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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। एमएलसी चुनाव की मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी सभी 11 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है, जबकि भाजपा ने पांच सीटों पर अपने उम्मीदवार पहले ही उतार दिए हैं। भाजपा में बची हुई छह सीटों पर टिकट को लेकर मंथन जारी है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद इन सीटों पर भी जल्द उम्मीदवारों के नाम सामने आने की संभावना है।
भाजपा ने पांच सीटों पर पहले ही खोले पत्ते
भाजपा ने मई में पांच विधान परिषद सीटों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी। पार्टी ने लखनऊ स्नातक सीट से अवनीश कुमार सिंह, आगरा स्नातक से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, लखनऊ शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से डॉ. हरि सिंह ढिल्लो और मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा को उम्मीदवार बनाया है।
इन पांच सीटों पर नाम तय होने के बाद अब सबसे ज्यादा नजर बाकी छह सीटों पर है। भाजपा में उम्मीदवारों के चयन को लेकर कई स्तर पर चर्चा हो चुकी है। पार्टी की कोर कमेटी सहित संगठन के स्तर पर संभावित दावेदारों के नामों पर विचार किया गया है। चुनाव की तारीख सामने आने के बाद प्रत्याशियों की घोषणा का दबाव भी बढ़ गया है।
छह सीटों पर दावेदारों की नजर
जिन छह सीटों पर भाजपा को अभी प्रत्याशी घोषित करने हैं, वहां दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। पार्टी नेतृत्व के सामने स्थानीय समीकरणों के साथ संगठन में सक्रियता और संबंधित स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उम्मीदवार तय करने की चुनौती है।
विधान परिषद की जिन 11 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। मौजूदा स्थिति में स्नातक कोटे की लखनऊ, आगरा और मेरठ सीट पर भाजपा के सदस्य हैं, जबकि इलाहाबाद-झांसी और वाराणसी सीट सपा के पास है। शिक्षक कोटे में लखनऊ, मेरठ और बरेली-मुरादाबाद सीटों पर भाजपा के सदस्य हैं।
सपा ने सभी सीटों पर घोषित किए उम्मीदवार
भाजपा के विपरीत समाजवादी पार्टी सभी 11 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी है। इससे सपा को उम्मीदवारों के स्तर पर चुनावी तैयारी के लिए अधिक समय मिला है। अब चुनाव कार्यक्रम जारी होने के बाद प्रचार, मतदाता संपर्क और संगठनात्मक तैयारियां और तेज होने की संभावना है।
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इन सीटों के मतदाता संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत स्नातक और शिक्षक होते हैं। यही कारण है कि राजनीतिक दलों की रणनीति भी सामान्य चुनावों से अलग रहती है और मतदाताओं तक सीधे संपर्क को खास महत्व दिया जाता है।
29 सितंबर से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया
विधान परिषद चुनाव के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। इन 11 मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त होना है।
इसी के साथ उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भी चुनावी प्रक्रिया शुरू हो रही है। राज्यसभा के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होगा। उत्तर प्रदेश से नौ सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है, जबकि एक सीट डॉ. दिनेश शर्मा के इस्तीफे से खाली हुई है।
राज्यसभा की 10 सीटों पर भी सियासी हलचल
राज्यसभा की जिन सीटों पर चुनाव होना है, उनमें वर्तमान में आठ भाजपा, एक समाजवादी पार्टी और एक बहुजन समाज पार्टी से जुड़ी सीट है। भाजपा के जिन प्रमुख सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, नीरज शेखर, बृजलाल, गीता शाक्य, बीएल वर्मा और सीमा द्विवेदी शामिल हैं। सपा के रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव अलग-अलग निर्वाचन प्रक्रियाओं के तहत होंगे। राज्यसभा में विधानसभा के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं, जबकि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में संबंधित श्रेणी के पंजीकृत मतदाता वोट डालते हैं।
चुनाव कार्यक्रम आते ही बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
चुनाव आयोग की घोषणा के बाद अब राजनीतिक दलों का पूरा ध्यान उम्मीदवारों और चुनावी तैयारियों पर है। भाजपा के लिए तत्काल मुद्दा विधान परिषद की बाकी छह सीटों पर प्रत्याशियों का चयन है, जबकि सपा अपने घोषित प्रत्याशियों के साथ चुनावी अभियान आगे बढ़ा रही है।
नामांकन शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में भाजपा की बची छह सीटों के उम्मीदवारों पर फैसला जल्द सामने आने की संभावना है। इसके साथ ही राज्यसभा की 10 सीटों को लेकर भी राजनीतिक दलों में उम्मीदवार चयन और रणनीति पर बैठकों का दौर तेज होने की उम्मीद है।





