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लखनऊ। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित होने वाला राज्यस्तरीय कार्यक्रम प्रदेश के बुनकरों और हथकरघा उद्योग से जुड़े कारीगरों के लिए विशेष महत्व रखेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकभवन सभागार में आयोजित संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर वे उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों और हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े शिल्पकारों को सम्मानित करेंगे तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को आर्थिक सहायता के चेक भी प्रदान करेंगे।
कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के उपलक्ष्य में किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के पारंपरिक हथकरघा उद्योग को प्रोत्साहन देना, बुनकरों के उत्कृष्ट कार्य को सम्मानित करना तथा इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना है। इस अवसर पर हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, बुनकर संगठन, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी भी उपस्थित रहेंगे।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान करेंगे। यह पुरस्कार उन बुनकरों और शिल्पकारों को दिया जाता है जिन्होंने पारंपरिक बुनाई कला, डिजाइन नवाचार, उत्कृष्ट उत्पाद निर्माण और हथकरघा उद्योग के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। पुरस्कार के माध्यम से सरकार न केवल प्रतिभाशाली कारीगरों को सम्मानित करती है, बल्कि नई पीढ़ी को भी इस पारंपरिक कला से जुड़ने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करती है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना के लाभार्थियों को सहायता राशि के चेक वितरित करेंगे। इस योजना के तहत हथकरघा और पावरलूम इकाइयों के आधुनिकीकरण, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने तथा स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से बुनकरों की आय में वृद्धि करना और प्रदेश के वस्त्र उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री झलकारी बाई हथकरघा एवं पावरलूम विकास योजना के लाभार्थियों को भी चेक सौंपेंगे। यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर बुनकर परिवारों, महिला कारीगरों तथा छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के माध्यम से आधुनिक उपकरणों की खरीद, उत्पादन इकाइयों के विस्तार और रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख हथकरघा और वस्त्र उत्पादन राज्यों में शामिल है। वाराणसी की बनारसी साड़ी, मऊ के वस्त्र, टांडा की बुनाई, आजमगढ़, बाराबंकी और अन्य क्षेत्रों के पारंपरिक उत्पाद देश-विदेश में अपनी अलग पहचान रखते हैं। लाखों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हथकरघा उद्योग पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार इस क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए समय-समय पर विभिन्न योजनाओं और प्रोत्साहन कार्यक्रमों का संचालन कर रही है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का आयोजन हर वर्ष 7 अगस्त को भारतीय हथकरघा उद्योग के महत्व को रेखांकित करने और बुनकर समुदाय के योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से किया जाता है। इस अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बुनकरों को सम्मानित करने के साथ-साथ उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जाता है।
राज्य सरकार का कहना है कि हथकरघा और पावरलूम उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, रोजगार सृजन और पारंपरिक शिल्प को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी उद्देश्य से बुनकरों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, आधुनिक मशीनों की सुविधा, डिजाइन विकास, विपणन सहायता तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
समारोह के दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा योजनाओं की प्रगति, बुनकरों के लिए संचालित कल्याणकारी कार्यक्रमों तथा भविष्य की कार्ययोजनाओं की जानकारी भी प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इसके अलावा हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी और पारंपरिक वस्त्रों के प्रदर्शन के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध बुनकरी परंपरा को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस कार्यक्रम को प्रदेश के हथकरघा और पावरलूम क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुरस्कार वितरण और आर्थिक सहायता के माध्यम से जहां उत्कृष्ट बुनकरों का मनोबल बढ़ेगा, वहीं विभिन्न योजनाओं से मिलने वाली सहायता उद्योग के आधुनिकीकरण, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायक होगी। सरकार को उम्मीद है कि इन पहलों से उत्तर प्रदेश का हथकरघा उद्योग नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा और प्रदेश के पारंपरिक वस्त्रों की पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक मजबूत होगी।





