उत्तर प्रदेश

एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार खतरा बढ़ा

Ratna Netam
10 Aug 2026 9:15 PM IST
एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार खतरा बढ़ा
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे इन दिनों सड़क निर्माण और रखरखाव की खामियों को लेकर सवालों के घेरे में है। एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह सामने आ रही दरारें, उखड़ती डामर की परत, क्षतिग्रस्त डिवाइडर, एक्सपेंशन ज्वाइंट में आई दरार और जलभराव की स्थिति ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रविवार को हुई बारिश के बाद सोमवार को एक्सप्रेसवे की स्थिति और खराब नजर आई। कई हिस्सों में पानी की निकासी ठीक नहीं होने के कारण सड़क पर जलभराव जैसी स्थिति बनी रही।सबसे गंभीर स्थिति कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर किलोमीटर 30 के आसपास सामने आई। यहां एक्सपेंशन ज्वाइंट में लंबी दरार दिखाई दी। सड़क निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार एक्सपेंशन ज्वाइंट किसी भी पुल या सड़क संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। तापमान में बदलाव और यातायात के दबाव के कारण सड़क की संरचना में होने वाले फैलाव और सिकुड़न को नियंत्रित करने में इसकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में एक्सपेंशन ज्वाइंट में आई दरार को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई तो दरार बढ़ सकती है और आसपास की सड़क संरचना पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसके अलावा इसी क्षेत्र के आसपास डिवाइडर में भी दरार दिखाई दी है। सड़क किनारे लगे क्रैश बैरियर की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। किसी वाहन के अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराने की स्थिति में पहले से कमजोर संरचना को अतिरिक्त नुकसान पहुंच सकता है और हादसे की गंभीरता बढ़ सकती है।किलोमीटर 30.1 के आसपास आरसीसी सीमेंट से बने डिवाइडर में बीच से दरार दिखाई दी। इसका असर सड़क की सतह पर भी नजर आया। डिवाइडर के नीचे सड़क पर दरार आने से यह सवाल उठ रहा है कि कहीं सड़क की ऊपरी परत के साथ-साथ उसके नीचे की संरचना भी दबाव में तो नहीं है। लगातार भारी वाहनों की आवाजाही और बारिश के पानी की निकासी की समस्या इस स्थिति को और गंभीर बना सकती है।

एक्सप्रेसवे पर मरम्मत कार्य की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। किलोमीटर 63.8 और 63.9 के आसपास सड़क पर दरार और गड्ढे जैसी स्थिति फिर दिखाई दी। बताया गया कि शनिवार को ही इस हिस्से में मरम्मत का काम कराया गया था, लेकिन करीब 48 घंटे के भीतर मरम्मत वाले हिस्से की डामर की परत दोबारा उखड़ती नजर आई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मरम्मत के लिए इस्तेमाल की जा रही सामग्री और तकनीक कितनी प्रभावी है।बारिश के बाद एक्सप्रेसवे की समस्या का एक बड़ा कारण ड्रेनेज सिस्टम की खामी भी सामने आई है। सड़क से बारिश के पानी की पर्याप्त निकासी नहीं होने के कारण कई जगह पानी जमा हो रहा है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से सड़क की ऊपरी परत के साथ-साथ नीचे की मिट्टी और संरचना पर भी असर पड़ सकता है। इससे सड़क के धंसने और गड्ढे बनने की आशंका बढ़ जाती है।

ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने के लिए अब किलोमीटर 57.5 के आसपास काम कराया जा रहा है। यहां कर्मचारी ड्रिल मशीन की मदद से सड़क के किनारे छेद कर पानी की निकासी का रास्ता तैयार करते दिखाई दिए। कर्मचारियों के मुताबिक सड़क के आसपास पानी की निकासी नहीं होने के कारण यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। हालांकि सवाल यह है कि जिस एक्सप्रेसवे पर यातायात की सुविधा और तेज सफर का दावा किया गया था, वहां निर्माण के कुछ समय बाद ही पानी निकासी के लिए इस तरह के अस्थायी उपाय क्यों करने पड़ रहे हैं।लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सामने आ रही लगातार समस्याओं ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव व्यवस्था और जल निकासी की योजना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं छोटी दिखाई देने वाली दरारें और जलभराव भविष्य में बड़े हादसे की वजह न बन जाएं। जरूरत इस बात की है कि प्रभावित हिस्सों की केवल ऊपरी मरम्मत करने के बजाय सड़क की पूरी संरचना, एक्सपेंशन ज्वाइंट, डिवाइडर, क्रैश बैरियर और ड्रेनेज सिस्टम की तकनीकी जांच कराकर स्थायी समाधान किया जाए। एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा संबंधी खामियों को जल्द दूर करना बेहद जरूरी है।

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