उत्तर प्रदेश

त्योहारों के बीच खाद्य पदार्थों में खतरनाक मिलावट का खुलासा, खोवा-पनीर समेत 26 नमूने फेल

Kavita2
8 Oct 2026 3:02 PM IST
त्योहारों के बीच खाद्य पदार्थों में खतरनाक मिलावट का खुलासा, खोवा-पनीर समेत 26 नमूने फेल
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चंदौली। त्योहारी सीजन के बीच बाजारों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में खोवा, पनीर, दूध, मसाला, अनाज और पानी सहित विभिन्न खाद्य सामग्रियों के 26 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। जांच रिपोर्ट में कुछ खाद्य पदार्थों में यूरिया सहित अन्य रासायनिक पदार्थों की मिलावट और मसालों में कृत्रिम रंग तथा ईंट के चूरे जैसे पदार्थ मिलने की बात सामने आई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 17 संबंधित कारोबारियों के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल किया है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के बीच इस खुलासे ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में 26 नमूने फेल

जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग ने विभिन्न खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच कराई थी। इसके तहत खोवा, पनीर, दूध, मसाले, अनाज और पानी सहित कई प्रकार की खाद्य सामग्री के नमूने लिए गए।

प्रयोगशाला में जांच के बाद इनमें से 26 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।

जांच के दौरान कुछ उत्पादों में ऐसे पदार्थों की मिलावट की बात सामने आई, जिनका खाद्य सामग्री में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट मिलने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

हालांकि, जांच के लिए कुल कितने नमूने लिए गए थे और 26 असफल नमूनों में अलग-अलग खाद्य पदार्थों की संख्या कितनी थी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

खोवा और पनीर में यूरिया की मिलावट का दावा

जांच से जुड़ी जानकारी में सबसे चिंताजनक बात खोवा और पनीर जैसे दुग्ध उत्पादों में मिलावट सामने आना है।

विभागीय जांच के अनुसार, कुछ नमूनों में यूरिया सहित अन्य रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल की पुष्टि होने की बात कही गई है।

खोवा और पनीर का उपयोग घरों के अलावा मिठाई की दुकानों, होटलों और खानपान के अन्य प्रतिष्ठानों में किया जाता है।

त्योहारों के दौरान इन उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

हालांकि, किस नमूने में किस पदार्थ की कितनी मात्रा पाई गई और उसे असुरक्षित या अमानक की किस श्रेणी में रखा गया, इसकी विस्तृत प्रयोगशाला रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।

मसालों में कृत्रिम रंग और ईंट के चूरे की मिलावट

दुग्ध उत्पादों के अलावा मसालों में भी मिलावट का मामला सामने आया है।

जांच से संबंधित विवरण के अनुसार, कुछ मसालों में कृत्रिम रंग और ईंट के चूरे जैसे पदार्थ मिलाए जाने की पुष्टि हुई है।

मसाले लगभग हर घर की रसोई में इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में उनकी गुणवत्ता का सीधा संबंध उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से होता है।

खाद्य पदार्थों में प्रतिबंधित रंग या अखाद्य सामग्री का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

खासतौर पर खुले में बिकने वाले मसालों की खरीद करते समय उपभोक्ताओं को उनकी गुणवत्ता, स्वच्छता और विश्वसनीय विक्रेता का ध्यान रखना चाहिए।

17 कारोबारियों के खिलाफ अदालत में परिवाद

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर 17 संबंधित कारोबारियों के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल किया है।

इन मामलों में आरोप है कि खाद्य पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे।

अब संबंधित मामलों में उपलब्ध जांच रिपोर्ट, दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया होगी।

हालांकि, अदालत में परिवाद दाखिल होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी संबंधित कारोबारियों के खिलाफ आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध हो चुके हैं।

दोष और दंड का निर्धारण संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।

विभाग की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता में सामने आई गड़बड़ियों को कानूनी स्तर पर उठाया गया है।

त्योहारों में बढ़ जाती है खाद्य सामग्री की मांग

त्योहारों के दौरान बाजारों में मिठाई, खोवा, पनीर, दूध, घी और मसालों की मांग बढ़ जाती है।

बड़ी संख्या में लोग पूजा-पाठ, पारिवारिक समारोहों और मेहमानों के स्वागत के लिए इन खाद्य पदार्थों की खरीद करते हैं।

इस दौरान मांग बढ़ने के कारण खाद्य सामग्री की आपूर्ति और गुणवत्ता पर अतिरिक्त ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के लिए त्योहारों का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि बाजार में खाद्य सामग्री की बिक्री अधिक होती है।

