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मुकदमों में फंसी कंपनियां नहीं ले पाएंगी रेलवे प्रोजेक्ट

प्रयागराज। भारतीय रेलवे ने देशभर में चल रही विकास और यात्री सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने के लिए टेंडर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब ऐसी कंपनियों को रेलवे के बड़े प्रोजेक्ट नहीं दिए जाएंगे, जिनके खिलाफ पुराने विवाद या मुकदमे उनकी कुल संपत्ति यानी नेट वर्थ के 50 प्रतिशत से अधिक हैं।
रेलवे के इस फैसले का उद्देश्य उन ठेकेदारों पर शिकंजा कसना है, जो काम शुरू करने के बाद परियोजनाओं को बीच में छोड़ देते हैं या लंबे समय तक कानूनी विवादों में उलझाए रखते हैं। नए नियम लागू होने के बाद परियोजनाओं की गति बढ़ने और समय पर काम पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अब टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने वाली कंपनियों को अपने सभी पुराने विवादों, अदालतों में चल रहे मामलों और मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) से जुड़े मामलों की पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा। कंपनियों को अपनी वित्तीय स्थिति और कानूनी मामलों से जुड़ी पारदर्शी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी कंपनी की कुल संपत्ति के 50 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर विवाद या मुकदमे चल रहे हैं तो वह रेलवे के नए ठेके के लिए पात्र नहीं होगी। इससे आर्थिक और कानूनी रूप से जोखिम वाली कंपनियों को बड़े प्रोजेक्ट मिलने से रोका जा सकेगा।
रेलवे ने यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि कई बार ठेकेदारों की लापरवाही, विवाद और कानूनी अड़चनों के कारण महत्वपूर्ण परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती हैं। इससे न सिर्फ रेलवे को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं में भी देरी होती है।
इसके अलावा रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई ठेकेदार काम में सुस्ती दिखाता है या परियोजना को निर्धारित समय में पूरा नहीं करता है तो रेलवे प्रभावित हिस्से का अनुबंध समाप्त कर सकता है। इसके बाद बचा हुआ काम किसी अन्य एजेंसी या ठेकेदार से कराया जाएगा।
रेलवे के इस कदम से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा पर निगरानी बढ़ेगी। अधिकारियों का मानना है कि नए नियमों से केवल सक्षम और जिम्मेदार कंपनियां ही टेंडर प्रक्रिया में आगे आ पाएंगी।
रेलवे देशभर में नई रेल लाइनों, स्टेशन विकास, यात्री सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में समय पर परियोजनाओं का पूरा होना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में कंपनियों की वित्तीय स्थिति और कानूनी रिकॉर्ड की जांच बढ़ने से परियोजनाओं में देरी कम होगी। इससे रेलवे को बेहतर ठेकेदार चुनने में मदद मिलेगी और यात्रियों को समय पर नई सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
रेलवे का यह फैसला ठेकेदारों के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि काम में लापरवाही या देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। नए नियमों के बाद रेलवे परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।





