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उत्तर प्रदेश
उम्र के आखिरी पड़ाव पर तलाक की मांग परिवार का मामला चर्चा में
Ratna Netam
14 Sept 2026 9:16 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक बुजुर्ग दंपती का पारिवारिक विवाद चर्चा का विषय बन गया है। चार बेटों के माता-पिता होने के बावजूद बुजुर्ग पति-पत्नी अलग-अलग रहने को मजबूर बताए जा रहे हैं। दावा है कि बेटों ने माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी आपस में इस तरह बांट ली कि मां एक बेटे के पास और पिता दूसरे बेटे के पास रहने लगे। अब करीब 80 साल की बुजुर्ग महिला ने अपने पति से तलाक की मांग कर दी है। उम्र के इस पड़ाव पर तलाक की बात सामने आने से मामला चर्चा में आ गया है।
जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग दंपती के चार बेटे हैं। आमतौर पर इस उम्र में पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ रहकर जीवन का अंतिम पड़ाव बिताना चाहते हैं, लेकिन इस परिवार में परिस्थितियां अलग हो गईं। माता-पिता की देखभाल को लेकर बेटों के बीच बनी व्यवस्था ने बुजुर्ग दंपती को एक-दूसरे से अलग कर दिया।
हालांकि माता-पिता को अलग-अलग रखने का फैसला किस परिस्थिति में हुआ, क्या इसमें उनकी सहमति थी और यह व्यवस्था कब से चल रही थी, इन सवालों की स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है। केवल बेटों द्वारा देखभाल की जिम्मेदारी बांटने को तलाक की एकमात्र वजह मानना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
चार बेटे लेकिन मां-बाप अलग
इस मामले का सबसे भावुक पहलू यही है कि दंपती के चार बेटे होने के बावजूद माता-पिता साथ नहीं रह रहे हैं। बताया जा रहा है कि बेटों ने उनकी जिम्मेदारी अलग-अलग ले रखी है। एक बेटा मां की देखभाल कर रहा है तो दूसरा पिता की।
अगर यह व्यवस्था बुजुर्ग दंपती की इच्छा के खिलाफ बनाई गई है तो इससे उनके भावनात्मक जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है। लंबे वैवाहिक जीवन के बाद अचानक अलग-अलग घरों में रहने की स्थिति किसी भी बुजुर्ग दंपती के लिए आसान नहीं होती।
वहीं यह भी संभव है कि परिवार ने स्वास्थ्य, जगह या दूसरी व्यावहारिक परिस्थितियों के कारण ऐसी व्यवस्था बनाई हो। इसलिए परिवार के सभी पक्षों की बात सामने आना महत्वपूर्ण है।
80 साल की उम्र में तलाक की मांग
सबसे ज्यादा चर्चा बुजुर्ग महिला की उम्र को लेकर हो रही है। करीब 80 वर्ष की महिला द्वारा पति से तलाक की मांग करना अपने आप में असामान्य मामला माना जा रहा है।
लेकिन कानूनी रूप से उम्र किसी व्यक्ति के वैवाहिक अधिकारों को अपने आप समाप्त नहीं करती। अगर विवाह में ऐसी परिस्थितियां पैदा होती हैं जो संबंधित वैवाहिक कानून के तहत तलाक का आधार बनती हैं तो बुजुर्ग व्यक्ति भी अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
तलाक की मांग करना और अदालत से तलाक मिलना दो अलग बातें हैं। अदालत संबंधित पक्षों को सुनने और उपलब्ध तथ्यों को देखने के बाद ही फैसला करती है।
आखिर क्यों तलाक चाहती हैं बुजुर्ग महिला?
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है। क्या महिला पति से अलग रहने के कारण तलाक चाहती हैं या पति-पत्नी के बीच पहले से कोई विवाद था?
क्या बेटों द्वारा अलग-अलग रखने के बाद रिश्ते में दूरी बढ़ी या तलाक के पीछे कोई दूसरी पारिवारिक वजह है?
