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उत्तर प्रदेश
दूसरे राज्य में छापेमारी पर विवाद, अमरोहा कोर्ट की फटकार के बाद इंस्पेक्टर सस्पेंड
Rajeshwari Nishad
7 Nov 2026 5:52 PM IST

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अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में पुलिस की कार्यप्रणाली पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई है। वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दिए बिना दूसरे राज्य में छापेमारी और गिरफ्तारी करने के मामले में कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों की पुलिस रिमांड याचिका खारिज कर दी। वहीं, पुलिस की कार्रवाई में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर अवमानना की कार्रवाई के लिए मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने की संस्तुति की है। मामले में अमरोहा देहात के इंस्पेक्टर सुनील कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव ने यह कार्रवाई की है।
हत्या के प्रयास के मुकदमे से जुड़ा है मामला
पूरा मामला अमरोहा देहात थाने में दर्ज हत्या के प्रयास के मुकदमे से संबंधित है। जानकारी के अनुसार, मोहल्ला पुष्कर नगर निवासी कृष्णा उर्फ प्रतीक ने 15 अक्टूबर को विवेक उर्फ विक्रांत, मोहसिन पठान, शाकिब, अयान और निखिल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 14 अक्टूबर की रात पुरानी रंजिश को लेकर आरोपियों ने मारपीट की और तमंचे से फायरिंग कर जानलेवा हमला किया।मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी। इसी क्रम में पुलिस टीम ने उत्तराखंड पहुंचकर कार्रवाई की।
देहरादून से दो आरोपियों को किया था गिरफ्तार
पुलिस ने 3 नवंबर को उत्तराखंड के देहरादून स्थित क्लेमनटाउन इलाके से शाकिब और विवेक उर्फ विक्रांत को गिरफ्तार किया था।गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अमरोहा लाया गया। इसके बाद 5 नवंबर को पुलिस ने उन्हें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) डॉ. लकी की अदालत में पेश किया और पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग की।हालांकि, सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां उठाईं। उन्होंने अदालत को बताया कि दूसरे राज्य में गिरफ्तारी के दौरान आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया।इसके बाद अदालत ने पुलिस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और गिरफ्तारी की प्रक्रिया की जांच की।
कोर्ट ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पाई गंभीर खामियां
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने कई महत्वपूर्ण अनियमितताएं सामने आईं। अदालत ने पाया कि पुलिस टीम दूसरे राज्य में गिरफ्तारी करने पहुंची थी, लेकिन आवश्यक अनुमति और स्थानीय पुलिस को सूचना देने से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी।इसके अलावा आरोपियों को स्थानीय थाने में दाखिल कराने और वहां के मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से संबंधित निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए जाने के भी दस्तावेज नहीं मिले।अदालत ने यह भी पाया कि पुलिस टीम की रवानगी से संबंधित जनरल डायरी (GD) में उत्तराखंड जाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं था।गिरफ्तारी मेमो में भी कई कॉलम खाली पाए गए। इन कमियों को अदालत ने गंभीरता से लिया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
दोनों आरोपियों की पुलिस रिमांड याचिका खारिज
गिरफ्तारी की प्रक्रिया में सामने आई कमियों के बाद सीजेएम डॉ. लकी की अदालत ने शाकिब और विवेक उर्फ विक्रांत की पुलिस कस्टडी रिमांड याचिका खारिज कर दी।पुलिस आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन अदालत ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के पालन में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद रिमांड देने से इनकार कर दिया।अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए अवमानना की कार्रवाई के लिए मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने की संस्तुति भी की।
इंस्पेक्टर सुनील कुमार निलंबित
अदालत की नाराजगी और मामले में सामने आई अनियमितताओं के बाद अमरोहा के पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव ने देहात इंस्पेक्टर सुनील कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।इंस्पेक्टर पर उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने, महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने के आरोप सामने आए हैं।एसपी ने इस मामले में विभागीय जांच कराने के भी निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि दूसरे राज्य में छापेमारी करने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी क्यों नहीं दी गई और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ।पुलिस विभाग की ओर से यह भी जांच की जाएगी कि इस कार्रवाई में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों की क्या भूमिका रही।
दूसरे राज्य में गिरफ्तारी के लिए नियमों का पालन जरूरी
कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस को दूसरे राज्य में जाकर गिरफ्तारी करने के दौरान संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन करना होता है। स्थानीय पुलिस को सूचना देना, गिरफ्तारी का उचित रिकॉर्ड रखना और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना महत्वपूर्ण है।इसका उद्देश्य गिरफ्तारी की पारदर्शिता बनाए रखना और आरोपियों के कानूनी अधिकारों की रक्षा करना है।यदि पुलिस इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं करती है, तो गिरफ्तारी और उसके बाद की न्यायिक कार्रवाई पर सवाल उठ सकते हैं।अमरोहा के इस मामले में भी अदालत ने इन्हीं प्रक्रियात्मक कमियों को गंभीरता से लिया। कोर्ट की टिप्पणी से पुलिस विभाग में दूसरे राज्यों में कार्रवाई के दौरान नियमों के पालन की जिम्मेदारी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
विभागीय जांच से सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल इंस्पेक्टर सुनील कुमार को निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। वहीं, अदालत ने दोनों आरोपियों की पुलिस रिमांड खारिज कर दी है।अब जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि पुलिस टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दिए बिना उत्तराखंड में कार्रवाई क्यों की और गिरफ्तारी के दौरान आवश्यक दस्तावेज क्यों पूरे नहीं किए गए।इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की जवाबदेही और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
कुल मिलाकर, अमरोहा में दूसरे राज्य से दो आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में अदालत की सख्ती के बाद पुलिस विभाग को बड़ा झटका लगा है। दो आरोपियों की रिमांड याचिका खारिज होने और इंस्पेक्टर के निलंबन से साफ है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में छोटी दिखने वाली लापरवाही भी गंभीर कानूनी परिणाम पैदा कर सकती है।
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