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गो-आश्रय स्थलों को मिली गोचर भूमि की ताकत, चारे की बढ़ी उपलब्धता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने हरित चारा आच्छादन अभियान को तेज कर दिया है। सरकार का लक्ष्य गो-आश्रय स्थलों को गोचर भूमि से जोड़कर पशुओं के लिए स्थायी रूप से हरे चारे की व्यवस्था करना है। इसी दिशा में प्रदेश के 5,050 गो-आश्रय स्थलों को गोचर भूमि से जोड़ा जा चुका है। इस अभियान में हरदोई जिला सबसे आगे निकलकर प्रदेश में नंबर वन स्थान पर है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश की 58,115 ग्राम पंचायतों में कुल 61,118.85 हेक्टेयर गोचर भूमि उपलब्ध है। प्रदेश में संचालित 6,287 अस्थायी और स्थायी गो-आश्रय स्थलों में से 5,050 आश्रय स्थलों को 10,421.45 हेक्टेयर गोचर भूमि से जोड़ा गया है। इस भूमि पर हरित चारा उगाने का काम किया जा रहा है, जिससे निराश्रित और संरक्षित गोवंश को पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक चारा मिल सके।
सरकार ने गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने पर भी विशेष जोर दिया है। अब तक प्रदेश में 39,721 हेक्टेयर गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इस भूमि का उपयोग अब पशुओं के लिए चारा उत्पादन और गो-आश्रय स्थलों की जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है।
पशुपालन विभाग के अनुसार गोचर भूमि पर हरित चारा आच्छादन के मामले में हरदोई जिला प्रदेश में सबसे आगे है। यहां 462.76 हेक्टेयर क्षेत्र में हरे चारे की खेती की गई है। इसके बाद फतेहपुर में 176.69 हेक्टेयर, रायबरेली में 163.33 हेक्टेयर, संभल में 152.74 हेक्टेयर, आगरा में 151 हेक्टेयर और अलीगढ़ में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में हरित चारा तैयार किया गया है। इसके अलावा बहराइच, बाराबंकी, फिरोजाबाद और हमीरपुर जैसे जिलों में भी अभियान के तहत तेजी से काम किया जा रहा है।
प्रदेश सरकार का कहना है कि गोवंश संरक्षण केवल आश्रय स्थल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुओं को बेहतर भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी को ध्यान में रखते हुए चारे और पेयजल की व्यवस्था, पशु चिकित्सा सेवाओं का विस्तार, गर्मी के प्रभाव से बचाव और रोगों की निगरानी के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
सरकार ने सबसे पहले उन जिलों की पहचान की है, जहां चारे की कमी की समस्या ज्यादा रहती है। विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ जिलों में चारे की उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में अधिक उत्पादन वाले जिलों से चारा और भूसा पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही अधिसूचित वन क्षेत्रों से घास और अन्य चारा संसाधनों का उपयोग भी किया जाएगा।
पशुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए असंतुलित चारे से होने वाली नाइट्रेट और नाइट्राइट विषाक्तता से बचाव के लिए पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं, जिन इलाकों में पानी की कमी है, वहां तालाबों और पोखरों को नहर या नलकूपों के माध्यम से भरने की योजना बनाई गई है। जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकरों की व्यवस्था भी की जाएगी।
योगी सरकार वीबी-जी-राम-जी योजना के तहत चारागाह और गोचर भूमि के विकास को भी बढ़ावा देगी। इसका उद्देश्य पशुओं के लिए लंबे समय तक चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके अलावा पशुओं को बेहतर उपचार देने के लिए जीवन रक्षक दवाओं और टीकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।
गर्मी के मौसम में पशुओं को हीट स्ट्रेस से बचाने के लिए मिनरल मिक्सचर और इलेक्ट्रोलाइट का वितरण किया जा रहा है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई है। पशुओं को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 520 मोबाइल वेटरनरी यूनिट सक्रिय हैं, जिनकी सेवाएं 1962 टोल फ्री नंबर के माध्यम से 24 घंटे उपलब्ध हैं।
सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य गोवंश और अन्य पशुधन की सुरक्षा के साथ-साथ पशुपालकों को भी सहायता उपलब्ध कराना है। गोचर भूमि के विकास और हरित चारा उत्पादन बढ़ने से आने वाले समय में गो-आश्रय स्थलों की निर्भरता कम होगी और पशुओं को बेहतर पोषण मिल सकेगा।





