उत्तर प्रदेश

पशु अवशेषों के कारोबार पर शिकंजे की तैयारी, रामपुर रोड के 17 ठिकानों की जांच शुरू

nidhi
14 Oct 2026 9:41 AM IST
पशु अवशेषों के कारोबार पर शिकंजे की तैयारी, रामपुर रोड के 17 ठिकानों की जांच शुरू
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हापुड़ : रामपुर रोड और आसपास पशु अवशेषों के अवैध कारोबार की जांच शुरू हो गई है। क्षेत्र में 17 स्थान चिह्नित कर उनकी सूची उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। खुले में अवशेष सुखाने से आठ कॉलोनियों के लोग दुर्गंध से परेशान हैं। कारोबार को संरक्षण मिलने तथा इसकी आड़ में अवैध कटान और पशु चोरी होने के आरोप भी हैं, जिनकी पुष्टि जांच में होनी है। जिलाधिकारी कविता मीना ने बिना लाइसेंस तथा नगर पालिका और प्रदूषण विभाग की एनओसी के संचालन रोकने के निर्देश दिए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता विपुल कुमार के मुताबिक, निरीक्षण के बाद संबंधित विभागों से समन्वय किया जा रहा है।
रामपुर रोड पर पशु अवशेषों से परेशानी का मामला नया नहीं है। जुलाई 2026 में भी खुले मैदानों और खंडहरनुमा भवनों में अवशेष सुखाए जाने की शिकायत सामने आई थी। उस समय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर पालिका और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई की तैयारी हुई थी। हालांकि, मौके पर पहुंची टीम को पुलिस बल का इंतजार करना पड़ा और कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
जुलाई के घटनाक्रम में टीम के पहुंचने तक अधिकांश अवशेष हटाए जा चुके थे। अधिकारियों को उन्हें आसपास दूसरे स्थानों पर रखने की सूचना मिली थी। संदिग्ध परिसर का दरवाजा बंद मिलने और दूसरे स्थान तक पहुंचने में परेशानी होने से जांच प्रभावित हुई। नगर पालिका से बुलडोजर और अन्य संसाधन मांगे गए, लेकिन उन्हें उपलब्ध कराने में भी देरी हुई। उस दिन देर शाम तक किसी आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हो पाया था।
स्थानीय लोगों ने तब आरोप लगाया था कि बार-बार शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। जिलाधिकारी ने विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब कर जिम्मेदार विभागों से जवाब मांगा था। संबंधित स्लॉटर हाउस संचालक ने खुले में पड़े अवशेषों से अपना संबंध होने से इनकार किया था। इससे पहले जून 2025 में भी रामपुर रोड और बुलंदशहर रोड पर दुर्गंध फैलने की शिकायत पर नगर पालिका की टीम पहुंची थी। निरीक्षण के दौरान एक अस्थायी टीन शेड के नीचे पशु अवशेष मिले थे। टीम ने उन्हें हटवाकर जमीन में गड्ढा खोदकर दबवाया था। उस समय संबंधित संचालक से स्पष्टीकरण मांगने और पुलिस को तहरीर देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
तत्कालीन अधिशासी अधिकारी इंद्रपाल सिंह ने बताया था कि गोदाम संचालक खुले में अवशेष सुखा रहा था। शिकायत मिलने पर निरीक्षण किया गया और नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई। उस रिपोर्ट में रामपुर रोड पर चमड़ा रखने तथा पशु अवशेषों के कई गोदाम होने का भी उल्लेख था। नगर पालिका लंबे समय से ऐसे कारोबार के लिए एनओसी जारी नहीं कर रही थी, फिर भी गतिविधियां चलने की शिकायतें थीं। अप्रैल 2025 में भी एसडीएम सदर तक शिकायत पहुंचने के बाद नगर पालिका की टीम पुलिस बल के साथ रामपुर रोड के गोदामों की जांच करने गई थी। एक परिसर में पशु अवशेष मिलने पर उन्हें मौके पर दफन कराया गया था। जांच के दौरान कर्मचारियों और संचालक से अनापत्ति प्रमाणपत्र तथा अन्य दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन वे तत्काल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके थे।
उस समय आसपास के किसानों ने खेतों में अवशेष पड़े रहने पर नाराजगी जताई थी। स्थानीय लोगों का कहना था कि सड़क किनारे गंदगी और दुर्गंध के कारण गुजरना मुश्किल होता है। विशेष रूप से इस मार्ग से आने-जाने वाले ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ती थी। नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ने मानकों के विपरीत चल रहे गोदामों को जांच के बाद नोटिस देने की बात कही थी। एसडीएम सदर ने भी पुष्टि की थी कि सूचना मिलने पर पालिका की टीम को पुलिस बल के साथ भेजा गया है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार है। पुराने निरीक्षणों और शिकायतों का यह सिलसिला बताता है कि रामपुर रोड की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। Hindustan
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