उत्तर प्रदेश

बलिया अस्पताल में लाखों की अवैध वसूली का मामला

Saba Naaz
4 July 2026 2:41 PM IST
बलिया अस्पताल में लाखों की अवैध वसूली का मामला
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उत्तर प्रदेश: बलिया जिला महिला अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है, जिसमें अस्पताल का एक कर्मचारी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के एवज में 250 रुपये मांगता हुआ दिखाई दे रहा है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

आरोप है कि जिला महिला अस्पताल में लंबे समय से जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर मरीजों और उनके परिजनों से अवैध वसूली की जा रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रत्येक प्रमाण पत्र के लिए 250 से 300 रुपये तक लिए जाते थे। यदि अनुमान लगाया जाए तो प्रतिदिन कई मामलों में यह राशि हजारों रुपये तक पहुंच जाती है, जिससे महीने और साल भर में यह रकम लाखों रुपये में बदल जाती है। हालांकि, इन आंकड़ों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह केवल आरोपों पर आधारित अनुमान है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार की ओर से जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है, तो फिर मरीजों से पैसे क्यों लिए जा रहे थे। इस मामले पर जिला महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. राकेश चंद्रा ने कहा है कि जन्म प्रमाण पत्र के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी इस तरह की वसूली में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन कुछ समय बाद मामला शांत हो जाता है। आरोप है कि छोटी-छोटी रकम होने के कारण लोग शिकायत करने से बचते हैं, जिससे इस तरह की गतिविधियां लंबे समय तक चलती रहती हैं। अब इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि अस्पताल प्रशासन का दावा सही है, तो वायरल वीडियो में पैसे मांगने वाला कर्मचारी कौन है और वह किसके इशारे पर यह काम कर रहा था। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि अगर पहले भी शिकायतें मिलती रही हैं तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच की बात कही है। जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि वायरल वीडियो में दिख रहे आरोप कितने सही हैं और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार हैं। तब तक यह मामला अस्पताल की व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

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