उत्तर प्रदेश

लखनऊ में अवैध चैंबरों पर चला बुलडोजर, वकीलों का जोरदार प्रदर्शन

Rajeshwari Nishad
25 Oct 2026 12:46 PM IST
लखनऊ में अवैध चैंबरों पर चला बुलडोजर, वकीलों का जोरदार प्रदर्शन
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को कैसरबाग स्थित कचहरी परिसर के आसपास उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब नगर निगम की टीम ने सरकारी जमीनों और फुटपाथों पर बने अवैध अधिवक्ता चैंबरों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद नगर निगम के अधिकारी भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंचे। जैसे ही अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई, बड़ी संख्या में वकील विरोध में उतर आए। अधिवक्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान मौके पर जमकर हंगामा हुआ और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर तनाव की स्थिति बन गई।
हाईकोर्ट के आदेश पर अवैध चैंबरों के खिलाफ कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, कैसरबाग कचहरी के आसपास सरकारी जमीनों और फुटपाथों पर लंबे समय से अधिवक्ताओं के अस्थायी और स्थायी चैंबर बने हुए हैं। इन निर्माणों को अवैध बताते हुए नगर निगम की ओर से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद नगर निगम ने रविवार को अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया। अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद रहे, ताकि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।नगर निगम की टीम बुलडोजर और अन्य संसाधनों के साथ पहुंची। हालांकि, अभियान शुरू होते ही वकीलों ने विरोध करना शुरू कर दिया।
बुलडोजर पहुंचते ही वकीलों ने शुरू किया हंगामा
रविवार को जैसे ही नगर निगम के अधिकारी बुलडोजर लेकर कैसरबाग कचहरी के आसपास पहुंचे, वहां मौजूद अधिवक्ताओं में नाराजगी फैल गई।बड़ी संख्या में वकील एकजुट होकर कार्रवाई का विरोध करने लगे। उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।अधिवक्ताओं के विरोध के कारण मौके पर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। एक तरफ नगर निगम की टीम अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के लिए पहुंची थी, वहीं दूसरी ओर वकील अपने चैंबरों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध कर रहे थे।इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच गतिरोध की स्थिति बनी रही।
सरकारी जमीन और फुटपाथों पर वर्षों से बने हैं चैंबर
कैसरबाग कचहरी के आसपास सरकारी जमीनों और फुटपाथों पर वर्षों से अधिवक्ताओं के चैंबर बने होने की बात सामने आई है।इन चैंबरों का उपयोग वकील अपने कार्यालय के रूप में करते हैं। यहां अधिवक्ता अपने मुवक्किलों से मुलाकात करते हैं और कानूनी मामलों से संबंधित कामकाज निपटाते हैं।हालांकि, सरकारी जमीन और सार्वजनिक फुटपाथों पर बिना अनुमति किए गए निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में आते हैं।ऐसे निर्माणों के कारण सार्वजनिक स्थानों के उपयोग और पैदल यात्रियों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि सार्वजनिक जमीनों से अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम को कार्रवाई करनी पड़ती है।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चला अभियान
वकीलों के विरोध की संभावना को देखते हुए नगर निगम की टीम के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।कार्रवाई के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना थी।कचहरी जैसे संवेदनशील स्थान पर बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की मौजूदगी के बीच अतिक्रमण हटाने का अभियान प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रहा।नगर निगम की टीम और विरोध कर रहे वकीलों के बीच स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद रहे।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी व्यक्ति के घायल होने या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
कार्रवाई के विरोध में धरने पर बैठे अधिवक्ता
नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ बड़ी संख्या में अधिवक्ता धरना-प्रदर्शन करने लगे।वकीलों के विरोध से यह स्पष्ट हो गया कि चैंबर हटाने की कार्रवाई को लेकर अधिवक्ताओं में नाराजगी है।कचहरी परिसर के आसपास बने चैंबर वकीलों के दैनिक कामकाज से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन्हें हटाने से उनके कार्यालय और मुवक्किलों से मुलाकात की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।हालांकि, अधिवक्ताओं की ओर से प्रशासन के सामने रखी गई विशिष्ट मांगों और प्रस्तावों का विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आया है।
हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी
इस पूरे मामले में हाईकोर्ट के आदेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के निर्देशों के बाद नगर निगम के लिए सार्वजनिक जमीनों से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई करना जरूरी हो गया है।प्रशासनिक अधिकारियों के सामने एक ओर न्यायालय के निर्देशों का पालन करने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर विरोध कर रहे अधिवक्ताओं के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी है।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक जमीनों पर किए गए अतिक्रमण के मामलों में संबंधित प्राधिकरण को लागू नियमों और न्यायालय के आदेशों के अनुसार कार्रवाई करनी होती है।
हालांकि, किसी भी निर्माण को हटाने की प्रक्रिया में संबंधित कानूनी प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना भी आवश्यक है।कैसरबाग कचहरी के आसपास अवैध चैंबरों का मामला नया नहीं बताया जा रहा है। वर्षों से सरकारी जमीनों और फुटपाथों पर बने निर्माणों को लेकर विवाद की स्थिति रही है।
एक बार फिर नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।सार्वजनिक जमीनों से अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान अक्सर प्रभावित पक्षों और प्रशासन के बीच विवाद सामने आते हैं।ऐसे मामलों में स्थायी समाधान के लिए न्यायालय के निर्देशों का पालन, सार्वजनिक सुविधाओं की सुरक्षा और संबंधित पक्षों के बीच संवाद महत्वपूर्ण माना जाता है।
कचहरी परिसर के आसपास तनावपूर्ण माहौल
रविवार को हुई कार्रवाई के दौरान वकीलों के विरोध और धरना-प्रदर्शन के कारण कैसरबाग कचहरी के आसपास तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।नगर निगम के अधिकारियों और पुलिस बल की मौजूदगी के बीच अवैध चैंबरों को हटाने की कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई।हालांकि, इस अभियान में कुल कितने चैंबर हटाए गए, कितने निर्माणों को चिह्नित किया गया और आगे की कार्रवाई के लिए क्या योजना बनाई गई है, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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