उत्तर प्रदेश

साइबर अपराधियों का नया हथकंडा, लोगों के खाते निशाने पर

Saba Naaz
21 July 2026 4:59 PM IST
साइबर अपराधियों का नया हथकंडा, लोगों के खाते निशाने पर
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नई दिल्ली। साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका अपना लिया है, जिससे पुलिस के लिए भी ऐसे मामलों की जांच करना मुश्किल होता जा रहा है। अब तक साइबर ठग लोगों के बैंक खातों से पैसे निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर करते थे, जिसके बाद पुलिस बैंक खातों को होल्ड कर रकम वापस कराने की कोशिश करती थी। लेकिन अब ठगों ने तरीका बदल दिया है। वे सीधे ऑनलाइन शॉपिंग कर ठगी की रकम को ठिकाने लगा रहे हैं।

मुरादाबाद में सामने आए कुछ मामलों से साइबर ठगी के इस नए ट्रेंड का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि ठग किसी खाते में पैसे ट्रांसफर करने के बजाय सीधे ई-कॉमर्स वेबसाइट से महंगे सामान खरीद रहे हैं। इसके लिए वे एक्सप्रेस डिलीवरी का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि सामान जल्दी उनके सहयोगियों तक पहुंच जाए और पुलिस कार्रवाई करने से पहले ही ठग माल लेकर फरार हो जाएं।

साइबर अपराधियों के इस नए तरीके ने पुलिस की चुनौती बढ़ा दी है। पहले जब किसी व्यक्ति के खाते से रकम चोरी होती थी तो पीड़ित तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराता था। इसके बाद पुलिस संबंधित बैंक खातों को होल्ड कराकर ठगी की रकम को सुरक्षित करने का प्रयास करती थी। लेकिन अब ऑनलाइन खरीदारी होने के कारण रकम किसी बैंक खाते में नहीं पहुंचती, जिससे पुलिस के पास पैसे रोकने का विकल्प सीमित हो गया है।

मुरादाबाद में सामने आए मामलों में पता चला कि साइबर ठगों ने मोबाइल फोन को हैक कर सीधे ऑनलाइन शॉपिंग की। इसके लिए ठग पीड़ितों के मोबाइल में एपीके फाइल भेजते हैं। जैसे ही व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड करता है, मोबाइल का नियंत्रण ठगों के हाथ में चला जाता है। इसके बाद वे बैंकिंग जानकारी का इस्तेमाल कर ऑनलाइन खरीदारी कर लेते हैं।

एक मामले में कटघर थाना क्षेत्र के पीतल नगरी निवासी राकेश कुमार के मोबाइल पर साइबर ठगों ने एपीके फाइल भेजी थी। फाइल डाउनलोड करने के बाद उनका मोबाइल हैक हो गया। इसके बाद ठगों ने उनके खाते से 77 हजार रुपये निकाल लिए। जांच में सामने आया कि यह रकम किसी बैंक खाते में ट्रांसफर नहीं की गई, बल्कि सीधे ऑनलाइन शॉपिंग में खर्च कर दी गई। ठगों ने इस रकम से इन्वर्टर, बैटरी और अन्य सामान खरीदा।

इसी तरह मझोला क्षेत्र के बुद्धि विहार निवासी हर्षवर्धन भी साइबर ठगी का शिकार हुए। ठगों ने उनका मोबाइल हैक कर खाते से 53 हजार रुपये निकाल लिए। पीड़ित ने तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और साइबर पुलिस को जानकारी दी। जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों ने पूरी रकम से ऑनलाइन खरीदारी कर ली थी।

साइबर ठग अब सामान की डिलीवरी के लिए भी बेहद सावधानी बरत रहे हैं। वे अक्सर दूसरे राज्यों जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल में ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं। इससे पुलिस को डिलीवरी लोकेशन तक पहुंचने में समय लग जाता है। जब तक पुलिस कार्रवाई शुरू करती है, तब तक ठगों के साथी सामान लेकर गायब हो जाते हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोगों को साइबर ठगी से बचने के लिए ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध एप को डाउनलोड नहीं करना चाहिए। साथ ही मोबाइल में बैंकिंग से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर देनी चाहिए।

साइबर अपराधी लगातार नए तरीके खोज रहे हैं, ऐसे में लोगों की जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।

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