उत्तर प्रदेश

दिवाली की रौनक: लोग परिवार सहित पूजा-अर्चना और दीपोत्सव में शामिल हुए

SHIDDHANT
20 Oct 2025 7:54 PM IST
दिवाली की रौनक: लोग परिवार सहित पूजा-अर्चना और दीपोत्सव में शामिल हुए
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Lucknow लखनऊ। दिवाली के शुभ अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पूरे शहर में खुशियों और रोशनी का माहौल छा गया। घर-घर में दीप जलाए गए, मंदिरों में पूजा-अर्चना की गई और परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर त्योहार का आनंद ले रहे थे। शहर के प्रमुख बाजार और मोहल्ले जैसे गोमती नगर, अमीनाबाद, हज़रतगंज और गोपालपुर में दीयों और रंगीन लाइटों से सजावट की गई। लोग घरों को फूलों और रंगोली से सजाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर रहे थे। बच्चों और युवाओं ने हल्की फुलझड़ियों और पटाखों के साथ दिवाली का जश्न मनाया।
स्थानीय मंदिरों में विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया गया। पुजारियों ने भक्तों को दीपावली के धार्मिक महत्व और लक्ष्मी पूजन की विधियों के बारे में जानकारी दी। कई मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगीं, जिन्होंने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर पूजा में भाग लिया। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने शहर में सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए। भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ाई गई। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की कि वे पटाखों का प्रयोग सावधानी से करें और सार्वजनिक जगहों पर स्वच्छता बनाए रखें।
शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रम और दीपोत्सव आयोजन भी हुए। बच्चों के लिए रंगोली प्रतियोगिता और दीयों की सजावट की कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिससे युवा और बच्चे उत्साहपूर्वक शामिल हुए। स्थानीय दुकानों ने दिवाली के अवसर पर सजावटी सामान, मिठाइयां और दीपों की प्रदर्शनी लगाई, जिससे परिवार और नागरिक खरीदारी का आनंद ले सकें। लखनऊ के नागरिकों ने कहा कि इस वर्ष दिवाली खास रही क्योंकि लोग परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर त्योहार की खुशियों को साझा कर रहे थे। दीपों की रोशनी, रंग-बिरंगी सजावट और सामूहिक पूजा ने शहर में उत्सव का माहौल बनाया।
धार्मिक और सांस्कृतिक विश्लेषकों का कहना है कि दिवाली केवल रोशनी और मिठाइयों का त्योहार नहीं, बल्कि यह परिवार, सामाजिक मेल-जोल और भाईचारे का भी प्रतीक है। इस अवसर पर शहरवासियों ने इस संदेश को अनुभव किया और सामाजिक सौहार्द का उदाहरण पेश किया। लखनऊ की यह दिवाली सजावट और पूजा-अर्चना न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन थी, बल्कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक बनी। घरों और मंदिरों में जलते दीपों की रौशनी ने पूरे शहर को उजागर किया और नागरिकों के चेहरों पर खुशी और उल्लास लाया।
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