उत्तर प्रदेश

महिला डॉक्टर से 1.78 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी, हार्डवेयर कारोबारी गिरफ्तार

Kavita2
6 Oct 2026 1:35 PM IST
महिला डॉक्टर से 1.78 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी, हार्डवेयर कारोबारी गिरफ्तार
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प्रयागराज। साइबर अपराधियों ने मुंबई की एक महिला डॉक्टर और पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक किरण को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1 करोड़ 78 लाख 60 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाया। मामले की जांच कर रही साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार कर अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान लखीमपुर खीरी के नीमगांव थाना क्षेत्र के सिकंदराबाद निवासी आयुष अवस्थी के रूप में हुई है। आयुष हार्डवेयर की दुकान चलाता है। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी से जुड़े पैसों के लेनदेन और खातों की जांच के दौरान उसकी भूमिका सामने आई। इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने आरोपी के नाम से जुड़ी 40 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी और उसके बैंक खाते में जमा करीब 24.5 लाख रुपये की राशि को फ्रीज करा दिया है। इसके अलावा आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन और एक चेकबुक भी बरामद की गई है।

मामले में अभी दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। इनमें सिकंदराबाद, नीमगांव निवासी निशांत त्रिवेदी और पीलीभीत के पूरनपुर क्षेत्र के दुधियाखुर्द बंजरिया निवासी राजन शुक्ला शामिल हैं। दोनों की तलाश के लिए पुलिस की चार टीमें बनाई गई हैं।

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि गिरोह ने महिला डॉक्टर को किस तरह डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाया और उनसे इतनी बड़ी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई। डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का ऐसा तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं।

अपराधी आमतौर पर दावा करते हैं कि पीड़ित का नाम किसी आपराधिक मामले, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी या फर्जी बैंक खाते से जुड़ा है। इसके बाद वीडियो कॉल पर पूछताछ का नाटक किया जाता है और पीड़ित को किसी से संपर्क न करने की हिदायत दी जाती है। इसी दबाव और डर के माहौल में लोगों से बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए जाते हैं।

इस मामले में भी महिला डॉक्टर को कथित रूप से इसी तरह डराकर लंबे समय तक मानसिक दबाव में रखा गया। फिर अलग-अलग चरणों में उनसे कुल 1 करोड़ 78 लाख 60 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए गए।

शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाने की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की जांच शुरू की। जांच का दायरा बढ़ाने पर रकम के कुछ हिस्से का संबंध आयुष अवस्थी से जुड़े खातों और वित्तीय गतिविधियों से मिला।

पुलिस ने उसके खातों की जांच के बाद करीब साढ़े 24 लाख रुपये की रकम को फ्रीज करा दिया, ताकि पैसे को आगे ट्रांसफर या निकाला न जा सके। इसी तरह आरोपी के नाम 40 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी को भी कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ठगी की पूरी रकम किन-किन खातों से होकर गुजरी और उसमें कितने लोग शामिल थे। साइबर अपराधी अक्सर बैंक खातों की लंबी श्रृंखला बनाकर रकम को कई हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर करते हैं, जिससे असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना कठिन हो जाता है।

पुलिस यह भी जांच रही है कि आयुष अवस्थी की भूमिका केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने तक सीमित थी या वह सीधे ठगी की योजना में भी शामिल था। उसके मोबाइल फोन से मिलने वाले संपर्क, चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच की जा सकती है।

फरार आरोपी निशांत त्रिवेदी और राजन शुक्ला की गिरफ्तारी को पुलिस इस मामले में अहम मान रही है। उनकी गिरफ्तारी के बाद गिरोह के दूसरे सदस्यों, बैंक खातों और ठगी के तरीके से जुड़ी और जानकारी सामने आ सकती है।

चार अलग-अलग टीमें दोनों आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस उनके रिश्तेदारों, परिचितों और वित्तीय नेटवर्क की जानकारी भी जुटा रही है।

इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को सामने ला दिया है। पढ़े-लिखे और उच्च पदों पर रह चुके लोग भी ऐसे ठगों के जाल में फंस रहे हैं, क्योंकि अपराधी सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर डर और गिरफ्तारी का माहौल पैदा करते हैं।

साइबर पुलिस लगातार लोगों को जागरूक करती रही है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करने को कहती है।

यदि कोई व्यक्ति इस तरह फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य आपराधिक मामले का डर दिखाकर पैसे की मांग करता है, तो तुरंत कॉल काटकर पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

महिला डॉक्टर से हुई 1.78 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का मामला आर्थिक रूप से भी बेहद गंभीर है। इतनी बड़ी रकम के ट्रांसफर में कई बैंक खातों और व्यक्तियों की भूमिका होने की आशंका है।

फिलहाल पुलिस एक आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। जांच पूरी होने के बाद इस अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के पूरे नेटवर्क और ठगी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका साफ हो सकेगी।

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