उत्तर प्रदेश

Congress सांसदों को मेरठ में रोका, SSP कार्रवाई और न्याय की मांग तेज

Ratna Netam
13 July 2026 3:10 PM IST
Congress   सांसदों को मेरठ में रोका, SSP कार्रवाई और न्याय की मांग तेज
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Meerut मेरठ : बीए छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर मेरठ में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। सोमवार को पीड़ित परिवार से मिलने दिल्ली से मेरठ आ रहे कांग्रेस के सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर रोक दिया। प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने के बाद कांग्रेस नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच जमकर बहस हुई। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, सांसद इमरान मसूद, सांसद तनुज पुनिया, सांसद केएल शर्मा, राज्यसभा सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध, विधायक वीरेंद्र चौधरी, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव प्रदीप नरवाल और ओबीसी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद शामिल थे। सभी नेता ललिता गौतम के परिवार से मुलाकात कर उनका पक्ष जानने और न्याय की मांग को लेकर मेरठ पहुंच रहे थे।

टोल प्लाजा पर रोके जाने के बाद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ललिता गौतम की हत्या बेहद दुखद घटना है और मामले में पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके अलावा उन्होंने एसएसपी के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की।

कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारी का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और निलंबन की मांग की।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका मेरठ आने का उद्देश्य राजनीतिक प्रदर्शन करना नहीं बल्कि पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनकी स्थिति जानना और न्याय की मांग करना था। नेताओं ने कहा कि परिवार पिछले कई दिनों से न्याय की मांग कर रहा है और उनकी आवाज को सुना जाना चाहिए।

ओबीसी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम लोगों का भरोसा पुलिस व्यवस्था से कमजोर हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार और प्रदर्शनकारियों के साथ संवेदनशीलता से व्यवहार करने के बजाय सख्ती बरती गई।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी सरकार से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। वहीं, राज्यसभा सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने कहा कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होने और उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से पहुंच रहा था।

इसी बीच भारतीय किसान यूनियन (तोमर) ने भी ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। संगठन ने एडीजी कार्यालय पर पंचायत आयोजित करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिलना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

क्या है ललिता गौतम हत्याकांड

मेरठ के टीपीनगर थाना क्षेत्र की रहने वाली बीए तृतीय वर्ष की छात्रा ललिता गौतम 15 मई को परीक्षा देने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने उसी दिन उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 17 मई को रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव के गन्ने के खेत से उनका शव बरामद हुआ था।

घटना के बाद परिजनों ने गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था। पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर तीन युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकुश समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पुलिस का कहना है कि पूछताछ में मुख्य आरोपी ने पुराने परिचय और आपसी विवाद के चलते हत्या करने की बात स्वीकार की थी। हालांकि, पीड़ित परिवार लगातार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाता रहा है।

आठ जुलाई को मेरठ कलेक्ट्रेट के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान एसएसपी अविनाश पांडेय पर प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे। इसके बाद मामला और ज्यादा तूल पकड़ गया। एसएसपी ने वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि पुलिस ने केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की है और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फिलहाल कांग्रेस नेताओं के आरोपों और मांगों पर प्रशासन की ओर से कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने के कारणों को लेकर भी पुलिस के विस्तृत बयान का इंतजार है।

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