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उत्तर प्रदेश
नए कनेक्शन में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विवाद तेज अब आयोग करेगा फैसला
Ratna Netam
24 Aug 2026 9:54 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन के साथ स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विरोध तेज हो गया है। स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर उपभोक्ता संगठनों ने सवाल उठाते हुए इसका मामला विद्युत नियामक आयोग तक पहुंचा दिया है। संगठनों का कहना है कि नए कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता को लेकर स्पष्ट नियम और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा जरूरी है।
स्मार्ट मीटर को बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन के लिए लागू किया जा रहा है, लेकिन इसके इस्तेमाल को लेकर कई जगह उपभोक्ताओं की चिंताएं भी सामने आई हैं। कुछ संगठनों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उपभोक्ताओं को पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही है और उनकी सहमति को लेकर भी सवाल हैं।
नए कनेक्शन में स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध
बिजली विभाग की ओर से लगातार स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। नए बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाने की व्यवस्था की जा रही है।
विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के बीच कई तरह की आशंकाएं हैं। उनका कहना है कि मीटर की कार्यप्रणाली, बिलिंग प्रक्रिया और रिचार्ज व्यवस्था को लेकर लोगों को पूरी जानकारी मिलनी चाहिए।
नियामक आयोग में उठाया गया मुद्दा
स्मार्ट मीटर के विरोध का मामला अब उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग तक पहुंच गया है। उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने आयोग के सामने अपनी आपत्तियां और सुझाव रखने की तैयारी की है।
उनका कहना है कि बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए कोई भी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जाए।
स्मार्ट मीटर के फायदे क्या हैं?
बिजली विभाग और सरकार स्मार्ट मीटर को आधुनिक बिजली व्यवस्था का अहम हिस्सा बता रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली खपत की सही जानकारी मिलती है और बिलिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होती है।
इसके अलावा स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली चोरी रोकने, रियल टाइम खपत देखने और बिजली वितरण कंपनियों के काम को बेहतर बनाने में मदद मिलने का दावा किया जाता है।
उपभोक्ताओं की क्या हैं चिंताएं?
विरोध करने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर को लेकर सबसे बड़ी चिंता बिल बढ़ने और रिचार्ज आधारित व्यवस्था को लेकर है।
कुछ लोगों का कहना है कि अगर किसी तकनीकी समस्या के कारण मीटर में गड़बड़ी होती है तो आम उपभोक्ता के लिए शिकायत का समाधान कराना आसान होना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।
बिजली कंपनियों का पक्ष
बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह सुरक्षित और आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं। कंपनियों के अनुसार, इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत समझने में मदद मिलती है और गलत बिलिंग की समस्या कम हो सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार की जा रही है और उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान भी किया जाएगा।
देशभर में चल रहा स्मार्ट मीटर अभियान
केंद्र सरकार और राज्य सरकारें बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट मीटर को बढ़ावा दे रही हैं। देश के कई राज्यों में लाखों स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
सरकार का उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, लाइन लॉस कम करना और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देना है।
तकनीक और उपभोक्ता अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटर जैसी तकनीक बिजली क्षेत्र में सुधार ला सकती है, लेकिन इसके साथ उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा भी जरूरी है।
किसी भी नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए जरूरी है कि उपभोक्ताओं को इसकी पूरी जानकारी दी जाए और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र बनाया जाए।
आगे आयोग के फैसले पर नजर
अब सभी की नजर विद्युत नियामक आयोग की सुनवाई और फैसले पर है। आयोग यह तय करेगा कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में उपभोक्ताओं के हितों को किस तरह शामिल किया जाए।
अगर आयोग की ओर से कोई दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं तो उसका असर प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन लेने वाले लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
फिलहाल स्मार्ट मीटर को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ बिजली विभाग इसे भविष्य की जरूरत बता रहा है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता संगठन पारदर्शिता और अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले समय में नियामक आयोग का फैसला इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।
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