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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच 'घुसपैठिया' शब्द को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। अखिलेश यादव की ओर से उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड से आने वाले लोगों को लेकर की गई टिप्पणी पर मुख्यमंत्री धामी ने कड़ी नाराजगी जताई है। शनिवार, 24 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव का वीडियो साझा करते हुए धामी ने उनके बयान को उत्तराखंड के स्वाभिमान और राज्य आंदोलन के संघर्ष का अपमान बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। इस धरती ने देश को संत, सैनिक और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित अनेक महान व्यक्तित्व दिए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने अखिलेश यादव को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की याद भी दिलाई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोग उस दौर को नहीं भूले हैं, जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और राज्य आंदोलनकारियों पर गोलियां चली थीं। धामी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस से भी अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।
अखिलेश यादव के बयान पर मुख्यमंत्री का पलटवार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव की टिप्पणी को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और देश के प्रति समर्पण से जुड़ी है।
धामी के अनुसार, राज्य के लोगों ने देश की रक्षा और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में उन्हें घुसपैठिया कहना उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बयान है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने अलग राज्य के निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया था। इस संघर्ष में अनेक आंदोलनकारियों ने बलिदान दिया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य की जनता अपने इतिहास और संघर्ष का सम्मान करती है तथा उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियों को स्वीकार नहीं करेगी।
आखिर अखिलेश यादव ने क्या कहा था?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत के दौरान घुसपैठियों के मुद्दे पर भाजपा को निशाने पर लिया था।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए घुसपैठियों का मुद्दा उठाती है।
इसी बातचीत में उन्होंने उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड से आने वाले लोगों को लेकर विवादित टिप्पणी की।
अखिलेश ने कहा कि घुसपैठिया शब्द का अर्थ स्पष्ट होना चाहिए और किसी व्यक्ति की पहचान को राजनीतिक आरोपों का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने भारतीय संस्कृति, आपसी भाईचारे और सम्मान की बात भी कही। हालांकि, उत्तराखंड से जुड़े उनके बयान पर मुख्यमंत्री धामी ने आपत्ति जताई है।
रामपुर तिराहा कांड की दिलाई याद
मुख्यमंत्री धामी ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए 1994 के रामपुर तिराहा कांड का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब अलग उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में गोलियां चली थीं।
यह घटना उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण और पीड़ादायक मानी जाती है।
दो अक्टूबर 1994 को दिल्ली जा रहे राज्य आंदोलनकारियों को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा क्षेत्र में रोका गया था। इस दौरान पुलिस कार्रवाई में आंदोलनकारियों की मौत हुई थी और महिलाओं के साथ गंभीर अत्याचारों के आरोप भी सामने आए थे।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड के लोग उस संघर्ष और बलिदान को कभी नहीं भूल सकते।
पिता और पुत्र पर साधा राजनीतिक निशाना
मुख्यमंत्री धामी ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए मुलायम सिंह यादव के शासनकाल की घटनाओं को वर्तमान विवाद से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि पहले पिता के शासनकाल में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को पुलिस की गोलियों का सामना करना पड़ा और अब पुत्र उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कह रहे हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, उत्तराखंड की जनता ने अलग राज्य की मांग के लिए वर्षों तक संघर्ष किया और अनेक कठिनाइयों का सामना किया।
उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन से जुड़ा इतिहास लोगों की भावनाओं से गहराई से जुड़ा है।
ऐसे में राजनीतिक नेताओं को उत्तराखंड और उसके निवासियों के बारे में टिप्पणी करते समय संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
कांग्रेस से भी पूछा सवाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विवाद में कांग्रेस को भी घेरा है।
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या वह अपने राजनीतिक सहयोगी अखिलेश यादव की टिप्पणी से सहमत है।
धामी ने पूछा कि उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना कांग्रेस को स्वीकार है या नहीं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देवभूमि की जनता के सामने अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दल हैं।
ऐसे में धामी ने इस विवाद को केवल अखिलेश यादव तक सीमित रखने के बजाय कांग्रेस की राजनीतिक जिम्मेदारी से भी जोड़ दिया है।
हालांकि, इस विशेष टिप्पणी पर कांग्रेस की ओर से कोई पुष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उत्तराखंड की पहचान देवभूमि और वीरभूमि से जुड़ी
मुख्यमंत्री धामी ने अपने बयान में उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और सैन्य परंपरा का विशेष उल्लेख किया।
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, क्योंकि यहां केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थस्थल स्थित हैं।
इसके अलावा राज्य की सैन्य परंपरा भी बेहद समृद्ध है। बड़ी संख्या में उत्तराखंड के लोग भारतीय सशस्त्र बलों में सेवाएं देते रहे हैं।
जनरल बिपिन रावत, जनरल बीसी जोशी और अनेक वीर सैनिकों ने देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लोगों की राष्ट्रसेवा और वीरता की परंपरा को किसी राजनीतिक टिप्पणी से कमतर नहीं किया जा सकता।
2027 के चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में राज्य की राजनीति में विभिन्न दलों के बीच बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले से कई मुद्दों पर राजनीतिक टकराव चल रहा है।
अब अखिलेश यादव की टिप्पणी को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने विपक्षी गठबंधन पर भी सवाल खड़े किए हैं।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी भाजपा पर घुसपैठियों के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाती रही है।
दोनों पक्षों के बयानों से स्पष्ट है कि विवाद केवल एक शब्द तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें राज्य की पहचान, आंदोलन का इतिहास और राजनीतिक गठबंधन भी शामिल हो गए हैं।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन फिर चर्चा में
उत्तराखंड का गठन नौ नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग करके किया गया था।
अलग राज्य की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन चला था। पहाड़ी क्षेत्रों के विकास, प्रशासनिक आवश्यकताओं और क्षेत्रीय पहचान को लेकर आंदोलनकारियों ने व्यापक संघर्ष किया।
इस दौरान कई लोगों ने अपनी जान गंवाई और अनेक परिवार प्रभावित हुए।
रामपुर तिराहा कांड आज भी राज्य आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए संवेदनशील विषय है।
मुख्यमंत्री धामी की टिप्पणी के बाद एक बार फिर उत्तराखंड राज्य आंदोलन और उसके इतिहास की राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
अब अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया पर नजर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तीखे बयान के बाद राजनीतिक हलकों में समाजवादी पार्टी की अगली प्रतिक्रिया को लेकर चर्चा हो रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड के स्वाभिमान और राज्य आंदोलन के संघर्ष का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
वहीं, अखिलेश यादव अपने मूल बयान में भाजपा के घुसपैठिया संबंधी विमर्श और राजनीतिक आरोपों पर सवाल उठा रहे थे।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समाजवादी पार्टी अपनी टिप्पणी पर कोई स्पष्टीकरण देती है या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होते हैं।
फिलहाल इस बयान ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।





