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स्कूल में अचानक बेहोश हुई सातवीं की छात्रा, अस्पताल ले जाते समय मौत

कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक 13 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। रामकोला क्षेत्र के महुअवां गांव स्थित कंपोजिट जूनियर हाईस्कूल में बुधवार को कक्षा सात में पढ़ने वाली छात्रा नेहा भारती अचानक बेहोश हो गई। छात्रा की हालत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। नाराज ग्रामीणों ने दहाउर चौराहे पर छात्रा का शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जानकारी के अनुसार, 13 वर्षीय नेहा भारती रोज की तरह बुधवार को पढ़ाई करने के लिए स्कूल पहुंची थी। स्कूल में रहने के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ी। छात्रा के अचानक बेहोश होने के बाद स्कूल में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि स्कूल में तैनात एकमात्र शिक्षक उस समय विद्यालय में मौजूद नहीं थे।
छात्रा की हालत बिगड़ने की जानकारी मिलने के बाद उसे तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की कोशिश की गई। परिजनों को भी घटना के बारे में सूचना दी गई। नेहा को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था, लेकिन उसकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में छात्रा ने दम तोड़ दिया।
छात्रा की मौत की खबर जैसे ही परिवार के लोगों को मिली, घर में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव में भी घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। एक छात्रा की स्कूल में अचानक तबीयत बिगड़ने और बाद में मौत होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई।
ग्रामीणों ने स्कूल की व्यवस्था और घटना के समय शिक्षक की कथित अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और अचानक तबीयत खराब होने जैसी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के समय स्कूल में जिम्मेदार शिक्षक मौजूद नहीं थे। हालांकि शिक्षक की अनुपस्थिति के कारण और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
छात्रा की मौत से आक्रोशित ग्रामीण शव लेकर दहाउर चौराहे पर पहुंच गए। यहां शव रखकर लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के कारण मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीण छात्रा की मौत के मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग करने लगे।
परिजनों और ग्रामीणों का कहना था कि नेहा की तबीयत किन परिस्थितियों में अचानक बिगड़ी और उसे समय पर चिकित्सा सहायता मिल पाई या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही घटना के समय स्कूल में शिक्षक की मौजूदगी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई। ग्रामीणों का कहना था कि बच्चों की सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
घटना ने सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल में किसी छात्र या छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ने पर प्राथमिक सहायता और उसे जल्द स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस मामले में व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी।
हालांकि छात्रा की मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। नेहा अचानक क्यों बेहोश हुई और उसकी मौत किन चिकित्सकीय कारणों से हुई, इसका पता चिकित्सकीय जांच और अन्य जांच प्रक्रिया के बाद ही चल सकेगा। ऐसे में मौत के कारण को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
वहीं, ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पुलिस के सामने लोगों को शांत कराने की चुनौती खड़ी हो गई। प्रदर्शनकारी छात्रा के परिवार को न्याय दिलाने और मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग कर रहे थे। ग्रामीण चाहते हैं कि स्कूल में घटना के समय मौजूद परिस्थितियों की भी जांच की जाए।
13 वर्षीय नेहा की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस बेटी को परिवार ने सुबह पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा था, उसकी मौत की खबर मिलने से परिजन सदमे में हैं। गांव के लोग भी घटना से दुखी हैं और परिवार के साथ खड़े दिखाई दिए।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल छात्रा की मौत के वास्तविक कारण को लेकर है। पुलिस, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रा की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी, उसे किस तरह की सहायता उपलब्ध कराई गई और स्कूल स्तर पर किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों से ही घटना की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।





