उत्तर प्रदेश

बुनकरों की समस्याओं पर हुई चर्चा

Kavita2
22 Sept 2026 1:07 PM IST
बुनकरों की समस्याओं पर हुई चर्चा
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वाराणसी: हिन्दू बुनकर कल्याण समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग के वाराणसी परिक्षेत्र की उपायुक्त कुसुम सिंह से मुलाकात की। बैठक में बनारस के हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने बुनकरों, कारीगरों और छोटे वस्त्र उद्यमियों के हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग करते हुए समस्याओं के समाधान पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक के दौरान रमना टेक्सटाइल पार्क की प्रगति और वहां बुनकरों एवं छोटे उद्यमियों के लिए उपलब्ध संभावनाओं पर भी बातचीत हुई। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि टेक्सटाइल पार्क से मिलने वाली सुविधाओं और अवसरों का लाभ अधिक से अधिक स्थानीय बुनकरों और कारीगरों तक पहुंचना चाहिए।

हथकरघा उद्योग की समस्याओं को रखा सामने

प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त कुसुम सिंह के सामने वाराणसी के हथकरघा और वस्त्र उद्योग से जुड़े बुनकरों की समस्याओं को रखा। पदाधिकारियों ने कहा कि बनारस का बुनकरी उद्योग अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जाना जाता है और बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हुए हैं।

ऐसे में इस क्षेत्र से जुड़े कारीगरों की समस्याओं का समय पर समाधान जरूरी है। बुनकरों को सरकारी योजनाओं, आधुनिक सुविधाओं और बाजार से जुड़े अवसरों का लाभ आसानी से उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय स्तर पर बुनकरों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने की भी आवश्यकता बताई।

कारीगरों के हित में कदम उठाने की मांग

बैठक में बुनकरों के साथ-साथ पारंपरिक कारीगरों के हितों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि छोटे स्तर पर काम करने वाले कारीगरों और वस्त्र उद्यमियों के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां रहती हैं।

ऐसे लोगों को विभागीय योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ समय पर मिलना चाहिए। इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम और विभागीय स्तर पर सहायता की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत बताई गई।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बुनकरी से जुड़े परिवारों की आजीविका मजबूत करने के लिए उत्पादन के साथ बाजार तक उनकी पहुंच बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है।

रमना टेक्सटाइल पार्क की प्रगति पर चर्चा

बैठक में रमना टेक्सटाइल पार्क प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। प्रतिनिधिमंडल ने टेक्सटाइल पार्क की मौजूदा प्रगति के बारे में जानकारी ली और भविष्य में यहां स्थानीय बुनकरों एवं छोटे वस्त्र उद्यमियों के लिए उपलब्ध होने वाली संभावनाओं पर चर्चा की।

समिति ने कहा कि टेक्सटाइल पार्क का उद्देश्य तभी व्यापक रूप से सफल होगा जब स्थानीय स्तर पर काम कर रहे छोटे बुनकर और कारीगर भी इससे सीधे जुड़ सकें।

इसके लिए पार्क से जुड़ी सुविधाओं और अवसरों की जानकारी बुनकर समुदाय तक पहुंचाना जरूरी बताया गया।

स्थानीय बुनकरों तक पहुंचे पार्क का लाभ

प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि रमना टेक्सटाइल पार्क का लाभ केवल बड़े उद्यमों तक सीमित न रहे। स्थानीय स्तर पर छोटे करघों पर काम करने वाले बुनकरों, कारीगरों और छोटे वस्त्र उद्यमियों को भी इससे जोड़ा जाना चाहिए।

पदाधिकारियों का कहना था कि यदि स्थानीय बुनकरों को आधुनिक सुविधाएं, तकनीकी सहयोग और बाजार से जुड़ने का अवसर मिलता है तो इससे उनके कारोबार को मजबूती मिल सकती है।

टेक्सटाइल पार्क के माध्यम से उत्पादन से लेकर विपणन तक की व्यवस्था में स्थानीय बुनकरों की भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा की गई।

बनारसी बुनकरी की पहचान बनाए रखने पर जोर

वाराणसी का हथकरघा उद्योग अपनी पारंपरिक बुनकरी और बनारसी वस्त्रों के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। इस उद्योग से बड़ी संख्या में बुनकर और कारीगर जुड़े हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बदलते बाजार और आधुनिक उत्पादन तकनीकों के दौर में पारंपरिक बुनकरी को संरक्षित करते हुए उसे नई सुविधाओं से जोड़ना जरूरी है।

कारीगरों के कौशल को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने के साथ उनकी पारंपरिक कला और पहचान को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण बताया गया।

सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने की जरूरत

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग से जुड़े लोगों को उनके लिए संचालित योजनाओं की जानकारी आसानी से मिलनी चाहिए।

कई बार जानकारी के अभाव में पात्र बुनकर योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए विभाग और बुनकर संगठनों के बीच बेहतर संवाद से योजनाओं की जानकारी जमीनी स्तर तक पहुंचाई जा सकती है।

समिति ने बुनकरों के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित सहायता उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई।

छोटे उद्यमियों के लिए अवसर बढ़ाने पर मंथन

रमना टेक्सटाइल पार्क को छोटे वस्त्र उद्यमियों के लिए नए अवसर के रूप में विकसित करने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि छोटे उद्यमियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने से वे अपने उत्पादन का विस्तार कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

नई तकनीक और बेहतर बाजार संपर्क मिलने पर छोटे उद्यमी प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं। इसके लिए विभागीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।

बुनकरों और विभाग के बीच संवाद जरूरी

बैठक के दौरान बुनकर संगठनों और हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग के बीच नियमित संवाद पर जोर दिया गया। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने के लिए विभाग और बुनकरों के बीच सीधा संपर्क जरूरी है।

इससे समस्याओं की पहचान के साथ उनके समाधान के लिए समय पर कदम उठाए जा सकते हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि विभाग बुनकरों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देगा और संबंधित योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने की दिशा में आवश्यक पहल करेगा।

बुनकरी उद्योग को मजबूत करने पर जोर

पूरी बैठक का मुख्य फोकस वाराणसी के पारंपरिक हथकरघा और वस्त्र उद्योग को मजबूत करने पर रहा। बुनकरों की समस्याओं के समाधान के साथ नई सुविधाओं और परियोजनाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई।

हिन्दू बुनकर कल्याण समिति के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने के साथ उनके पारंपरिक कौशल को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

वहीं रमना टेक्सटाइल पार्क को लेकर समिति ने स्पष्ट किया कि परियोजना से पैदा होने वाले अवसरों में स्थानीय बुनकरों, कारीगरों और छोटे वस्त्र उद्यमियों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे बनारस के हथकरघा उद्योग को नई मजबूती मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

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