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उत्तर प्रदेश
काशी के घाटों पर श्राद्ध कर्म, पिशाचमोचन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
nidhi
27 Sept 2026 1:04 PM IST

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काशी में श्राद्ध की आस्था
वाराणसी: धर्म और आस्था की नगरी काशी में श्राद्ध के अवसर पर पितरों के प्रति श्रद्धा का अनूठा नजारा देखने को मिला। पितृ ऋण से मुक्ति और पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों से लेकर पिशाचमोचन तक पहुंचे। लोगों ने विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर अपने पूर्वजों को याद किया।
सुबह से ही काशी के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की मौजूदगी दिखाई दी। हाथों में पूजन सामग्री लेकर पहुंचे लोगों ने गंगा स्नान के बाद अपने पितरों के निमित्त तर्पण किया। घाटों पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्राद्ध कर्म संपन्न कराए गए। परिवारों ने अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनकी आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। श्राद्ध का हिंदू धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक कर्मों से पितरों को तृप्ति मिलती है। इसी आस्था के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं और अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
काशी के प्रमुख गंगा घाटों के साथ पिशाचमोचन कुंड पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। पिशाचमोचन को पितृ कर्म से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में माना जाता है। यहां श्रद्धालुओं ने पुरोहितों के मार्गदर्शन में विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण किया। किसी ने अपने माता-पिता की स्मृति में कर्मकांड किया तो किसी ने परिवार की कई पीढ़ियों के पूर्वजों को याद करते हुए जल अर्पित किया।
घाटों पर सुबह से मंत्रों की आवाज और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने जल, तिल और अन्य पूजन सामग्री के माध्यम से अपने पितरों का तर्पण किया। कई परिवार एक साथ घाटों पर पहुंचे और परंपरा के अनुसार पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी। श्रद्धालुओं का कहना है कि श्राद्ध केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। परिवार की वर्तमान पीढ़ी अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनसे मिले संस्कार और विरासत के प्रति श्रद्धा व्यक्त करती है।
काशी में गंगा तट पर श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यही वजह है कि पितृ कर्म के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। गंगा घाटों से लेकर पिशाचमोचन तक धार्मिक अनुष्ठानों का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने पितरों के नाम से जल अर्पित करने के साथ परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। काशी में श्राद्ध के अवसर पर दिखाई देने वाली यह आस्था पूर्वजों और वर्तमान पीढ़ी के बीच धार्मिक एवं पारिवारिक परंपराओं के गहरे संबंध को दर्शाती है।
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