उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री की जीरो टोलरेंस की नीति पर नहीं हो रहा काम

Admin Delhi 1
3 Dec 2022 9:45 AM GMT
मुख्यमंत्री की जीरो टोलरेंस की नीति पर नहीं हो रहा काम
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मोदीपुरम न्यूज़: मुख्यमंत्री की जीरो टोलरेंस नीति को प्रदूषण अधिकारी पलीता लगाने में जुटे हैं। प्रदूषण विभाग में जीरो टोलरेंस पर काम ही नहीं हो रहा हैं, जिसके चलते काली नदी में दो दर्जन फैक्ट्रियों का पानी दूषित हो रहा हैं। इसकी रिपोर्ट भी मनुष्य जीवन को खतरनाक हैं, लेकिन प्रदूषित पानी को रोका नहीं जा रहा है। सरकारी सिस्टम भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं।

दूषित पानी काली नदी में डाला जा रहा हैं। नीर फाउंडेशन ने काली नदी के पानी की जांच प्रयोगशाला में कराई थी, जिसमें जानलेवा तत्व काली नदी के पानी में मिले थे। रिपोर्ट पर तब प्रदूषण विभाग के अफसरों ने सवाल उठाये थे, लेकिन ये प्रयोगशाला भारत सरकार की मान्यता प्राप्त हैं, जिसकी रिपोर्ट पर उंगली नहीं उठाई जा सकती।

बड़ा सवाल ये है कि काली नदी को दूषित होने के लिए अभी तक कोई बचाव नहीं किये गए। जो फैक्ट्री यहां पर लगी है तथा दूषित पानी काली नदी में डाला जा रहा हैं, उसके लिए कोई प्लांट भी नहीं लगाया जा रहा हैं। प्रदूषण अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं।

रात तक आफिस में चलती है महफिल: उत्तर प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त करने का संकल्प लेकर सरकार चला रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस मिशन को मेरठ में प्रदूषण अधिकारी विजय कुमार पूरी तरह से विफल करने में लगे हुए है। क्योंकि यह अधिकारी प्रदूषण को रोकने में तो नाकाम हो रहा है, बल्कि उसके स्थान पर हॉट मिक्स प्लांट चलवाने और मीट फैैक्ट्री को चलाने में गणित बिठा रहा है। शाम होते-होते यह अधिकारी मीट कारोबारी और बसपा के एक पूर्व सांसद को अपने आफिस में बुलाकर महफिल जमा लेते हैं और प्रदूषण आॅफिस को भाजपा मुक्त कहकर पूर्व सांसद की शान में कसीदे पढ़े जाते हैं। हालांकि रात में आफिस खुले रहने का कई बार कर्मचारियों ने अधिकारी के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की, लेकिन यह अधिकारी किसी की सुनने को भी तैयार नही है।

मेरठ में इन दिनों प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आफिस बेहद सुर्खियों में है। क्योंकि इस आफिस में प्रदूषण अधिकारी विजय कुमार द्वारा चार माह पूर्व प्रदूषण अधिकारी के पद पर तैनाती ली गई थी। तभी से यह प्रदूषण अधिकारी चर्चाओं में है, क्योंकि मेरठ में गन्ने के कोल्हुओं में पन्नी जल रही है। हॉट मिक्स प्लांट बंद होने के बाद भी इस अधिकारी द्वारा चालू करा दिए गए है। प्रदूषण रोकने के लिए जिन कमेटियों का गठन किया गया। वह कमेटी कागजों तक सीमित रह गई है। यह अधिकारी फ ील्ड में जाने के बजाय अपने आफिस में एसी की ठंडी हवा में रहना ज्यादा पसंद करता है। क्योंकि इस अधिकारी का साफ कहना है कि उन्होंने अपने आफिस को भाजपा मुक्त कर रखा है। यहां कोई भी भाजपाई उन पर दबाव नहीं बना सकता है।

सरकारी खर्च का लाभ: प्रदूषण अधिकारी सरकारी खर्च का लाभ लेने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। क्योंकि यह अधिकारी अपने आफिस की गाड़ी से घर के सामान लाने में लगा देते हैं। खुद मीट कारोबारियों से गाड़ी मंगाकर उसका लाभ लेते हैं। इन कारोबारियों की आव भगत में भी सरकारी धन का ही प्रयोग किया जा रहा है। जो सरकारी धन की बंदरबाट की जा रही है।

कार्यप्रणाली से कराया जाएगा सीएम को अवगत: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में भ्रष्टाचार मुक्त कार्य किया जा रहा है। प्रदूषण अधिकारी द्वारा जो कार्य किए जा रहे हैं। उनकी शिकायत उनके समक्ष आई है।

वह अपने स्तर से जांच कराकर प्रदूषण अधिकारी की कार्य प्रणाली से मुख्यमंत्री को अवगत कराएंगे और प्रदूषण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।

-विमल शर्मा, जिलाध्यक्ष भाजपा

पूर्व सांसद की खातिरदारी से भाजपा नेता खफा:

सरकारी आफिस में पूर्व सांसद की खातिरदारी करना और भाजपाइयों के विरुद्ध बयानबाजी करना बेहद गंभीर विषय है। अगर इस तरह का मामला प्रदूषण अधिकारी द्वारा किया जा रहा है

तो इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी और प्रदूषण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।

-मनिंदरपाल सिंह, चेयरमैन जिला सहकारी बैंक मेरठ/बागपत

प्रदूषण अधिकारी की आवभगत से भड़के भाजपाई

प्रदूषण अधिकारी विजय कुमार पर पहले भी भ्रष्टाचार से सम्बंधित आरोप लगे हैं। 2016-17 में भी विजय कुमार को एई थे। तब मेरठ के ग्रामीणों द्वारा बंधक बना लिया गया था।

पूर्व सांसद की आव भगत जो प्रदूषण अधिकारी द्वारा की जा रही है। वह बेहद निंदनीय है। भाजपा सरकार में ऐसे अधिकारियों को बर्दाश्त नही किया जाएगा।

-पंडित शौकिंद्र भारद्वाज, जिलाध्यक्ष ब्राह्मण महासभा

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