उत्तर प्रदेश

दिवाकराचार्य महाराज ने UGC के नए प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक का स्वागत किया

SHIDDHANT
29 Jan 2026 10:02 PM IST
दिवाकराचार्य महाराज ने UGC के नए प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक का स्वागत किया
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Ayodhya अयोध्या: प्रख्यात धर्मगुरु दिवाकराचार्य महाराज ने यूजीसी (UGC) के नए प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाने का स्वागत किया है। महाराज ने कहा कि ये नए नियम समाज में असमानता को बढ़ा रहे थे और जहां हिंदुओं को संगठित करने की आवश्यकता है, वहां ये प्रावधान समाज में खाई और गहरी कर रहे थे। दिवाकराचार्य महाराज ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं है,
बल्कि
समाज में समानता, न्याय और समरसता को बढ़ावा देना भी होना चाहिए। हाल के UGC प्रावधान इस उद्देश्य के विपरीत थे। इन नियमों ने शिक्षा व्यवस्था में भेदभाव की संभावना को जन्म दिया था, जिससे समाज में असमानता और बढ़ सकती थी।"
उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय रहते रोक लगाने का कदम शिक्षाविदों और समाज दोनों के लिए राहत की खबर है। "सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी तरह के नियम को लागू करने से पहले उसकी सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता पर विचार किया जाना चाहिए। यह समाज में संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय है। महाराज ने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नियम बनाते समय समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विशेष रूप से उच्च शिक्षा के संस्थानों में ऐसे नियम लागू किए जाने चाहिए जो सभी समुदायों के छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करें।
दिवाकराचार्य ने उल्लेख किया कि शिक्षा न केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम है, बल्कि यह समाज को संगठित करने और सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का भी साधन है। उन्होंने कहा, "जहां हिंदू समाज को संगठित और सशक्त बनाने की आवश्यकता है, वहां नियम असमानता और विभाजन को बढ़ावा न दें। सुप्रीम कोर्ट ने इस दिशा में सही कदम उठाया है। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से अपील की कि वे शिक्षा नीति को लागू करते समय समानता, समरसता और सामाजिक न्याय को सर्वोपरि रखें।
दिवाकराचार्य ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक सफलता नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में सहिष्णुता, एकता और नैतिक मूल्यों को भी बढ़ावा देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC के विवादास्पद नियमों पर रोक लगाने से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश गया है। इस निर्णय से उच्च शिक्षा में समान अवसर, धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने की संभावना बढ़ गई है। दिवाकराचार्य महाराज ने कहा कि समाज और शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। उन्होंने शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और छात्रों से अपील की कि वे इस निर्णय को सकारात्मक दृष्टिकोण से लें और शिक्षा को समाज के उत्थान का साधन बनाएं।
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