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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत स्वरोजगार का सपना देख रहे जिले के सैकड़ों युवाओं के कदम इन दिनों बैंक शाखाओं की चौखट पर थम गए हैं। शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना में बिना गारंटी और बिना ब्याज के पांच लाख रुपये तक ऋण देने का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई दे रही है। पात्र युवा महीनों से अपने आवेदन स्वीकृत होने का इंतजार कर रहे हैं।
योजना के तहत युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बैंकों में फाइलें लंबित रहने के कारण कई आवेदनों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इससे न केवल युवाओं की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि शासन के निर्धारित लक्ष्य भी धीमे पड़ते नजर आ रहे हैं।
स्वर्ण जयंती नगर निवासी राम खिलाड़ी इसका एक उदाहरण हैं। उन्होंने लगभग तीन महीने पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत आवेदन किया था। उनका कहना है कि उन्होंने बैंक और संबंधित कार्यालयों के कई चक्कर लगाए, लेकिन अभी तक उनके आवेदन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
इसी तरह कई अन्य युवा भी बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि योजना के प्रचार में तो इसे सरल और त्वरित प्रक्रिया बताया गया था, लेकिन वास्तविकता में दस्तावेजों की जांच और स्वीकृति प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है।
सूत्रों के अनुसार, बैंक शाखाओं में तकनीकी जांच, दस्तावेज सत्यापन और विभिन्न औपचारिकताओं के कारण फाइलें लंबित हैं। वहीं, कुछ मामलों में पात्रता मानकों को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसके चलते कई आवेदन महीनों से एक ही चरण में अटके हुए हैं।
योजना का उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, लेकिन देरी के कारण कई युवा निराश हो रहे हैं। कुछ युवाओं ने कहा कि अगर समय पर ऋण स्वीकृत नहीं हुआ तो वे अपने व्यवसाय की योजना को आगे बढ़ा नहीं पाएंगे।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि बैंक और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी के कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है। वहीं, युवाओं ने सरकार से मांग की है कि आवेदन प्रक्रिया को तेज किया जाए और लंबित फाइलों का जल्द निस्तारण किया जाए।
अधिकारियों का कहना है कि योजना को प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।
फिलहाल स्थिति यह है कि योजना का लाभ लेने की उम्मीद लगाए बैठे कई युवा बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने को मजबूर हैं और अपने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।