सितंबर 2026 में भी विभिन्न राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभागों ने त्योहारों से पहले दुग्ध उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की जांच तेज की थी।

दूध और अनाज की गुणवत्ता पर भी सवाल

इस जांच में दूध और अनाज जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों को भी शामिल किया गया था।

ये वस्तुएं लगभग हर परिवार के नियमित भोजन का हिस्सा हैं।

इसलिए इनकी गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का प्रभाव बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

दूध की शुद्धता, उसके भंडारण की स्थिति और खाद्य मानकों का पालन करना आवश्यक है।

इसी तरह अनाज की सफाई, उसमें बाहरी पदार्थों की मौजूदगी और सुरक्षित भंडारण भी महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, इस मामले में दूध और अनाज के कितने नमूने असफल हुए तथा उनमें कौन-सी विशिष्ट कमियां पाई गईं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

पीने के पानी की भी हुई जांच

खाद्य सामग्री के साथ पानी की गुणवत्ता को भी जांच के दायरे में रखा गया।

पीने का साफ और सुरक्षित पानी स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। दूषित पानी के सेवन से पेट और आंतों से संबंधित संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए बाजार में उपलब्ध पेयजल और खाद्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता पर निगरानी जरूरी है।

विभागीय जांच में पानी के नमूनों को भी शामिल किया गया, लेकिन इनमें कितने नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे, इसका अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

मिलावट से स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर

खाद्य पदार्थों में मिलावट केवल गुणवत्ता का मामला नहीं है, बल्कि इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को भी खतरा हो सकता है।

खाने योग्य सामग्री में अखाद्य पदार्थ, प्रतिबंधित रंग या हानिकारक रसायन मिलाए जाने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।

ऐसे पदार्थों के सेवन से होने वाला नुकसान उनकी प्रकृति, मात्रा और सेवन की अवधि पर निर्भर करता है।

सभी अमानक खाद्य पदार्थ समान रूप से खतरनाक नहीं होते। कुछ उत्पाद गुणवत्ता या लेबलिंग संबंधी मानकों पर असफल होते हैं, जबकि कुछ को प्रयोगशाला जांच में असुरक्षित पाया जा सकता है।

इसलिए प्रत्येक नमूने की वास्तविक प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर ही उसके स्वास्थ्य जोखिम का सही आकलन किया जाना चाहिए।

खरीदारी करते समय सावधानी बरतें उपभोक्ता

त्योहारी सीजन में खाद्य सामग्री खरीदते समय उपभोक्ताओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

खोवा, पनीर, दूध और मिठाई जैसी जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं को उचित तापमान पर रखा जाना चाहिए।

पैक्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय निर्माण और समाप्ति तिथि, पैकेट की स्थिति तथा खाद्य लाइसेंस संबंधी जानकारी देखना उपयोगी है।

खुले मसालों और दुग्ध उत्पादों के मामले में विश्वसनीय दुकानों से खरीदारी करना बेहतर होता है।

यदि किसी खाद्य पदार्थ के रंग, गंध या गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, तो उसका सेवन करने से बचना चाहिए।

केवल रंग, गंध या घरेलू प्रयोग के आधार पर सभी प्रकार की मिलावट की निश्चित पहचान नहीं की जा सकती। इसके लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की जांच जरूरी हो सकती है।

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई

देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 लागू है।

इसके अंतर्गत खाद्य कारोबारियों के लिए निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन करना आवश्यक है।

खाद्य सुरक्षा विभाग नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला में जांच करा सकता है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है।

मौजूदा मामले में 26 नमूने फेल होने के बाद 17 कारोबारियों के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल किए गए हैं।

यह कार्रवाई खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर विभाग की ओर से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

जांच रिपोर्ट के बाद बढ़ी सख्ती

त्योहारों के बीच खाद्य पदार्थों के 26 नमूने फेल होना गंभीर चिंता का विषय है।

खोवा, पनीर और मसालों जैसे उत्पादों में कथित हानिकारक मिलावट मिलने से उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए हैं।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने 17 कारोबारियों के खिलाफ परिवाद दाखिल कर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।

अब इन मामलों में अदालत की कार्यवाही और जांच रिपोर्ट से जुड़े विस्तृत दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल विभागीय जानकारी के अनुसार 26 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। संबंधित कारोबारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का अंतिम परिणाम न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।

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