उत्तर प्रदेश

करंट लगने से हाथ गंवाने वाले सिविल इंजीनियर ने कोर्ट के आदेश पर विजयनगर थाने में केस दर्ज कराया

Admindelhi1
22 April 2024 7:20 AM GMT
करंट लगने से हाथ गंवाने वाले सिविल इंजीनियर ने कोर्ट के आदेश पर विजयनगर थाने में केस दर्ज कराया
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शिकायतकर्ता के मुताबिक इन सभी की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा.

गाजियाबाद: संपत्ति मूल्यांकन के दौरान करंट लगने से हाथ गंवाने वाले सिविल इंजीनियर ने कोर्ट के आदेश पर विजयनगर थाने में केस दर्ज कराया है. मुकदमे में मकान बनाने वाले शिप्रा सन सिटी के बिल्डर और मकान मालिक के अलावा जीडीए वीसी और विद्युत निगम के मुख्य अभियंता को आरोपी बनाया गया है. शिकायतकर्ता के मुताबिक इन सभी की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा.

साहिबाबाद की शालीमार सिटी सोसाइटी में रहने वाले इंदर भूषण पांचाल का कहना है कि वह सिविल इंजीनियर और पेशे से संपति मूल्यांकनकर्ता हैं. इस कार्य को वह करीब 20 वर्षों से कर रहे हैं. उन्हें ज्योति शर्मा ने उन्हें अपने विजयनगर के सर्वोदय नगर स्थित मकान के मूल्यांकन का काम दिया था. 20 मार्च 2023 की शाम को वह मूल्यांकन करने के लिए गए थे. जीडीए द्वारा स्वीकृत मानचित्र मांगने पर ज्योति शर्मा ने बताया कि बिल्डर ने उन्हें कोई स्वीकृत मानचित्र नहीं दिया है. इसके अलावा बताया कि बिल्डर ने जीडीए के बिना अनुमति लिए बिल्डिंग का निर्माण कराया. मकान की बालकनी बिजली के नंगे तार से कु ही दूर थी. इंदर भूषण पांचाल के मुताबिक बालकनी की तरफ जाकर उन्होंने जैसे ही ग्रिल को छुआ तो उन्हें हाईवोल्टेज करंट लगा और आग लग गई. उनका दाहिना हाथ और पेट बुरी तरह जल गया. ज्योति और आसपास के लोग उन्हें अस्पताल ले गए, जहां से उन्हें दिल्ली सफजदरजंग रेफर कर दिया गया. उप के दौरान ह को उनका दायां हाथ काटना पड़ा.

बिल्डर और विद्युत निगम को भी जिम्मेदार ठहराया: इंदर भूषण पांचाल का कहना है कि विद्युत अधिनियम के मुताबिक विद्युत सप्लाई वाले मुख्य तार से भवन की दूरी पांच फीट होनी चाहिए, लेकिन बिल्डर ने महज दो फीट दूर बालकनी बनाई हुई थी. इसके अलावा जीडीए और विद्युत निगम ने भी लापरवाही बरती, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा. तमाम नियमों का उल्लंघन करने के संबंध में उन्होंने पुलिस में शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

रिपोर्ट दर्ज होने के संबंध में अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है. यदि निगम के कारण किसी को शारीरिक या आर्थिक नुकसान होता है, उसकी क्षतिपूर्ति विभागीय प्रक्रिया के तहत की जाएगी. -नीरज स्वरूप, मुख्य अभियंता, जोन- एक

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