उत्तर प्रदेश

मिलावटी दूध और डेयरी उत्पादों पर सख्ती, यूपी में एनालॉग पनीर-घी-खोया की बिक्री पर रोक

Kavita2
18 Aug 2026 5:10 PM IST
मिलावटी दूध और डेयरी उत्पादों पर सख्ती, यूपी में एनालॉग पनीर-घी-खोया की बिक्री पर रोक
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लखनऊ। अगर आप दूध, पनीर, घी, खोया या अन्य डेयरी उत्पाद खरीद रहे हैं तो सावधानी बरतने की जरूरत है। बाजार में मिलावटी और नकली डेयरी उत्पादों की शिकायतों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सरकार ने एनालॉग डेयरी उत्पादों यानी ऐसे उत्पाद जो शुद्ध दूध से तैयार नहीं होते, उनके निर्माण, भंडारण और खुली बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।

सरकार का कहना है कि शुद्ध दूध से बने उत्पादों की जगह बिना स्पष्ट जानकारी दिए एनालॉग उत्पादों की बिक्री करना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। इस तरह के उत्पादों से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी आदेश के अनुसार, पनीर, घी, खोया, क्रीम और छेना जैसे डेयरी उत्पादों में मिलावट या नकली सामग्री पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस निलंबित किए जा सकते हैं। इसके अलावा उत्पादों को जब्त कर नष्ट करने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हालांकि, सरकार की सख्ती के बावजूद कई इलाकों में मिलावटी दूध और डेयरी उत्पादों की बिक्री जारी होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार में कम कीमत पर मिलने वाले दूध, पनीर और खोया की गुणवत्ता को लेकर अक्सर संदेह बना रहता है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर दूध और डेयरी उत्पादों के नमूने लिए जाते हैं। जांच में कई बार मिलावट की पुष्टि भी होती है। इसके बावजूद कुछ दुकानदार नियमों को नजरअंदाज कर ग्राहकों को ऐसे उत्पाद बेच रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, एनालॉग डेयरी उत्पादों में दूध के प्राकृतिक तत्वों की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च, सिंथेटिक सामग्री या अन्य पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पाद देखने में असली जैसे लग सकते हैं, लेकिन पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से नुकसानदायक हो सकते हैं।

मिलावटी दूध या डेयरी उत्पादों के सेवन से पेट संबंधी समस्याएं, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य परेशानियां हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है।

सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बाजारों में नियमित निरीक्षण किया जाए और संदिग्ध उत्पादों की जांच कराई जाए। खासतौर पर त्योहारों और अधिक मांग वाले समय में मिलावट रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो। इसके लिए दुकानदारों को भी खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है।

अधिकारियों का कहना है कि किसी भी खाद्य प्रतिष्ठान में यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बिना लाइसेंस या गलत जानकारी के साथ डेयरी उत्पाद बेचने वालों पर भी नजर रखी जा रही है।

ग्राहकों को भी सलाह दी जा रही है कि वे दूध और डेयरी उत्पाद खरीदते समय सावधानी बरतें। बिना पैकिंग वाले या संदिग्ध उत्पादों से बचें और गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर शिकायत करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी कार्रवाई से ही मिलावट को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए उपभोक्ताओं की जागरूकता और दुकानदारों की जिम्मेदारी भी जरूरी है।

उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद डेयरी कारोबारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। अब खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और जांच अभियान के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि बाजार में केवल सुरक्षित और मानक के अनुरूप उत्पाद ही बिकें।

फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। मिलावटी डेयरी उत्पाद बेचने वालों पर लाइसेंस कार्रवाई से लेकर कानूनी कार्रवाई तक की जाएगी।

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