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उत्तर प्रदेश
वृंदावन गुरुकुल में चार छात्रों की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
nidhi
7 Oct 2026 9:38 AM IST

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चार मौतों के बाद प्रशासन की नींद टूटी
वृंदावन: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन स्थित महर्षि पाणिनि गुरुकुल में चार छात्रों की मौत के बाद संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था, पंजीकरण और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार देर रात अंडरग्राउंड पानी की टंकी में उतरे छात्रों के बेहोश होने के बाद चार की मौत हो गई, जबकि एक छात्र की हालत गंभीर बताई गई है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गुरुकुल परिसर में बने वृंदावन गुरुकुल में चार छात्रों की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल से दुर्गंध आने के बाद छात्र उसमें उतरे थे। बताया जा रहा है कि पांच छात्र टैंक में गए और अंदर पहुंचते ही एक के बाद एक बेहोश हो गए। आशंका जताई जा रही है कि टैंक में जहरीली गैस जमा होने के कारण हादसा हुआ, हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। छात्रों को बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चार छात्रों को बचाया नहीं जा सका। जिलाधिकारी सीपी सिंह ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में हादसे की परिस्थितियों के साथ यह भी देखा जाएगा कि छात्रों को टैंक जैसे जोखिमपूर्ण स्थान पर क्यों भेजा गया।
इस घटना के बाद गुरुकुल की व्यवस्था से जुड़े कई तथ्य भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह संस्थान वर्ष 2022 से संचालित हो रहा था। करीब 220 वर्ग गज के भवन में 100 से अधिक छात्र रह रहे थे। प्रशासन अब यह भी जांच रहा है कि संस्थान का विधिवत पंजीकरण था या नहीं और छात्रावास के संचालन के लिए आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक निगरानी को लेकर उठ रहा है। हाल के महीनों में दूसरे शहरों में छात्रावास और शिक्षण संस्थानों में हादसों के बाद सुरक्षा जांच के निर्देश दिए गए थे। मथुरा जिले में भी कई हॉस्टलों का निरीक्षण किया गया था, लेकिन वृंदावन के इस गुरुकुल की व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच नहीं होने की बात सामने आई है।
गुरुकुल में रहने वाले छात्रों को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। अस्पताल में भर्ती एक छात्र ने बताया कि विद्यार्थियों से पढ़ाई के अलावा खाना बनाने, झाड़ू-पोंछा करने, कपड़े धोने और परिसर की साफ-सफाई जैसे काम भी कराए जाते थे। रिपोर्ट के मुताबिक मृत छात्रों को पहली बार टैंक से जुड़ा काम दिया गया था। इन दावों की भी प्रशासनिक जांच की जा रही है। घटना के बाद पुलिस ने गुरुकुल की व्यवस्थाओं की देखरेख करने वाले एक युवक को हिरासत में लिया है। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गुरुकुल में देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र संस्कृत भाषा, वेद और कर्मकांड की शिक्षा लेने पहुंचे थे। ऐसे में छात्रों के अभिभावकों की सुरक्षा संबंधी चिंता भी बढ़ गई है। प्रशासन ने गुरुकुल में रहने वाले सभी छात्रों का सत्यापन कराने और उनके परिवारों को घटना की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा संस्थान की मान्यता भी है। जिला प्रशासन के अनुसार, यह पता लगाया जाएगा कि गुरुकुल किन नियमों के तहत संचालित हो रहा था और छात्रावास चलाने के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि सुरक्षा मानकों या संचालन नियमों में लापरवाही मिलती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
चार छात्रों की मौत ने एक बार फिर छात्रावासों और आवासीय शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा जांच की जरूरत को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक भूमिगत टैंक, सीवर या बंद स्थानों में बिना सुरक्षा उपकरण और गैस जांच के उतरना बेहद खतरनाक हो सकता है। फिलहाल प्रशासन की जांच जारी है। हादसा कैसे हुआ, टैंक में किस तरह की गैस थी और छात्रों को वहां भेजने का निर्णय किसने लिया, इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आएंगे। इस घटना के बाद जिले के अन्य छात्रावासों और आवासीय संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है।
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