उत्तर प्रदेश

कसारी मसारी में आबान का जनाजा बेकाबू हुई भीड़ उमर और अली कड़ी सुरक्षा में पहुंचे

Ratna Netam
8 Aug 2026 6:26 PM IST
कसारी मसारी में आबान का जनाजा बेकाबू हुई भीड़  उमर और अली कड़ी सुरक्षा में पहुंचे
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प्रयागराज : शनिवार को माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद के जनाजे में हजारों की संख्या में लोग जुटे। भीड़ बढ़ने के साथ ही हालात कुछ समय के लिए बेकाबू हो गए और लोगों ने पुलिस की ओर से लगाई गई बैरिकेडिंग तक तोड़ दी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने कसारी-मसारी कब्रिस्तान में लोगों की एंट्री रोक दी। इसी दौरान लखनऊ जेल से पुलिस सुरक्षा में अतीक के बड़े बेटे उमर के पहुंचते ही उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। अचानक बढ़ी भीड़ के कारण मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पुलिसकर्मियों ने किसी तरह लोगों को नियंत्रित किया।
आबान को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में उसके पिता अतीक अहमद की कब्र के पास दफनाया जाना तय था। इसी कब्रिस्तान में अतीक के पिता फिरोज अहमद, भाई अशरफ और बेटे असद की कब्र भी मौजूद है। आबान की मौत के बाद परिवार के लोगों ने अंतिम संस्कार की तैयारियां कीं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कब्रिस्तान के आसपास पुलिस की भारी तैनाती की गई। बाहर कई स्तरों पर बैरिकेडिंग लगाई गई थी। आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई।
आबान के जनाजे में शामिल होने के लिए अतीक का दूसरा बेटा अली अहमद भी झांसी जेल से प्रयागराज पहुंचा। अली को करीब 30 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में लगभग 400 किलोमीटर की दूरी तय कर लाया गया। सुरक्षा कारणों से पुलिस वैन पर पर्दे लगाए गए थे, ताकि उसका चेहरा बाहर से दिखाई न दे। अली के प्रयागराज पहुंचने के बाद पुलिस ने उसे भी निर्धारित सुरक्षा घेरे में रखा।
वहीं, लखनऊ जेल से अतीक के बड़े बेटे उमर को भी पुलिस सुरक्षा में प्रयागराज लाया गया। उमर के साथ करीब 20 पुलिसकर्मी मौजूद रहे। आबान के जनाजे में शामिल होने के लिए दोनों भाइयों को कस्टडी पैरोल मिली थी। बताया गया कि दोनों भाइयों को कई वर्षों बाद पहली बार इस तरह परिवार के बीच आने की अनुमति मिली है। हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत उमर और अली की अपने छोटे भाई अहजम तथा बुआ परवीन कुरैशी से करीब एक घंटे तक मुलाकात कराई जानी थी। इसके लिए कब्रिस्तान के पास स्थित एक मस्जिद में स्थान तय किया गया था।
परिवार की ओर से आबान के शव को हटवा गांव से कुछ समय के लिए अतीक के पुराने घर कसारी-मसारी ले जाने की इच्छा भी जताई गई। हालांकि पुलिस शव को सीधे गांव से कब्रिस्तान ले जाने के पक्ष में थी। इस मुद्दे को लेकर परिवार और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत चलती रही। प्रशासन की प्राथमिकता सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोकना रही।
आबान के जनाजे के दौरान अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन को लेकर भी चर्चाएं होती रहीं। आबान की सड़क हादसे में मौत के बाद जब उसका शव हटवा गांव पहुंचा था, तभी यह चर्चा फैल गई थी कि शाइस्ता अपने बेटे का अंतिम दीदार करने के लिए वहां पहुंची थी। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने शाइस्ता के वहां पहुंचने की पुष्टि नहीं की और ऐसी चर्चाओं को अफवाह बताया। शाइस्ता लंबे समय से फरार है और उमेश पाल हत्याकांड के मामले में पुलिस को उसकी तलाश है।
आबान की मौत से अतीक परिवार को एक और बड़ा झटका लगा है। परिवार के सबसे छोटे बेटे की असामयिक मौत के बाद उसके दोनों जेल में बंद भाइयों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी गई। हाईकोर्ट ने मानवीय आधार पर दोनों को सशर्त कस्टडी पैरोल दी थी। पैरोल के दौरान उन्हें मीडिया से बातचीत करने और किसी सार्वजनिक सभा या जुलूस में शामिल होने की अनुमति नहीं थी। पुलिस को दोनों की सुरक्षा और आवाजाही की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी।
जनाजे में उमड़ी भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को नियंत्रित रखना रही। उमर के पहुंचते ही लोगों का उसे देखने के लिए आगे बढ़ना इसी चुनौती का उदाहरण रहा। बैरिकेडिंग टूटने के बाद पुलिस ने तत्काल लोगों की आवाजाही सीमित की और कब्रिस्तान में प्रवेश रोक दिया। इसके बावजूद परिवार के सदस्यों और निर्धारित लोगों को धार्मिक रस्मों में शामिल होने की व्यवस्था की गई।
आबान को उसके पिता और परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों की कब्रों के पास सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की प्रक्रिया के दौरान भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहीं। पूरे घटनाक्रम में पुलिस की निगरानी बनी रही और किसी भी संभावित विवाद या भीड़ के दोबारा बेकाबू होने से रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।
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