उत्तर प्रदेश

12 करोड़ की मरम्मत के दो महीने बाद शास्त्री पुल में दरार

Kavita2
14 Sept 2026 3:29 PM IST
12 करोड़ की मरम्मत के दो महीने बाद शास्त्री पुल में दरार
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प्रयागराज। गंगा नदी पर बने शास्त्री पुल की मजबूती और हाल में कराए गए मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब दो महीने पहले लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से पुल का मरम्मत कार्य पूरा कराया गया था, लेकिन अब दारागंज से झूंसी की ओर जाने वाली लेन में कई स्थानों पर तकनीकी खामियां सामने आई हैं। पिलर संख्या 22 के पास एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार दिखाई दी है, जबकि पिलर संख्या 45, 35, 15 और आठ के बेलन खिसकने की बात सामने आई है।

बेलन खिसकने के कारण पुल की सड़क पांच स्थानों पर दब गई है। इससे सड़क की सतह असमान हो गई और वाहनों को झटके लगने लगे। समस्या की जानकारी मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग ने सोमवार से प्रभावित स्थानों पर मरम्मत का काम शुरू करा दिया। विभाग की टीम क्षतिग्रस्त हिस्सों की जांच करने के साथ सड़क को दोबारा समतल करने और खिसके हुए उपकरणों को ठीक करने में जुटी है।

शास्त्री पुल प्रयागराज को झूंसी के साथ पूर्वांचल के कई जिलों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। पुल पर प्रतिदिन करीब 50 से 60 हजार छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है। इनमें कार, दोपहिया वाहन, बस, ट्रक और डंपर शामिल हैं। बड़ी संख्या में भारी तथा कथित रूप से ओवरलोड वाहन भी पुल से गुजरते हैं। ऐसे में सड़क दबने और एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार आने से यातायात सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है।

दो माह पहले पूरा हुआ था काम

बताया जा रहा है कि शास्त्री पुल की दारागंज से झूंसी जाने वाली लेन पर मरम्मत के लिए जून और जुलाई के दौरान यातायात प्रभावित किया गया था। लगभग 43 दिनों तक चले काम के दौरान यातायात संभालने के लिए पुलिसकर्मियों की अतिरिक्त तैनाती भी की गई थी। पुल का काम पूरा होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि लंबे समय तक सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। मरम्मत के कुछ समय बाद ही खामियां सामने आने से कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मरम्मत के समय एक लेन बंद रखने तथा अतिरिक्त पुलिस बल लगाने की योजना की जानकारी भी सामने आई थी।

स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों का कहना है कि सड़क के दबे हुए हिस्सों पर अचानक झटका लगने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ सकता है। रात के समय या तेज गति से आते हुए सड़क की असमान सतह का अंदाजा नहीं लगने पर दुर्घटना की आशंका रहती है। वाहन चालकों ने मांग की है कि मरम्मत पूरी होने तक प्रभावित स्थानों पर स्पष्ट चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर और बैरिकेड लगाए जाएं।

एक्सपेंशन ज्वाइंट की अहम भूमिका

पुलों में एक्सपेंशन ज्वाइंट तापमान में बदलाव, वाहनों के दबाव और कंपन के कारण संरचना में होने वाले मामूली फैलाव तथा सिकुड़न को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इन ज्वाइंटों में खराबी आने पर वाहन गुजरते समय तेज आवाज, झटका या सड़क की सतह में असमानता महसूस हो सकती है। वहीं, पिलरों के पास लगे बेलन या बेयरिंग पुल के ऊपरी हिस्से का भार संभालने और उसकी नियंत्रित गतिविधि में सहायता करते हैं।

हालांकि, शास्त्री पुल पर सामने आई खराबी का वास्तविक कारण विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। केवल भारी वाहनों या ओवरलोडिंग को ही खामी का कारण मानना जल्दबाजी होगी। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, बेलन और एक्सपेंशन ज्वाइंट की फिटिंग, काम के दौरान तकनीकी मानकों का पालन, बारिश तथा लगातार पड़ने वाले यातायात भार जैसे सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।

ओवरलोड वाहनों से बढ़ रहा दबाव

शास्त्री पुल से बड़ी संख्या में डंपर और मालवाहक वाहन गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इनमें से कई वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलते हैं। ओवरलोड वाहनों के लगातार गुजरने से पुल और सड़क पर सामान्य वाहनों की तुलना में अधिक दबाव पड़ता है। यदि भार नियंत्रण और वाहनों की नियमित जांच नहीं होती तो मरम्मत के बावजूद सड़क तथा पुल के उपकरण जल्दी प्रभावित हो सकते हैं।

लोगों ने पुल के दोनों छोर पर भारी वाहनों की जांच कराने और ओवरलोडिंग के खिलाफ नियमित अभियान चलाने की मांग की है। इसके साथ ही व्यस्त समय में भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने का सुझाव भी दिया गया है। उनका कहना है कि केवल सड़क की सतह की मरम्मत कर देना पर्याप्त नहीं है। खामी के मूल कारण का पता लगाकर स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच की मांग

करोड़ों रुपये खर्च होने के दो महीने बाद ही दरार और सड़क धंसने की शिकायतों ने विभागीय निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लोगों का कहना है कि मरम्मत में इस्तेमाल सामग्री, तकनीकी मानकों और भुगतान से पहले किए गए गुणवत्ता परीक्षण का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। यदि काम में कोई लापरवाही मिली तो संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

फिलहाल लोक निर्माण विभाग की ओर से प्रभावित स्थानों पर सुधार कार्य कराया जा रहा है। यात्रियों को मरम्मत वाले हिस्सों में धीमी गति से वाहन चलाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। विभाग के सामने चुनौती केवल दरार भरने या सड़क समतल करने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि व्यस्त शास्त्री पुल पर दोबारा ऐसी खामी न उभरे। हजारों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण पुल की विस्तृत संरचनात्मक जांच और नियमित निगरानी बेहद जरूरी मानी जा रही है।

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