इन सवालों के जवाब महिला की याचिका और परिवार के दूसरे पक्ष की जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
इसलिए बिना अदालत के दस्तावेज देखे किसी खास वजह को तलाक का निश्चित कारण बताना उचित नहीं होगा।
पिता का पक्ष भी जरूरी
इस कहानी में केवल बुजुर्ग महिला की मांग ही नहीं बल्कि उनके पति का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। वह पत्नी की तलाक की मांग पर क्या कहते हैं और क्या दोनों के बीच पहले से कोई विवाद चल रहा था, इसकी जानकारी पूरी तस्वीर समझने के लिए जरूरी है।
अगर पति पत्नी के साथ रहना चाहते हैं और विवाद केवल बच्चों द्वारा बनाई गई रहने की व्यवस्था से जुड़ा है तो परिवार के स्तर पर समाधान की संभावना अलग हो सकती है।
वहीं अगर पति-पत्नी के बीच पुराना वैवाहिक विवाद है तो मामला अलग कानूनी दिशा ले सकता है।
बेटों की जिम्मेदारी पर सवाल
चार बेटों के रहते माता-पिता के अलग-अलग रहने की खबर स्वाभाविक रूप से बेटों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है। लेकिन बिना उनका पक्ष जाने उन्हें दोषी घोषित करना सही नहीं होगा।
कई परिवारों में बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल भाई-बहन आपस में बांटते हैं। कोई आर्थिक खर्च उठाता है तो कोई माता-पिता को अपने पास रखता है। ऐसी व्यवस्था अपने आप गलत नहीं है।
समस्या तब पैदा होती है जब बुजुर्गों की इच्छा को नजरअंदाज कर उनके जीवन से जुड़े फैसले उन पर थोपे जाते हैं।
अगर पति-पत्नी साथ रहना चाहते हैं तो परिवार को जहां तक संभव हो उनकी इस इच्छा का सम्मान करना चाहिए।
उम्र के इस पड़ाव पर साथ की जरूरत
बुढ़ापे में व्यक्ति की जरूरतें बदल जाती हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं और रोजमर्रा के कई कामों के लिए दूसरे लोगों की मदद की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसे समय में जीवनसाथी का साथ भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। दशकों से साथ रह रहे पति-पत्नी एक-दूसरे की आदतों, स्वास्थ्य और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझते हैं।
अगर उन्हें अचानक अलग कर दिया जाए तो अकेलापन और तनाव बढ़ सकता है।
इसलिए बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की व्यवस्था बनाते समय केवल यह तय करना पर्याप्त नहीं है कि उनका खाना और दवा कौन देगा। उनकी भावनात्मक जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
बुजुर्गों को भी अपने फैसले लेने का अधिकार
अधिक उम्र होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के जीवन के सभी फैसले उसके बच्चे लेने लगें। अगर बुजुर्ग व्यक्ति निर्णय लेने में सक्षम है तो वह कहां और किसके साथ रहना चाहता है, उसकी इच्छा महत्वपूर्ण है।
यह बात वैवाहिक जीवन पर भी लागू होती है। बुजुर्ग पति-पत्नी के रिश्ते के बारे में अंतिम निर्णय केवल बच्चों की सुविधा के आधार पर नहीं होना चाहिए।
परिवार को देखभाल की व्यवस्था बनाते समय माता-पिता से बात करके उनकी सहमति लेने की कोशिश करनी चाहिए।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए कानून में भी प्रावधान
भारत में वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता के भरण-पोषण के लिए **Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007** जैसे कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
निर्धारित परिस्थितियों में ऐसे माता-पिता जो अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, वे अपने बच्चों से सहायता की मांग कर सकते हैं।
इस कानून का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को बुनियादी जरूरतों और सम्मानजनक जीवन के लिए सहायता उपलब्ध कराना है।
हालांकि इस विशेष दंपती के मामले में यह कानून सीधे लागू होता है या नहीं, इसका निर्णय मामले की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर ही किया जा सकता है।
संपत्ति विवाद का दावा करना जल्दबाजी
अक्सर बुजुर्ग माता-पिता और बच्चों के बीच विवाद सामने आने पर तुरंत संपत्ति को वजह मान लिया जाता है। लेकिन यहां उपलब्ध जानकारी में संपत्ति विवाद की पुष्टि नहीं है।
इसलिए यह कहना कि बेटों ने संपत्ति के कारण माता-पिता को बांटा, बिना प्रमाण के होगा।
अगर आगे परिवार या कानूनी रिकॉर्ड से संपत्ति संबंधी कोई विवाद सामने आता है तभी उसे मामले से जोड़ना उचित होगा।
क्या परिवार में हो सकती है सुलह?
