उत्तर प्रदेश

अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में केंद्र सरकार कमजोर, टैरिफ 18% तक घटा

SHIDDHANT
3 Feb 2026 10:03 PM IST
अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में केंद्र सरकार कमजोर, टैरिफ 18% तक घटा
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Lucknow लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयातित सामान पर पहले 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने अमेरिकी नेतृत्व के साथ वार्ता की और टैरिफ को 18 प्रतिशत तक कम कर दिया, जबकि उनके अनुसार यह टैरिफ शून्य प्रतिशत होना चाहिए था।
रविदास मेहरोत्रा ने लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, "भारत की केंद्र सरकार इतनी कमजोर है कि अमेरिका के सामने अपने हितों को ठीक से नहीं रख पा रही है। अगर केंद्र ने सही तरीके से वार्ता की होती, तो टैरिफ 18 प्रतिशत तक नहीं, बल्कि जीरो प्रतिशत किया जा सकता था। इससे भारतीय व्यापारियों और किसानों को बड़ा लाभ मिलता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टैरिफ में कटौती का सीधा असर घरेलू उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ेगा। मेहरोत्रा ने कहा कि अमेरिकी कृषि उत्पाद और अन्य वस्तुएं अब भारत में सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगी, जिससे भारतीय किसानों और छोटे उद्योगपतियों को नुकसान हो सकता है।
सपा विधायक ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अपने आर्थिक और व्यापारिक निर्णयों में अमेरिकी दबाव के आगे ज्यादा समझौते किए हैं। उन्होंने कहा, "यह न केवल व्यापारिक नुकसान है, बल्कि हमारी आर्थिक संप्रभुता पर भी सवाल उठता है। सरकार को देशहित के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए। इसके अलावा, मेहरोत्रा ने संसद में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के संबंध में पूरी पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को सभी तथ्य और वार्ता की शर्तें सदन के समक्ष रखनी चाहिए ताकि विपक्ष और जनता को स्पष्ट जानकारी मिल सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में टैरिफ में कटौती से निर्यातकों को लाभ होगा, लेकिन घरेलू कृषि क्षेत्र और छोटे व्यवसायों को अस्थायी दबाव का सामना करना पड़ सकता है। रविदास मेहरोत्रा ने इसे केंद्र सरकार की नीति की कमजोरी के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को गंभीर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय किसानों और उद्योगों के हित से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि भविष्य में किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता में देश के हितों की रक्षा के लिए अधिक सुदृढ़ और ठोस रणनीति अपनाई जाए।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में व्यापार समझौते को लेकर नई बहस छिड़ गई है, और विपक्ष ने इसे केंद्र सरकार की अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर सवाल उठाने का अवसर माना है। सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा के इस बयान ने किसानों, व्यापारियों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच गंभीर चर्चा को जन्म दिया है, और यह विषय आने वाले दिनों में संसद और मीडिया में गहराई से उठ सकता है।
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