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यूपी में THR का डिजिटल कायाकल्प, 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचेगा पोषण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘टेक होम राशन’ (THR) व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया गया है। अब बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पोषण सामग्री पहुंचाने की प्रक्रिया सिर्फ राशन वितरण तक सीमित नहीं रही है। इसे तकनीक से जोड़ते हुए उत्पादन इकाई से लेकर लाभार्थी तक पूरी सप्लाई चेन को डिजिटल निगरानी के दायरे में लाया गया है।
सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए प्रदेश के करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अनुपूरक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है। डिजिटल निगरानी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पोषण सामग्री तय मानकों के अनुरूप तैयार हो, सही मात्रा में भेजी जाए और निर्धारित लाभार्थियों तक समय पर पहुंचे।
उत्पादन से वितरण तक डिजिटल निगरानी
नई THR व्यवस्था में पोषण सामग्री की सप्लाई चेन को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। उत्पादन इकाइयों से सामग्री निकलने के बाद उसके परिवहन और वितरण तक की प्रक्रिया पर डिजिटल माध्यम से नजर रखी जा रही है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बीच की प्रक्रिया में होने वाली अनियमितताओं को कम करना और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उत्पादन इकाई से निकलने वाली पोषण सामग्री किस केंद्र तक पहुंची और वहां से लाभार्थियों तक उसका वितरण कैसे हुआ, इसकी जानकारी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से दर्ज की जा सकती है।
सरकार का मानना है कि इस तरह की निगरानी से पोषण कार्यक्रम की कार्यक्षमता में सुधार होगा और लाभार्थियों तक सामग्री पहुंचाने में पारदर्शिता बढ़ेगी।
बच्चों और माताओं पर विशेष फोकस
THR योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे लाभार्थियों को अनुपूरक पोषण उपलब्ध कराना है जिन्हें अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है। इसमें छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं शामिल हैं।
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए शुरुआती वर्षों में संतुलित पोषण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं को भी पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि लक्षित लाभार्थियों को नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण पोषण सामग्री उपलब्ध हो।
डिजिटल निगरानी व्यवस्था के जरिए इस पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।
1.56 करोड़ लाभार्थियों को मिल रहा लाभ
राज्य में वर्तमान में लगभग 1.56 करोड़ लाभार्थी THR व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों तक पोषण सामग्री पहुंचाने के लिए मजबूत सप्लाई चेन की आवश्यकता होती है।
सरकार का दावा है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत हुई है। इससे यह पता लगाने में भी मदद मिलती है कि पोषण सामग्री की आपूर्ति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हो रही है या नहीं।
इतने बड़े स्तर पर चल रहे पोषण कार्यक्रम में तकनीक का इस्तेमाल प्रशासन के लिए भी निगरानी को आसान बनाता है।
गुणवत्ता पर भी जोर
नई व्यवस्था में केवल सामग्री पहुंचाने पर ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। उत्पादन इकाइयों से लेकर वितरण केंद्रों तक पोषण सामग्री को तय मानकों के अनुरूप बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लाभार्थियों को मिलने वाला अनुपूरक पोषण निर्धारित गुणवत्ता और मात्रा के अनुसार हो। इसके लिए उत्पादन और आपूर्ति की प्रक्रिया में निगरानी को महत्वपूर्ण बनाया गया है।
जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होती है। खासकर जब योजना से करोड़ों लाभार्थी जुड़े हों। THR व्यवस्था में डिजिटल निगरानी को शामिल करने का एक प्रमुख उद्देश्य इसी चुनौती से निपटना है।
यदि किसी स्तर पर पोषण सामग्री की आपूर्ति में देरी होती है या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं होता, तो डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से संबंधित स्तर की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इससे अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय करने में सुविधा होगी।
कुपोषण के खिलाफ व्यापक रणनीति
उत्तर प्रदेश में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए पोषण उपलब्ध कराने के साथ-साथ विभिन्न स्तरों पर निगरानी और जागरूकता को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। THR व्यवस्था इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
बच्चों को समय पर पोषण उपलब्ध कराने से उनके विकास और स्वास्थ्य में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है। गर्भवती और धात्री महिलाओं को अनुपूरक पोषण मिलने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
तकनीक से मजबूत होगी व्यवस्था
THR व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को सरकारी योजनाओं के डिजिटल रूपांतरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उत्पादन से लेकर अंतिम लाभार्थी तक पूरी सप्लाई चेन को डिजिटल निगरानी से जोड़ने का प्रयास सरकारी वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में है।
सरकार की कोशिश है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल रिकॉर्ड रखने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक समय में निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए किया जाए।
आने वाले समय में और मजबूत करने की तैयारी
करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचने वाली THR व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। डिजिटल निगरानी प्रणाली के जरिए सप्लाई चेन की कमियों को पहचानकर उनमें सुधार करने की संभावना बढ़ती है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में टेक होम राशन व्यवस्था के कायाकल्प के जरिए पोषण वितरण को तकनीक, पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़ने की कोशिश की गई है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक गुणवत्तापूर्ण अनुपूरक पोषण पहुंचाने के इस मॉडल का उद्देश्य कुपोषण के खिलाफ सरकारी प्रयासों को और मजबूत करना है।





