उत्तर प्रदेश

जातीय जनगणना के बाद UP विभाजन की चर्चा

Kavita2
21 Sept 2026 3:50 PM IST
जातीय जनगणना के बाद UP विभाजन की चर्चा
x

देवरिया। उत्तर प्रदेश के विभाजन को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख और राज्य मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने रविवार को दावा किया कि जाति आधारित जनगणना के बाद देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

राजभर ने यह बयान देवरिया में आयोजित ‘सामाजिक समरसता महा रैली’ को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना के आंकड़े आने के बाद सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए राज्य के पुनर्गठन पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि, उत्तर प्रदेश के विभाजन को लेकर अभी तक केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। राजभर ने अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई कथित बातचीत का भी जिक्र किया।

प्रधानमंत्री से बातचीत का किया उल्लेख

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों और 27 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित विषयों को रखा था।

उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने जाति आधारित जनगणना के बाद आंकड़ों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पर विचार करने की बात कही थी।

राजभर ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा था कि पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण और वर्गीकरण के मुद्दे पर आगे कैसे बढ़ा जा सकता है। इसके जवाब में प्रधानमंत्री की ओर से जाति जनगणना के बाद आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने की बात कही गई।

हालांकि, राजभर द्वारा बताई गई बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जातीय जनगणना को लेकर सियासत तेज

जातीय जनगणना का मुद्दा पिछले कुछ समय से देश की राजनीति में प्रमुख विषय बना हुआ है। कई राजनीतिक दल सामाजिक और आर्थिक नीतियों को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए जातीय आंकड़ों की मांग करते रहे हैं।

वहीं, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग स्तरों पर चर्चा होती रही है। जातीय जनगणना के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के विभाजन की पुरानी मांग

उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग नई नहीं है। राज्य के आकार और आबादी को देखते हुए समय-समय पर इसे छोटे राज्यों में बांटने की चर्चा होती रही है।

पूर्व में भी कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं ने प्रशासनिक सुविधा के लिए उत्तर प्रदेश के विभाजन का सुझाव दिया था। हालांकि, इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया।

राजभर ने अपने बयान में कहा कि आबादी और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए राज्य को छोटे हिस्सों में बांटने से व्यवस्था बेहतर हो सकती है।

27 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा

राजभर ने अपने संबोधन में पिछड़ा वर्ग आरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर सरकार को आगे बढ़कर काम करना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि जातीय आंकड़ों के आधार पर वर्गीकरण और नीतियां बनाने में आसानी होगी।

राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण बयान

उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और यहां की राजनीति में जातीय समीकरणों की अहम भूमिका रही है। ऐसे में जातीय जनगणना और राज्य के पुनर्गठन जैसे मुद्दे राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माने जाते हैं।

राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में सामाजिक समीकरणों और पिछड़ा वर्ग राजनीति को लेकर चर्चा जारी है।

आगे की स्थिति पर नजर

राज्य के चार हिस्सों में विभाजन को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने नहीं है। ओम प्रकाश राजभर का बयान उनके राजनीतिक रुख और मांग को दर्शाता है।

अब इस मुद्दे पर अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है। जातीय जनगणना, आरक्षण और राज्य पुनर्गठन जैसे विषय आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बने रह सकते हैं।

Next Story