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उत्तर प्रदेश
देहरादून में पुरानी पेंशन को लेकर कर्मचारियों का प्रदर्शन
Rajeshwari Nishad
2 Nov 2026 11:21 PM IST

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देहरादून। उत्तराखंड में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग को लेकर सोमवार को कर्मचारियों और शिक्षकों ने राजधानी देहरादून में जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर प्रदेशभर के 65 कर्मचारी और शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने परेड मैदान में विशाल सभा आयोजित करने के बाद मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। हालांकि, हाथीबड़कला क्षेत्र में पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इससे नाराज कर्मचारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर धरना दिया और कुछ कर्मचारियों ने सड़क पर लेटकर भी अपना विरोध दर्ज कराया।
पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से इस मुद्दे को उठाने के बावजूद उनकी मांग का समाधान नहीं हो पाया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
65 कर्मचारी और शिक्षक संगठनों ने दिखाई एकजुटता
राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से कर्मचारी और शिक्षक देहरादून पहुंचे। कुल 65 संगठनों की भागीदारी ने आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना केवल कर्मचारियों का आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। उनका तर्क है कि वर्षों तक सरकारी सेवा देने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन की सुविधा मिलनी चाहिए।कर्मचारी संगठनों ने इस मांग को लेकर एकजुटता प्रदर्शित करते हुए सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग लंबे समय से की जा रही है और अब इसे लेकर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
परेड मैदान में सभा के बाद CM आवास की ओर कूच
सोमवार को प्रदर्शनकारी देहरादून के परेड मैदान में एकत्र हुए। यहां कर्मचारी और शिक्षक संगठनों ने सभा आयोजित कर पुरानी पेंशन बहाली की मांग को प्रमुखता से उठाया।सभा के दौरान कर्मचारियों ने पेंशन व्यवस्था से जुड़ी अपनी चिंताओं को सामने रखा। उनका कहना था कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा प्रत्येक सरकारी कर्मचारी के लिए महत्वपूर्ण है।सभा समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी और शिक्षक मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना और पुरानी पेंशन योजना की बहाली को लेकर ध्यान आकर्षित करना था।हालांकि, मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया।
हाथीबड़कला में पुलिस ने लगाई बैरिकेडिंग
मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर रहे कर्मचारियों को हाथीबड़कला क्षेत्र में पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। पुलिस की ओर से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिलने पर प्रदर्शनकारियों में नाराजगी बढ़ गई।इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कर्मचारी बैरिकेडिंग के पास एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करने लगे।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने रखना चाहते हैं। वहीं पुलिस की ओर से मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया।स्थिति तनावपूर्ण होने के बावजूद उपलब्ध जानकारी में किसी गंभीर हिंसक घटना की पुष्टि नहीं हुई है।
सड़क पर बैठकर दिया धरना, लेटकर जताया विरोध
बैरिकेडिंग लगाए जाने से नाराज कर्मचारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर लेटकर भी विरोध जताया। इस दौरान कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप समाधान नहीं निकला है।सड़क पर धरना शुरू होने के बाद हाथीबड़कला क्षेत्र में आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों की बड़ी संख्या को देखते हुए पुलिस के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी रही।कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन बहाली उनके आंदोलन की प्रमुख मांग है और इसके समाधान तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
क्या है पुरानी पेंशन योजना?
पुरानी पेंशन योजना के तहत पात्र सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार पेंशन मिलती थी। यह व्यवस्था कर्मचारियों को नियमित आय और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू थी।
वर्ष 2004 से केंद्र सरकार के नए कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) लागू की गई थी। इसके बाद विभिन्न राज्यों में भी नई पेंशन व्यवस्था अपनाई गई।पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन व्यवस्था के बीच प्रमुख अंतर सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ की संरचना से जुड़ा है। पुरानी व्यवस्था में पेंशन निर्धारित नियमों के अनुसार मिलती थी, जबकि एनपीएस में सेवानिवृत्ति लाभ अंशदान और निवेश से जुड़े प्रावधानों पर निर्भर करते हैं।इसी अंतर को लेकर कर्मचारी संगठन लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारियों ने उठाया भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी सेवा में लंबा समय बिताने के बाद सेवानिवृत्ति के दौरान आर्थिक सुरक्षा मिलना आवश्यक है।कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था से कर्मचारियों को भविष्य की आय को लेकर अधिक निश्चितता मिलती थी। इसके विपरीत नई पेंशन व्यवस्था में निवेश और बाजार से जुड़े पहलुओं के कारण सेवानिवृत्ति लाभ को लेकर अनिश्चितता हो सकती है।हालांकि, पेंशन सुधारों को लेकर सरकारों के सामने वित्तीय स्थिरता और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी रहती है।
सरकार के फैसले पर टिकी कर्मचारियों की नजर
देहरादून में सोमवार को हुए प्रदर्शन ने उत्तराखंड में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है।65 कर्मचारी और शिक्षक संगठनों के एकजुट होकर मुख्यमंत्री आवास कूच करने से यह स्पष्ट हुआ है कि कर्मचारी संगठन इस मुद्दे को लेकर आंदोलन जारी रखने के पक्ष में हैं।फिलहाल प्रदर्शन के बाद सरकार की ओर से इस विशेष आंदोलन पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से किसी स्तर पर बातचीत हुई है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अब कर्मचारियों की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर रहेगी। यदि पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है तो आने वाले दिनों में कर्मचारी संगठनों की ओर से आंदोलन को और तेज करने की संभावना बनी हुई है।
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