उत्तर प्रदेश

कानपुर नगर निगम में अवैध वसूली पर CM योगी सख्त

Kavita2
24 Aug 2026 9:12 AM IST
कानपुर नगर निगम में अवैध वसूली पर CM योगी सख्त
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कानपुर। कानपुर नगर निगम की परियोजनाओं में कथित तौर पर कई वर्षों से चल रहे अवैध वसूली के खेल की परतें अब खुलने लगी हैं। नगर निगम से जुड़े कार्यों और परियोजनाओं में वसूली की शिकायतों की गूंज लखनऊ तक पहुंचने के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को उठाते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ कर दिया कि अवैध वसूली और माफियागिरी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारी समय रहते प्रभावी कार्रवाई करें।

बताया जा रहा है कि कानपुर नगर निगम से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं में लंबे समय से कथित रूप से एक समानांतर ‘टैक्स’ व्यवस्था चलने की शिकायतें मिल रही थीं। आरोप है कि नगर निगम से संबंधित काम कराने वाले कुछ लोगों से अलग-अलग तरीके से पैसे की मांग की जाती थी। मामला लंबे समय तक स्थानीय स्तर पर ही चर्चा में रहा, लेकिन लगातार शिकायतें सामने आने के बाद इसकी जानकारी शासन तक पहुंच गई। इसके बाद लखनऊ से पूरे मामले पर सख्ती शुरू हो गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि वसूली और माफियागिरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का संकेत देते हुए कहा कि यदि उनके स्तर से कार्रवाई नहीं की गई तो शासन को अधिकारों को लेकर भी कठोर फैसला करना पड़ सकता है।

सीएम की सख्ती के बाद कानपुर में प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि कथित रूप से वसूली में शामिल लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने पर जोर दिया जा रहा है। यह पता लगाने की कोशिश भी की जा सकती है कि इस तरह की वसूली कितने समय से चल रही थी और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही है।

मामले में प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आ रही है। इससे अब तक बेखौफ होकर सक्रिय बताए जा रहे लोगों में भी खलबली मची हुई है। शासन का संदेश स्पष्ट है कि नगर निगम की किसी परियोजना या सरकारी व्यवस्था की आड़ में अवैध तरीके से धन की मांग करने वाले व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

नगर निगम में विकास कार्यों से लेकर निर्माण परियोजनाओं तक बड़ी संख्या में ठेकेदार, कर्मचारी और अन्य एजेंसियां जुड़ी रहती हैं। ऐसे में कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद पुराने कामकाज और शिकायतों की भी जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाने की होगी कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और यदि वसूली हुई है तो उसका नेटवर्क किस स्तर तक फैला हुआ है।

मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद अब स्थानीय अधिकारियों पर तेजी से कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है। शासन चाहता है कि केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई करके मामला खत्म न किया जाए, बल्कि यदि कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है तो उसकी पूरी कड़ी सामने लाई जाए। इसके लिए जरूरत पड़ने पर पुराने दस्तावेज, परियोजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड और प्राप्त शिकायतों की भी जांच की जा सकती है।

वहीं, इस पूरे मामले में अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के सामने पहले भी वसूली की शिकायत आई थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी भी जुटाई जा सकती है। मुख्यमंत्री के कड़े तेवरों से साफ है कि शासन केवल वसूली करने वालों पर ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई करने के मूड में है।

सीएम योगी आदित्यनाथ इससे पहले भी कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और माफियागिरी के मामलों में अधिकारियों को जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने के निर्देश देते रहे हैं। कानपुर नगर निगम से जुड़े इस मामले में भी उसी नीति के तहत कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के सक्रिय होने के बाद आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

फिलहाल नगर निगम की परियोजनाओं में कथित अवैध वसूली की शिकायतों ने शहर से लेकर लखनऊ तक हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप और सख्त संदेश के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर हैं। जांच और कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित वसूली का यह खेल कितना पुराना और कितना बड़ा था तथा इसमें किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

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