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गोरखपुर: दीपावली के त्योहार पर जहां देशभर में बाजार सज रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बेटियां अपनी कलाकारी से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। शहर में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में महिला कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मिट्टी को सुंदर आकृतियों में बदलने और प्रतिमाओं को आकर्षक रंगों से सजाने में इनकी मेहनत दिखाई दे रही है। नंदनी, नेहा कुमारी, सुमन और सुकन्या जैसी कलाकारों की भागीदारी पारंपरिक मूर्तिकला में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
गोरखपुर में दीपावली की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में मूर्तिकार दिन-रात मेहनत करके मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और मां काली की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। रविवार, 8 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी। इससे पहले पूजा पंडालों और घरों में प्रतिमाएं स्थापित करने की तैयारियां चल रही हैं।
शहर के खुर्रमपुर में दुर्गा मंदिर के पास कलाकार मां लक्ष्मी की मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। यहां नंदनी और नेहा कुमारी समेत अन्य कलाकार प्रतिमाओं को तैयार करने का काम कर रहे हैं। इसी तरह अलहदादपुर रोड के आसपास नेहा, सुमन और सुकन्या सहित अन्य कलाकार मूर्तियों को सुंदर रूप देने में योगदान कर रहे हैं। मूर्तिकला एक ऐसा पारंपरिक हुनर है, जिसमें धैर्य, मेहनत और रचनात्मकता की आवश्यकता होती है। प्रतिमा तैयार करने के लिए पहले मिट्टी को मनचाहा आकार दिया जाता है। इसके बाद उसे सुखाकर रंगों और सजावटी सामग्री की सहायता से आकर्षक बनाया जाता है।
दीपावली के अवसर पर विशेष रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं की मांग रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए की जाती है। गोरखपुर के गोरखनाथ, नौसड़, गुलरिहा, कुम्हार टोला और अलहदादपुर जैसे क्षेत्रों में भी प्रतिमा निर्माण का कार्य चल रहा है। गोरखनाथ के मूर्तिकार वासुदेव पाल के अनुसार, विजयादशमी से प्रतिमाओं को तैयार करने का सिलसिला शुरू हो गया था। उनके यहां सौ से अधिक प्रतिमाएं बनाई गई हैं।
बदलते समय के साथ मूर्तिकला के क्षेत्र में भी नए डिजाइन और तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है। पारंपरिक शैली के साथ आधुनिक रंगों और सजावट का समावेश प्रतिमाओं को नया स्वरूप दे रहा है। इससे कलाकारों को अपनी रचनात्मक क्षमता दिखाने का अवसर मिलता है। गोरखपुर में मिट्टी की कलाकृतियों की पुरानी परंपरा रही है। जिले का टेराकोटा शिल्प भी अपनी विशेष पहचान रखता है। स्थानीय कलाकार पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ाते हुए नए बाजारों तक अपनी पहुंच बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
महिला कलाकारों की भागीदारी इस क्षेत्र के लिए उत्साहजनक संकेत है। इससे यह संदेश मिलता है कि पारंपरिक कला केवल एक पीढ़ी या किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं है। नई पीढ़ी के युवा और युवतियां भी अपनी मेहनत से इस विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं। दीपावली पर गोरखपुर की इन बेटियों की कलाकारी स्थानीय शिल्प और महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरक तस्वीर पेश कर रही है। उनकी मेहनत से तैयार प्रतिमाएं त्योहार के दौरान पूजा पंडालों और घरों की शोभा बढ़ाएंगी।
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