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यातायात तिराहे से डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा हटाने पर विवाद, AAP कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन

गोरखपुर। यातायात तिराहे पर स्थापित देश के प्रथम राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा को नगर निगम द्वारा शुक्रवार रात हटाए जाने के बाद शनिवार को विवाद खड़ा हो गया। प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं ने मौके पर प्रदर्शन किया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने प्रतिमा को तत्काल दोबारा स्थापित करने की मांग की।
प्रतिमा हटाए जाने की सूचना मिलने के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में AAP कार्यकर्ता यातायात तिराहे पर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने बिना किसी पूर्व सूचना के रात में कार्रवाई करते हुए प्रतिमा को हटा दिया और यातायात तिराहे को भी ध्वस्त कर दिया। उनका कहना था कि इतने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व्यक्तित्व की प्रतिमा को हटाने से पहले जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों को जानकारी दी जानी चाहिए थी।
रात में हटाई गई प्रतिमा
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, शुक्रवार रात नगर निगम की टीम ने यातायात तिराहे पर कार्रवाई की। इसी दौरान वहां स्थापित डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा को हटा दिया गया। शनिवार सुबह लोगों को जब इसकी जानकारी हुई तो क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई।
AAP कार्यकर्ताओं का कहना था कि प्रतिमा लंबे समय से तिराहे पर स्थापित थी और लोगों की भावनाएं उससे जुड़ी हुई हैं। ऐसे में रात के समय अचानक प्रतिमा हटाए जाने से लोगों में नाराजगी पैदा हुई है।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति होने के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान निर्माण की प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तित्व रहे हैं। ऐसे राष्ट्रीय नेता की प्रतिमा को हटाने की कार्रवाई को वे स्वीकार नहीं करेंगे।
AAP कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी
प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में AAP कार्यकर्ताओं ने मौके पर प्रदर्शन किया। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से प्रतिमा को तत्काल पुनः स्थापित करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने कार्रवाई से पहले न तो स्थानीय लोगों को सूचना दी और न ही उनसे बातचीत की। उनका कहना था कि यदि यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए तिराहे में बदलाव जरूरी था तो प्रतिमा को सम्मानजनक तरीके से किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता था।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए थी। उन्होंने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि आखिर किन परिस्थितियों में और किस आदेश के तहत प्रतिमा हटाई गई।
अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति
प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद नगर आयुक्त अजय जैन और एसपी सिटी निमिष पाटील मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे AAP कार्यकर्ताओं से बातचीत की और पूरे मामले की जानकारी ली।
अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की आपत्तियों को सुना और स्थिति को समझने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की भी कोशिश की।
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के बाद प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। कार्यकर्ताओं ने अपनी मांग अधिकारियों के सामने रखी और प्रतिमा को फिर से स्थापित करने की मांग दोहराई।
यातायात व्यवस्था में बदलाव का भी विरोध
AAP कार्यकर्ताओं ने केवल प्रतिमा हटाने पर ही आपत्ति नहीं जताई, बल्कि यातायात तिराहे को ध्वस्त किए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि नगर निगम ने रात में बिना पूर्व सूचना तिराहे को तोड़ने की कार्रवाई की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए यदि किसी स्थान पर निर्माण या पुनर्विकास किया जाना है तो उससे पहले लोगों को जानकारी देना जरूरी है। खासकर किसी सार्वजनिक स्थल पर स्थापित महापुरुष की प्रतिमा से जुड़ा निर्णय लेते समय प्रशासन को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
प्रतिमा के पुनर्स्थापन की मांग
प्रदर्शन के दौरान AAP कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी मुख्य मांग डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा को फिर से स्थापित करना है। उनका कहना था कि प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित किया जाए या नगर निगम यदि यातायात व्यवस्था के कारण वहां प्रतिमा नहीं रखना चाहता तो किसी सम्मानजनक और प्रमुख स्थान पर उसे स्थापित किया जाए।
कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से प्रतिमा हटाने के कारणों और कार्रवाई के आदेश को भी सार्वजनिक करने की मांग की।
प्रशासन के सामने चुनौती
प्रतिमा हटाने के मामले ने नगर निगम प्रशासन के सामने संवेदनशील स्थिति पैदा कर दी है। एक ओर शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़क के विकास से जुड़े काम जरूरी हो सकते हैं, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं से लोगों की भावनाएं जुड़ी होती हैं।
ऐसे में किसी भी बदलाव से पहले प्रशासन के लिए स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतिमा को हटाने के बाद उठे विरोध ने भी इसी मुद्दे को प्रमुखता से सामने ला दिया है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल नगर निगम और पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को समझा है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन प्रतिमा के पुनर्स्थापन को लेकर क्या निर्णय लेता है।
AAP कार्यकर्ताओं ने साफ किया है कि वे प्रतिमा हटाए जाने के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और उसे तत्काल दोबारा स्थापित करने की मांग पर कायम हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा हटाए जाने को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब नगर निगम के फैसले और उसके बाद की कार्रवाई पर केंद्रित हो गया है। स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति की स्मृति से जुड़ी प्रतिमा का सम्मान बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।





