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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को 'मिशन कर्मयोगी' के तहत उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार के कर्मचारियों के कौशल विकास और सरकारी सेवा में सुधार को लेकर दिशा-निर्देश तैयार करना था। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत कर्मचारियों की दक्षताओं और क्षमताओं का मूल्यांकन किया जाए और उन्हें नए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए आधुनिक सरकारी सेवाओं के अनुरूप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का व्यक्तिगत और पेशेवर विकास राज्य के सुचारू प्रशासन और नागरिकों की बेहतर सेवा के लिए आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी जोर दिया कि डिजिटल टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स और ई-गवर्नेंस की क्षमताओं को कर्मचारियों में बढ़ावा दिया जाए, ताकि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता, गति और कुशलता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि व्यवहारिक और वास्तविक कार्य क्षमता को सुधारने वाले हों।
बैठक में मानव संसाधन विभाग और राज्य प्रशासनिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रत्येक विभाग में कर्मचारियों की वर्तमान दक्षताओं और प्रशिक्षण की जरूरतों पर ब्रीफिंग दी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मिशन कर्मयोगी केवल सरकारी कर्मचारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक अहम कदम है।
सीएम योगी ने यह भी कहा कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, नेतृत्व क्षमता, समस्या-समाधान कौशल और डिजिटल साक्षरता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ट्रेनिंग मॉड्यूल में नियमित मूल्यांकन और फीडबैक सिस्टम शामिल किया जाए, ताकि कर्मचारियों की प्रगति का ट्रैक रखा जा सके।
बैठक में अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन हर विभाग में हो और कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वास्तविक सुधार आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मिशन के जरिए राज्य में नागरिक सेवा को और अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकेगा।
राज्य सरकार की पहल मिशन कर्मयोगी कर्मचारियों की क्षमताओं को उभारने और उन्हें नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने का प्रयास है। इसके तहत कर्मचारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, डिजिटल कौशल, नीति निर्माण में भागीदारी और नेतृत्व विकास के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बैठक का समापन करते हुए कहा कि मिशन कर्मयोगी का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को दक्ष, सक्षम और आधुनिक प्रशासन के मामले में मॉडल राज्य बनाना है। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि कर्मचारियों की प्रगति और प्रशिक्षण की रिपोर्ट नियमित रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाए, ताकि राज्य में सरकारी सेवा में गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ सके।
इस बैठक के बाद राज्य में मिशन कर्मयोगी को और प्रभावी बनाने के लिए अलग-अलग विभागों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने और विशेषज्ञों की मदद लेने की योजना तैयार की जा रही है।
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