उत्तर प्रदेश

राकेश मर्डर केस में अदालत सख्त, 8 दोषियों को आजीवन कारावास

Ratna Netam
4 Aug 2026 7:30 PM IST
राकेश मर्डर केस में अदालत सख्त, 8 दोषियों को आजीवन कारावास
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बिजनौर : वर्ष 2018 के चर्चित राकेश हत्याकांड में बिजनौर की जिला अदालत ने सात वर्षों बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए आठ आरोपियों को दोषी करार दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश लोकेश नागर की अदालत ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उन पर कुल 10 लाख 80 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि में से 9 लाख रुपये मृतक राकेश कुमार की पत्नी मंतोष देवी को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष जताया, जबकि पूरे कचहरी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
यह मामला स्योहारा थाना क्षेत्र के गांव राना नंगला निवासी राकेश कुमार की हत्या से जुड़ा है। 27 दिसंबर 2018 को राकेश कुमार की बेरखेड़ा के पास उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह बाइक से जा रहे थे। बाइक सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। मृतक की पत्नी मंतोष देवी की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि राकेश अपने भाई मुकेश की हत्या के मामले में लगातार अदालत में पैरवी कर रहे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार इसी रंजिश के चलते जेल में बंद कुख्यात अपराधी आदित्य राणा ने अपने साथियों के जरिए राकेश की हत्या की साजिश रची थी। जांच के दौरान पुलिस ने कई अहम साक्ष्य जुटाए और हत्या की साजिश से जुड़े आरोपियों की भूमिका का खुलासा किया। इसके बाद पुलिस ने कुल 13 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
मामले की सुनवाई कई वर्षों तक चली। अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाहों के बयान, तकनीकी साक्ष्य और अन्य सबूत पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने चंद्रवीर उर्फ बिट्टू, राबिन, जयवीर, शुभम, अक्षय, पीयूष, प्रदीप और सोनू को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी माना। अदालत ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए उन पर कुल 10 लाख 80 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जुर्माने की राशि में से 9 लाख रुपये मृतक की पत्नी मंतोष देवी को दिए जाएं, ताकि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता मिल सके। न्यायालय ने माना कि इस प्रकार के गंभीर अपराधों में पीड़ित परिवार को न्याय के साथ-साथ उचित मुआवजा मिलना भी आवश्यक है।
वहीं, सुनवाई के दौरान पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण अदालत ने तीन आरोपियों को बरी कर दिया। एक आरोपी राहुल की मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी थी, जबकि इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता आदित्य राणा वर्ष 2023 में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। उसके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही पहले ही समाप्त हो चुकी थी।
फैसले को देखते हुए कचहरी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। अदालत का फैसला सुनाए जाने के बाद पूरे परिसर में शांति बनी रही।
फैसले के बाद मृतक राकेश कुमार की पत्नी मंतोष देवी ने अदालत के निर्णय पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके पति की हत्या बेहद निर्मम तरीके से की गई थी और लंबे इंतजार के बाद उन्हें न्याय मिला है। उन्होंने अदालत और जांच एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस फैसले से उनके परिवार को राहत मिली है और उन्हें विश्वास है कि न्याय व्यवस्था पर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है। इस निर्णय को बिजनौर के चर्चित हत्याकांडों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला माना जा रहा है।
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