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उत्तर प्रदेश
नाबालिगों से अपराध पर सख्त कानून फिर भी बरी हो रहे आरोपी
Ratna Netam
26 Aug 2026 3:22 PM IST

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गोरखपुर : नाबालिग बच्चियों के साथ अपराध के मामलों में सख्त कानून होने के बावजूद दोषियों को सजा दिलाने की राह में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जोन में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, बच्चियों से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में बड़ी संख्या में आरोपी अदालत से बरी हो गए। कई मामलों में पर्याप्त सबूत नहीं मिल पाए तो कई मामलों में गवाहों के मुकरने से अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ गया।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात महीनों में पॉक्सो एक्ट से जुड़े 75 मामलों की सुनवाई पूरी हुई। इनमें 31 मामलों में आरोपियों को सजा मिली, जबकि 44 मामलों में आरोपी दोषमुक्त हो गए। यानी करीब 60 प्रतिशत मामलों में आरोपी अदालत से छूट गए।
पॉक्सो कानून के बावजूद क्यों नहीं मिल पा रही सजा?
नाबालिग बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए साल 2012 में पॉक्सो एक्ट लागू किया गया था। इस कानून के तहत बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का भी प्रावधान किया गया है।
इसके बावजूद कई मामलों में जांच और मुकदमे की प्रक्रिया में कमजोरियां सामने आती हैं। पुलिस की ओर से समय पर साक्ष्य जुटाना, मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल से जुड़े प्रमाण और गवाहों के बयान अदालत में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अगर जांच के दौरान जरूरी सबूत नहीं मिलते या अदालत में वे साबित नहीं हो पाते तो आरोपी को संदेह का लाभ मिल जाता है।
कई मामलों में गवाहों ने बदले बयान
ऐसे मामलों में गवाहों की भूमिका बेहद अहम होती है। लेकिन कई बार सामाजिक दबाव, डर या अन्य कारणों से गवाह अदालत में अपने पुराने बयान से पीछे हट जाते हैं।
गवाह के मुकरने से अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हो जाता है और आरोपी को कानूनी राहत मिल सकती है। पुलिस और अभियोजन अधिकारियों के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है।
जांच में लापरवाही भी बड़ी वजह
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में शुरुआती जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। पीड़ित बच्ची का बयान, मेडिकल परीक्षण, डिजिटल साक्ष्य और अन्य प्रमाणों को सही तरीके से सुरक्षित रखना जरूरी होता है।
कई बार जांच में देरी या साक्ष्य जुटाने में कमी के कारण अदालत में मामला कमजोर पड़ जाता है।
पीड़ित परिवारों के सामने बड़ी चुनौती
बच्चियों से जुड़े अपराधों में पीड़ित परिवार पहले ही मानसिक और सामाजिक परेशानी से गुजरते हैं। लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया भी उनके लिए मुश्किल साबित होती है।
कई परिवार सामाजिक दबाव या समझौते के कारण मुकदमे को आगे नहीं बढ़ा पाते। इसका सीधा असर दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया पर पड़ता है।
पुलिस और अभियोजन को मजबूत करने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस जांच को और मजबूत करने, अभियोजन पक्ष को बेहतर तरीके से तैयारी करने और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है।
अगर जांच मजबूत होगी और अदालत में पर्याप्त प्रमाण पेश किए जाएंगे तो दोषियों को सजा मिलने की संभावना बढ़ेगी।
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी
बच्चों के खिलाफ अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। कानून के साथ-साथ समाज में जागरूकता और बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था जरूरी है।
गोरखपुर जोन के ये आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ कड़े कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करना भी उतना ही जरूरी है। दोषियों को सजा दिलाने के लिए जांच, गवाही और न्यायिक प्रक्रिया के हर स्तर पर मजबूती लानी होगी।
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