व्यवस्था में कमी का संकेत बताया।

डीएम मनीष कुमार वर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकारी अस्पतालों की बजाय निजी संस्थानों में प्रसव के लिए महिलाओं को ले जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं की पहचान की जाए और उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर संबंधित आशाओं की सेवा समाप्त की जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जो आशा कार्यकर्ता निष्क्रिय पाई जाएं या जिनकी भूमिका संदिग्ध हो, उन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। डीएम ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को बेहतर और सुरक्षित प्रसव सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि लाभार्थी निजी संस्थानों की ओर जा रहे हैं तो यह गंभीर जांच का विषय है।

बैठक के दौरान जिला महिला चिकित्सालय में पिछले वर्ष की तुलना में कम प्रसव दर्ज होने पर भी डीएम ने नाराजगी जताई। उन्होंने प्रमुख चिकित्सा अधीक्षिका को निर्देश दिया कि वे इस गिरावट के कारणों की विस्तृत समीक्षा करें और यह पता लगाएं कि आखिर सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा क्यों कम हो रहा है।

डीएम ने अस्पताल स्टाफ को यह भी निर्देश दिया कि गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों के साथ शिष्ट और संवेदनशील व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में व्यवहारिक सुधार लाना बेहद जरूरी है, ताकि लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा करें और उन्हें प्राथमिकता दें।

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रही योजनाओं का सही लाभ तभी मिल सकता है जब जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रसव संबंधी आंकड़ों की नियमित मॉनिटरिंग करें और यह सुनिश्चित करें कि गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित और समय पर सरकारी सुविधाएं मिलें। इसके साथ ही निजी अस्पतालों की भूमिका की भी समीक्षा करने के संकेत दिए गए हैं।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं सीधे निजी अस्पतालों की ओर चली जाती हैं। इस पर डीएम ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और उन्हें अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी होगी।

जिलाधिकारी के इस सख्त रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है और संबंधित अधिकारियों को जल्द सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी सख्त कार्रवाई हो सकती है।

Next Story