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रामकथा में सीएम योगी का बड़ा संदेश, बताया रामराज्य का अर्थ

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज को सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श शासन की प्रेरणा देने वाला उदाहरण है। मुख्यमंत्री मंगलवार को पीलीभीत जिले के बीसलपुर क्षेत्र स्थित नूरानपुर गांव में गोरक्ष पीठ आश्रम के श्री शंकर मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। करीब 38 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने श्रीराम, रामायण, रामराज्य, सनातन संस्कृति और भारतीय समाज में आस्था के महत्व पर विस्तार से विचार रखे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी आस्था और सांस्कृतिक एकता है। देश में अलग-अलग भाषाएं, परंपराएं, पहनावे और रहन-सहन होने के बावजूद श्रद्धा और विश्वास लोगों को एक सूत्र में बांधते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की यही विशेषता उसे दुनिया के अन्य देशों से अलग पहचान देती है।
नूरानपुर स्थित आश्रम में ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ की पुण्य स्मृति में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया था। कथा के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संत, श्रद्धालु और स्थानीय लोग पहुंचे। मुख्यमंत्री के आगमन पर कार्यक्रम स्थल पर धार्मिक उत्साह का माहौल रहा।
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम कथा पंडाल में लिखे संदेश 'राम गाओ, आनंद पाओ' का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान की कथा सुनना और उनके आदर्शों को जीवन में उतारना व्यक्ति को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। धार्मिक कथाएं केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि उनके संदेश को अपने व्यवहार और कार्यों में अपनाने के लिए होती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में धार्मिक कथाओं को सुनने की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा की प्राचीन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी बड़ी संख्या में लोग एक स्थान पर एकत्र होकर धार्मिक कथाओं का श्रवण करते हैं। यह भारतीय समाज की आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रमाण है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम का चरित्र जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मार्गदर्शन करता है। उन्होंने भगवान राम को आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श राजा बताते हुए कहा कि उनके जीवन से कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, संयम और न्याय की प्रेरणा मिलती है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, रामायण का महत्व केवल एक धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं है। इसमें परिवार, समाज और शासन व्यवस्था से जुड़े ऐसे जीवनमूल्य मौजूद हैं, जो हर पीढ़ी के लिए उपयोगी हैं। भगवान श्रीराम का जीवन सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और मर्यादा का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने रामराज्य की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि आदर्श शासन वही है, जिसमें जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। शासन की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में उनकी सरकार तुष्टिकरण के बजाय संतुष्टिकरण की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने अपनी सरकार की विकास योजनाओं और धार्मिक स्थलों पर बढ़ाई गई सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा, सम्मान और विकास के अवसर उपलब्ध कराना है।
योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण और वहां हुए विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि को लेकर लंबे समय तक संघर्ष चला, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था कमजोर नहीं हुई। आज अयोध्या में भव्य मंदिर के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है।
उन्होंने अयोध्या में हुए बदलाव को धार्मिक आस्था और विकास के समन्वय का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जिस अयोध्या को लेकर विवाद और संघर्ष की चर्चा होती थी, आज वहां देश-दुनिया से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन और मां विंध्यवासिनी धाम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। जब किसी तीर्थस्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है, तो परिवहन, होटल, भोजन, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को भी आर्थिक अवसर मिलते हैं।
मुख्यमंत्री ने सनातन परंपरा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत की संस्कृति ने हमेशा समाज को सकारात्मक सोच और परस्पर सम्मान का संदेश दिया है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और इतिहास को समझने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा जैसे आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम हैं। जब परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर धार्मिक कथा सुनते हैं, तो उनमें संस्कारों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जीवन में सकारात्मक सोच का विशेष महत्व है। नकारात्मकता व्यक्ति को उसके उद्देश्य से भटका सकती है, जबकि श्रद्धा, विश्वास और अनुशासन उसे कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने की शक्ति देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने कथा व्यास संत अंजनी शरण का सम्मान किया और धार्मिक आयोजन से जुड़े संतों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विभिन्न मठ-मंदिरों से जुड़े संत, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में धार्मिक परंपराओं के साथ भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया गया।
नौ दिवसीय श्रीराम कथा के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन मुख्य रूप से श्रीराम के आदर्शों को आधुनिक समाज और शासन व्यवस्था से जोड़ने पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन हमें मर्यादा, न्याय और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री ने इस संदेश के साथ अपने विचार रखे कि श्रीराम के आदर्श केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को उन्हें अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए।





