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उत्तर प्रदेश
दीपोत्सव के मंच से राम मंदिर पर चर्चा, उपराष्ट्रपति के बयान ने खींचा ध्यान
Ratna Netam
7 Nov 2026 7:30 PM IST

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अयोध्या। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में दसवें दीपोत्सव के अवसर पर पहुंचे उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को भारतीय संस्कृति, आस्था और आत्मसम्मान का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह हिंदू समाज के आत्मसम्मान और भारत की सभ्यतागत विरासत से जुड़ा हुआ है। दीपोत्सव के भव्य आयोजन के बीच उपराष्ट्रपति का यह संदेश चर्चा का विषय रहा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और बड़ी संख्या में संत-महात्मा भी मौजूद रहे।शनिवार, 7 नवंबर 2026 को अयोध्या में आयोजित दसवें दीपोत्सव में उपराष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही उन्होंने रामकथा पार्क में आयोजित भगवान श्रीराम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह में भी हिस्सा लिया। इस अवसर पर संतों को सम्मानित किया गया और रामनगरी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करने वाले कई कार्यक्रम आयोजित हुए।
राम मंदिर को बताया भारत की सभ्यतागत यात्रा का निर्णायक पड़ाव
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने राम मंदिर के महत्व पर पहले भी अपने विचार व्यक्त किए हैं। जनवरी 2026 में राम जन्मभूमि आंदोलन पर लिखी पुस्तक के विमोचन के दौरान उन्होंने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारत की सभ्यतागत यात्रा का निर्णायक क्षण है। उन्होंने कहा था कि मंदिर ने दुनियाभर में भारतीयों के आत्मसम्मान को पुनर्स्थापित किया है।उन्होंने भगवान श्रीराम को राष्ट्र और भारत के धर्म की आत्मा बताते हुए कहा था कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है। उन्होंने महात्मा गांधी के रामराज्य के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि रामराज्य सभी के लिए न्याय, समानता और गरिमा का प्रतीक है।
रामलला के दरबार में पहुंचे उपराष्ट्रपति
अयोध्या प्रवास के दौरान उपराष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन किया। मंदिर परिसर में दीपोत्सव को लेकर विशेष सजावट की गई थी। मंदिर के विभिन्न हिस्सों को रोशनी से सजाया गया और श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक माहौल तैयार किया गया।उपराष्ट्रपति के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। तीनों ने भगवान श्रीराम और माता जानकी की पूजा-अर्चना की तथा आरती उतारी। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद संतों और श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।उपराष्ट्रपति ने रामकथा पार्क में आयोजित प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह में भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम के जरिए भगवान श्रीराम के वनवास से लौटने और अयोध्या में उनके राज्याभिषेक के प्रसंग को प्रस्तुत किया गया।
2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले का किया था उल्लेख
राम जन्मभूमि आंदोलन पर आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि इस फैसले ने लाखों भारतीयों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं को पूरा किया।उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को भारतीय लोकतंत्र की शक्ति का उदाहरण बताया था। उनके अनुसार, राम मंदिर का निर्माण आस्था, इतिहास, कानून और लोकतंत्र के समन्वय का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा था कि भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर बने मंदिर का महत्व विशेष है और इसकी तुलना किसी अन्य मंदिर से नहीं की जा सकती।उपराष्ट्रपति ने राम मंदिर निर्माण में आम लोगों की भागीदारी और आर्थिक सहयोग का भी उल्लेख किया था। उन्होंने बताया था कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण के लिए बड़े स्तर पर आर्थिक योगदान दिया।
30 लाख दीपों से जगमगाई रामनगरी
दसवें दीपोत्सव के अवसर पर अयोध्या के सरयू तट और राम की पैड़ी सहित 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीपों से रोशनी की गई। दीपों की सजावट और प्रज्ज्वलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया।इस आयोजन को भव्य बनाने के लिए लेजर शो, ड्रोन शो, रामायण आधारित झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। रामायण के प्रसंगों को दर्शाने के लिए विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। अंतरराष्ट्रीय रामलीला मंडलियों की भागीदारी ने भी समारोह को विशेष स्वरूप दिया।दीपोत्सव में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या आगमन का प्रतीकात्मक दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। पुष्पक विमान के प्रतीक के रूप में हेलीकॉप्टर से कलाकारों का आगमन कराया गया। इसके बाद रामकथा पार्क में राज्याभिषेक कार्यक्रम आयोजित हुआ।
संतों का किया सम्मान
उपराष्ट्रपति ने दीपोत्सव के अवसर पर संत-महात्माओं और धर्माचार्यों का सम्मान भी किया। कार्यक्रम में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संतों का अभिनंदन किया और अयोध्या के धार्मिक महत्व का उल्लेख किया।इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या का दीपोत्सव केवल दीप जलाने का आयोजन नहीं है, बल्कि यह भगवान श्रीराम के आदर्शों और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से भगवान श्रीराम के जीवन मूल्यों को अपनाने और समाज में सेवा, सद्भाव तथा समानता की भावना को मजबूत करने की अपील की।
अयोध्या के इतिहास और मंदिर आंदोलन पर विशेष प्रदर्शनी
दसवें दीपोत्सव के तहत रामकथा पार्क में अयोध्या के लगभग 500 वर्षों के इतिहास, राम जन्मभूमि आंदोलन और शहर में हुए बदलावों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।इसमें ऐतिहासिक घटनाओं, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण पड़ावों और मंदिर निर्माण की यात्रा को प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही अयोध्या में हुए बुनियादी ढांचे के विकास, सड़कों, पर्यटन सुविधाओं और सार्वजनिक व्यवस्थाओं की जानकारी भी प्रदर्शित की गई।इस प्रदर्शनी का उद्देश्य नई पीढ़ी और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को अयोध्या की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना था।
आस्था, संस्कृति और विरासत का संदेश
अयोध्या में दसवें दीपोत्सव के दौरान उपराष्ट्रपति की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष महत्व दिया। राम मंदिर में दर्शन, प्रतीकात्मक राज्याभिषेक, संतों का सम्मान और सरयू तट पर दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।उपराष्ट्रपति के पूर्व में व्यक्त विचारों के अनुसार, राम मंदिर भारतीयों की सभ्यतागत पहचान और आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है। वहीं दीपोत्सव के माध्यम से अयोध्या की धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया।लाखों दीपों की रोशनी के बीच आयोजित दसवें दीपोत्सव ने एक बार फिर अयोध्या को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
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