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प्रतापगढ़। मानधाता ब्लाक क्षेत्र में हैंसी परजी और शिवरा गांव की सीमा पर बकुलाही नदी पर बना वर्षों पुराना पैदल पक्का पुल इन दिनों ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। लगातार बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ने से पुल पूरी तरह पानी में डूब गया है। इससे ग्रामीणों का बाजार, अस्पताल और स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। पानी में डूबे इस पुल से होकर शव यात्रा ले जाने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।
ग्रामीणों के अनुसार बकुलाही नदी पर बना यह पुल लंबे समय से जर्जर हालत में है। पुल मुख्य सड़क से करीब 10 फीट नीचे स्थित है। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही पुल पानी में समा जाता है। पानी भर जाने के बाद पुल दिखाई तक नहीं देता। इसके बावजूद आसपास के ग्रामीणों के सामने नदी पार करने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करने की मजबूरी बनी हुई है।
बारिश में गायब हो जाता है पुल
ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में यह पुल पैदल आवागमन का महत्वपूर्ण साधन है। हैंसी परजी और शिवरा गांव के लोगों के अलावा आसपास के कई गांवों के लोग भी इसका इस्तेमाल करते हैं। बाजार जाने, अस्पताल पहुंचने और बच्चों के स्कूल आने-जाने के लिए ग्रामीण इसी रास्ते से आवागमन करते हैं।
लेकिन बारिश शुरू होते ही स्थिति बदल जाती है। बकुलाही नदी का पानी बढ़ने पर पुल पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। मुख्य सड़क से काफी नीचे होने के कारण थोड़ी बारिश के बाद भी यहां पानी जमा हो जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक पानी भरने के बाद पुल की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। कई बार लोगों को यह तक पता नहीं चलता कि पानी के नीचे पुल कहां है।
ऐसी स्थिति में पुल पार करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है। नदी में पानी का बहाव तेज होने पर किसी भी समय दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद जरूरी काम के लिए ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।
पानी भरे पुल से शव यात्रा का वीडियो वायरल
इस बीच जलमग्न पुल से होकर शव यात्रा ले जाने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है। वीडियो में ग्रामीणों को पानी से भरे रास्ते से शव लेकर जाते हुए देखा जा रहा है। घटना ने जर्जर पुल की समस्या को एक बार फिर सामने ला दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए भी लोगों को इसी जोखिम भरे रास्ते का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के दिनों में शव को सुरक्षित तरीके से नदी के दूसरी ओर ले जाना बड़ी चुनौती बन जाता है। पानी में डूबे पुल से होकर शव यात्रा निकालने की स्थिति ने ग्रामीणों को झकझोर दिया है।
स्कूल और अस्पताल जाने में परेशानी
पुल के जलमग्न होने से सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों, बुजुर्गों और मरीजों को हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार आसपास के कई बच्चों को स्कूल जाने के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। पुल पर पानी भर जाने के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित रहते हैं।
इसी तरह किसी व्यक्ति के बीमार होने या अचानक चिकित्सा की जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे समय और दूरी दोनों बढ़ जाते हैं। आपात स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
लंबे समय से जर्जर है पुल
ग्रामीणों के मुताबिक बकुलाही नदी पर बना यह पुल वर्षों पुराना है और अब इसकी हालत काफी खराब हो चुकी है। पुल की ऊंचाई कम होने के कारण बारिश के दौरान यह बार-बार डूब जाता है। ग्रामीण लंबे समय से यहां नए और ऊंचे पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि मौजूदा पुल अब आवागमन के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि पुराने पुल को हटाकर ऐसा नया पुल बनाया जाए, जो नदी के बढ़े जलस्तर के बावजूद आवागमन के लिए सुरक्षित रहे।
जिलाधिकारी को सौंपा प्रार्थना पत्र
समस्या को लेकर गांव के लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपा। इसमें जर्जर पुल को ध्वस्त कराकर उसके स्थान पर नया पुल बनवाने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
प्रार्थना पत्र में कहा गया कि पुल की मौजूदा स्थिति ग्रामीणों के लिए खतरा बन चुकी है। बारिश के दिनों में पुल पूरी तरह डूब जाता है और लोगों को मजबूरी में पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इससे कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पुल का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और इसकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। साथ ही जब तक नए पुल का निर्माण नहीं होता, तब तक सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को बाजार, अस्पताल और स्कूल जाने में परेशानी न हो।
स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि बकुलाही नदी पर नया पुल बनना केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा मामला है। बारिश के दौरान पुल के पूरी तरह डूब जाने के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। खासकर बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों के लिए स्थिति अधिक जोखिमपूर्ण है।
इंटरनेट मीडिया पर शव यात्रा का वीडियो प्रसारित होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर देखेगा। लोगों का कहना है कि किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार के बजाय समय रहते पुल का निर्माण कराया जाना जरूरी है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है। अब लोगों की नजर प्रशासन की ओर है कि जर्जर और जलमग्न पुल की समस्या का स्थायी समाधान कब तक किया जाता है।





