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उत्तर प्रदेश
सिंगापुर और जापान दौरे में जीवंत कर्मयोग का उदाहरण बने CM Yogi
SHIDDHANT
28 Feb 2026 10:59 PM IST

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Lucknow लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सिंगापुर और जापान का दौरा सिर्फ विदेशी दौरा भर नहीं था, बल्कि इस यात्रा ने दुनिया के सामने उनकी कर्मयोगी की छवि को और पुख्ता किया है। चार दिनों तक बिना थके, अनवरत और अदम्य ऊर्जा के साथ उद्यमियों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और उद्योग संस्थानों में भ्रमण के साथ उन्होंने भारतीय प्रवासियों के साथ संवाद किया। यह उनकी कर्मठता, अनुशासन और अपने राज्य के विकास के प्रति प्रतिबद्धता का बेमिसाल उदाहरण है। सीएम योगी की मेहनत रंग भी लाई और उद्यमियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश के प्रति जिस तरह उत्साह दिखाया, वह इस बात का प्रमाण है कि विश्व में यूपी को लेकर धारणा बदली है।
सीएम योगी का यह दौरा सामान्य नहीं था। सिंगापुर और जापान का समय भारत से क्रमशः ढाई और साढ़े तीन घंटे आगे है। लंबी विमान यात्रा के बाद समय के अनुकूलन की चुनौती भी थी, लेकिन मुख्यमंत्री के हाव-भाव और सक्रियता में कहीं इसका रंचमात्र भी असर देखने को नहीं मिला। सीएम योगी सुबह छह बजे सिंगापुर पहुंचे और महज ढाई घंटे बाद ही वहां भारत के राजदूत से मिले। इसके बाद बैठकों और औद्योगिक इकाइयों के भ्रमण और उद्योगपतियों से मिलने का सिलसिला शुरू हुआ, जो रात दस बजे रात्रिभोज के साथ समाप्त हुआ। दूसरे दिन भी सुबह पौने नौ बजे से ही मुख्यमंत्री सक्रिय हो गए और रात साढ़े आठ बजे तक वह ‘मिशन सिंगापुर’ पूरा कर चुके थे।
कोई और होता तो इतनी व्यस्तता के बाद शायद रात्रि विश्राम को प्राथमिकता देता, लेकिन सीएम योगी सिंगापुर से रात 10 बजे टोक्यो (जापान) के लिए रवाना हो गए। घंटों की थकाऊ यात्रा के बाद वह सुबह लगभग छह बजे टोक्यो के हानेडा हवाई अड्डे पहुंचे और 25 फरवरी को सवा नौ बजे मित्सुई कंपनी के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए तैयार थे। जापान में भी सीएम योगी ने बिना रुके, अनवरत ऊर्जा के साथ दो दिन तक दर्जनों उद्यमियों से मुलाकात की, रोड शो मे भाग लिया और फिर लंबी यात्रा के बाद 27 फरवरी को तड़के अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ लखनऊ एयरपोर्ट पर थे।
इस अथक मेहनत का परिणाम अब उत्तर प्रदेश के विकास में मील के पत्थर के रूप में सामने आया है। डेढ़ लाख करोड़ रुपये के एमओयू और ढाई लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आगे चलकर उत्तर प्रदेश का भविष्य बदलेंगे। यह इसलिए संभव हो सका क्योंकि मुख्यमंत्री ने हर क्षण को प्रदेश के विकास के लिए साधन के रूप में इस्तेमाल किया। राजनेताओं की विदेश यात्राओं में अक्सर शिष्टाचार भेंट और औपचारिकता भरे कार्यक्रम समय नष्ट कर देते हैं, लेकिन सीएम योगी के इस दौरे में हर बैठक का एजेंडा स्पष्ट था। उनके इस दौरे में कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, किसी दर्शनीय स्थल का भ्रमण नहीं, बस मिनट टू मिनट बैठकें, रोड शो और उन औद्योगिक संस्थानों का भ्रमण रहा, जिनके सहयोग से उत्तर प्रदेश के भविष्य को गढ़ा जा सके। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनाए जा सकें अर्थात औपचारिकताओं में न्यूनतम समय और परिणामों पर अधिकतम ध्यान।
इन चार दिनों में सीएम योगी जीवंत कर्मयोग का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरे। हालांकि उनका संपूर्ण जीवन स्वअनुशासन की मिसाल है। राजधानी लखनऊ में उनकी दिनचर्या ऐसी ही नियमबद्ध होती है। तड़के उठकर समाचार पत्रों के माध्यम से प्रदेश की गतिविधियों की जानकारी, उसके बाद जनता दर्शन में आम नागरिकों की समस्याओं को सुनना, अधिकारियों को निर्देश देना और फिर दिनभर बैठकों व कार्यक्रमों का सिलसिला और रात में विभागीय कार्यों की समीक्षा। गोरखपुर प्रवास में भी गोसेवा के बाद वह जनता दर्शन और फिर लगातार कार्यक्रमों में शामिल रहते हैं। हर दिन का उपयोग, हर क्षण का उपयोग। उनका पूरा व्यक्तित्व आध्यात्मिक साधना और प्रशासनिक दक्षता का संगम है। सादगीपूर्ण जीवन शैली और विकास का आधुनिक दृष्टिकोण उन्हें विशिष्ट बनाता है।
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