अगर तलाक की मांग के पीछे मुख्य वजह अलग-अलग रहना या पारिवारिक व्यवस्था है तो बातचीत के जरिए समाधान की संभावना देखी जा सकती है।
पारिवारिक विवादों में मध्यस्थता कई बार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दोनों पक्षों की बात सुनकर ऐसा समाधान तलाशने की कोशिश की जा सकती है जिसमें उनकी इच्छा और सम्मान दोनों सुरक्षित रहें।
लेकिन अगर महिला ने किसी गंभीर वैवाहिक कारण से तलाक मांगा है तो उस परिस्थिति को अलग तरीके से देखना होगा।
अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत तथ्यों और लागू कानून के आधार पर होगा।
बेटों के बीच जिम्मेदारी बांटना गलत नहीं लेकिन...
बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी बच्चों के बीच बांटना व्यावहारिक व्यवस्था हो सकती है। उदाहरण के लिए एक बेटा मेडिकल खर्च उठाए और दूसरा रोजमर्रा की देखभाल करे।
लेकिन माता और पिता को अलग-अलग घरों में रख देना तभी उचित माना जा सकता है जब वे स्वयं इससे सहमत हों और यह उनके हित में हो।
अगर दोनों साथ रहना चाहते हैं तो बच्चों को ऐसी व्यवस्था खोजनी चाहिए जिससे उनकी देखभाल भी हो और उनका साथ भी बना रहे।
बदलते परिवारों की तस्वीर
यह मामला भारतीय परिवार व्यवस्था में आ रहे बदलावों की तरफ भी ध्यान खींचता है। पहले संयुक्त परिवारों में कई पीढ़ियां एक साथ रहती थीं। अब नौकरी, शिक्षा और दूसरे कारणों से परिवार अलग-अलग शहरों और घरों में रहने लगे हैं।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर कई बार बुजुर्ग माता-पिता पर पड़ता है।
जब माता-पिता आत्मनिर्भर नहीं रह जाते तो बच्चों को उनकी देखभाल की जिम्मेदारी तय करनी पड़ती है। अगर परिवार में आपसी सहमति नहीं बनती तो विवाद पैदा हो सकता है।
अदालत की प्रक्रिया पर नजर
80 वर्षीय महिला की तलाक की मांग के बाद अब कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। अदालत महिला के दावे और पति के जवाब को देखकर आगे फैसला करेगी।
अगर मामला विवादित तलाक का है तो याचिका में बताए गए कानूनी आधार और उनसे जुड़े साक्ष्यों की जांच होगी। अगर दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाह समाप्त करना चाहते हैं तो उसकी प्रक्रिया अलग हो सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि मामला किस कानूनी चरण में है।
एक परिवार लेकिन बुजुर्ग माता-पिता अलग
चार बेटों वाले परिवार में बुजुर्ग मां और पिता का अलग-अलग रहना इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू है। इससे यह सवाल उठता है कि बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल का अर्थ केवल आर्थिक जिम्मेदारी है या उनकी भावनात्मक जरूरतों को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए।
बच्चों के लिए माता-पिता की दवा, भोजन और दूसरी जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है, लेकिन उनके जीवनसाथी के साथ रहने की इच्छा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब इस मामले में सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि बुजुर्ग महिला ने तलाक मांगने का वास्तविक आधार क्या बताया है और पति का पक्ष क्या है।
चार बेटों द्वारा माता-पिता की देखभाल अलग-अलग किए जाने की परिस्थितियां भी स्पष्ट होना बाकी हैं। अदालत और संबंधित पक्षों की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि करीब 80 साल की उम्र में यह दंपती आखिर किस वजह से तलाक की दहलीज तक पहुंच गया।
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