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उत्तर प्रदेश
नवरात्र पर सीएम योगी का संदेश, बेटियों की शिक्षा और महिलाओं के सम्मान का लें संकल्प
nidhi
19 Oct 2026 9:26 AM IST

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सीएम योगी ने जनभागीदारी पर दिया जोर
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्र के अवसर पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि शक्ति की उपासना का उद्देश्य समाज के व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। प्रदेश की महिलाओं को भयमुक्त वातावरण, बेटियों को शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना इसी जिम्मेदारी का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने नवरात्र के संदेश को सामाजिक सहभागिता से जोड़ते हुए लोगों से महिला सशक्तीकरण में योगदान देने की अपील की।
मुख्यमंत्री के इस संदेश का केंद्र महिलाओं के जीवन में व्यावहारिक बदलाव लाना है। सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन एक-दूसरे से जुड़े विषय हैं। सुरक्षित वातावरण में शिक्षा और रोजगार तक पहुंच आसान होती है। शिक्षा तथा आर्थिक अवसर मिलने से महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। सम्मान का अर्थ परिवार, कार्यस्थल और सार्वजनिक जीवन में उनकी बात को महत्व देना भी है। इस दृष्टि से महिला सशक्तीकरण में सरकारी व्यवस्थाओं के साथ परिवारों, शिक्षण संस्थानों और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण बनती है।
नवरात्र के संदेश को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा
योगी आदित्यनाथ ने मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय को धर्म और न्याय की स्थापना का प्रतीक बताया। उन्होंने मां विंध्यवासिनी, मां पाटेश्वरी और मां शाकम्भरी जैसे शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं तथा युवाओं की भागीदारी का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, सांस्कृतिक विरासत के प्रति यह जुड़ाव समाज में सकारात्मक संकल्प का आधार बन सकता है।
उन्होंने लोगों से किसी महिला की सुरक्षा के लिए उसका साथ देने, किसी बालिका की पढ़ाई में सहयोग करने और किसी महिला को आत्मनिर्भर बनने में मदद करने का संकल्प लेने को कहा। उनके मुताबिक, विकसित उत्तर प्रदेश का लक्ष्य महिलाओं की प्रगति से जुड़ा है। इस अपील को रोजमर्रा के जीवन में कई स्तरों पर समझा जा सकता है। किसी छात्रा की पढ़ाई बीच में न छूटे, कामकाजी महिला को सम्मानजनक वातावरण मिले और परिवार में बेटियों की आकांक्षाओं को महत्व दिया जाए—ये सभी सामाजिक सहयोग के उदाहरण हैं। किसी महिला की परेशानी सुनना और उसे उपयुक्त सहायता तक पहुंचने में सहयोग देना भी इसी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
मिशन शक्ति और पुलिस में महिलाओं की भागीदारी
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2020 में शारदीय नवरात्र के दौरान शुरू किए गए मिशन शक्ति अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश पुलिस में 44 हजार से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं और पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने ऊदा देवी पासी, झलकारी बाई कोरी और रानी अवंतीबाई लोधी के नाम पर तीन महिला पीएसी बटालियन गठित किए जाने की जानकारी भी दी। मिशन शक्ति के मौजूदा चरण में सम्मान और सार्वजनिक भागीदारी से जुड़े कार्यक्रम भी हुए हैं।
15 अक्टूबर को प्रकाशित विवरण के अनुसार, प्रदेश पुलिस ने शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य सेवा, समाजसेवा और साहसिक कार्यों में योगदान देने वाली 4,696 महिलाओं तथा बालिकाओं को सम्मानित किया। इनमें मेधावी छात्राएं, खिलाड़ी, चिकित्सक, नर्स, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे। इसी अभियान में 6,572 महिला एनसीसी कैडेटों ने यातायात पुलिस के साथ वाहन संचालन व्यवस्था और सड़क सुरक्षा जागरूकता में भागीदारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 से 20 अक्टूबर तक चल रहे अभियान के दौरान ये गतिविधियां पुलिस कमिश्नरेट और जिलों में आयोजित की गईं। सार्वजनिक जिम्मेदारियों में छात्राओं की ऐसी भागीदारी नेतृत्व और नागरिक कर्तव्यों का अनुभव देने का माध्यम बन सकती है।
कन्या सुमंगला से जन्म और शिक्षा के चरणों पर सहायता
बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर देने के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कन्या सुमंगला योजना का भी उल्लेख किया। योजना के आधिकारिक विवरण के अनुसार, पात्र बालिकाओं को छह चरणों में कुल 25 हजार रुपये की सहायता देने का प्रावधान है। इसमें जन्म, टीकाकरण और शिक्षा के अलग-अलग पड़ाव शामिल हैं।
निर्धारित शर्तों के अनुसार जन्म पर पांच हजार रुपये, एक वर्ष के भीतर पूर्ण टीकाकरण पर दो हजार रुपये, पहली और छठी कक्षा में प्रवेश पर तीन-तीन हजार रुपये दिए जाते हैं। नौवीं कक्षा में प्रवेश पर पांच हजार रुपये तथा दसवीं या बारहवीं उत्तीर्ण कर स्नातक अथवा कम से कम दो वर्षीय डिप्लोमा में प्रवेश लेने पर सात हजार रुपये का प्रावधान है। योजना में परिवार का उत्तर प्रदेश का निवासी होना और वार्षिक पारिवारिक आय अधिकतम तीन लाख रुपये होना आवश्यक है। सामान्यतः परिवार की अधिकतम दो बालिकाओं को लाभ मिलता है। जुड़वा बालिकाओं और विधिक रूप से गोद ली गई बालिकाओं के संबंध में अलग प्रावधान भी हैं। इसलिए आवेदन करते समय परिवार की स्थिति के अनुरूप पात्रता और संबंधित चरण की शर्तें देखना जरूरी है।
आर्थिक स्वावलंबन के लिए समूहों और कौशल की भूमिका
महिलाओं की आत्मनिर्भरता के व्यापक संदर्भ में स्वयं सहायता समूह महत्वपूर्ण माध्यम हैं। केंद्र सरकार के ग्रामीण आजीविका संबंधी विवरण में बताया गया है कि ऐसे समूहों के साथ प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ता खेती, पशुपालन, उद्यम, बैंकिंग और वित्तीय साक्षरता में सहयोग करते हैं। कृषि सखी, पशु सखी और उद्योग सखी जैसी भूमिकाएं महिलाओं को स्थानीय स्तर पर सेवाएं तथा आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने से जुड़ी हैं। बैंकिंग कॉरिस्पॉन्डेंट सखी गांवों में खाते खोलने, जमा-निकासी और धन हस्तांतरण जैसी सेवाओं में मदद करती हैं। बैंक सखी समूहों को बैंक ऋण से जोड़ने में सहयोग करती हैं। राष्ट्रीय स्तर के इस ढांचे का उद्देश्य महिलाओं को योजनाओं की लाभार्थी बनने के साथ प्रशिक्षित सेवा प्रदाता और उद्यमी बनने के अवसर देना भी है।
मुख्यमंत्री की अपील इसी व्यापक सामाजिक लक्ष्य की ओर ध्यान दिलाती है। महिलाओं की प्रगति के लिए सहायता राशि के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, सुरक्षित आवागमन, बाजार तक पहुंच और सम्मानजनक व्यवहार आवश्यक हैं। इन क्षेत्रों में निरंतर सहयोग से बेटियों और महिलाओं को अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
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